मलेरिया के ‘हाई रिस्क’ ब्लॉक और गांवों पर रहेगी स्वास्थ्य विभाग की नजर

Apr 06, 2026 02:50 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
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मलेरिया के ‘हाई रिस्क’ ब्लॉक और गांवों पर रहेगी स्वास्थ्य विभाग की नजर

बरसात से पहले मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के ‘हाई रिस्क’ ब्लॉकों और गांवों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। पिछले वर्ष सामने आए मलेरिया के मामलों को देखते हुए इस बार पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। विभाग की ओर से सर्वे, उपचार और रोकथाम के लिए बहुस्तरीय योजना लागू की गई है, ताकि समय रहते संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा पंचायती राज विभाग, नगर निगम, ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को भी अन्य जिम्मेदारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष सबसे अधिक मलेरिया के मामले मझगवां ब्लॉक में 592 और मीरगंज में 500 सामने आए थे। वहीं पिछले वर्ष जिले में मलेरिया के कुल मामले 1938 मामले सामने आए थे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अधिक मामले वाले करीब 90 गांवों और 20 से अधिक शहरी क्षेत्रों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखते हुए विशेष निगरानी की जा रही है। इन इलाकों में नियमित सर्वे, जांच और दवा वितरण की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। साथ आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लोगों के घर-घर जाकर जानकारी जुटाने व जागररूक करने की जिम्मेदारी दी गई है।मलेरिया के मरीजों के उपचार पर विशेष तैयारीमलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के उपचार और विशेष देखभाल के लिए व्यापक तैयारी की है। जिला अस्पताल में मलेरिया मरीजों के लिए 10 बेड आरक्षित किए गए हैं, जबकि जिले के विभिन्न सीएचसी और पीएचसी पर कुल 188 बेड सुरक्षित रखे गए हैं। इसके साथ ही आवश्यक दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। जरूरत पड़ने पर बेडों की संख्या बढ़ाने की भी व्यवस्था रखी गई है, जिससे किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।लार्वा को खत्म कर मलेरिया पर लगेगी रोकमलेरिया और मच्छरों के लार्वा की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष संदिग्ध इलाकों में करीब 2.5 लाख घरों का सर्वे कराया गया, जिसमें 12 हजार से अधिक घरों में मलेरिया का लार्वा पाया गया। पिछले वर्ष प्रभावित रहे स्थानों पर लार्वा नष्ट करने के लिए पहले ही तैयारियां कर ली गई है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के उद्देश्य से पिछले वर्ष जिले के 22 तालाबों में गंबूसिया मछली छोड़ी गई थी, जो लार्वा को खाकर उनकी संख्या कम करने में सहायक मानी जाती है।अभियान में सख्ती के साथ हो रही निगरानीसंचारी रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग अभियान को सख्ती से लागू कर रहा है। सीएमओ विश्राम सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य टीमें लगातार गांवों में पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं। संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर अभियान को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मलेरिया और डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

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