असंगठित कारोबार की होगी डिजिटल मैपिंग: बरेली में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वे, छोटे व्यापारियों की बदलेगी तस्वीर
Bareily News - बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे छोटे कारोबारों और घरेलू उद्योगों की स्थिति जानने के लिए सरकार ने 'असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण' शुरू किया है। यह सर्वे बरेली समेत 15 जिलों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य डिजिटल बदलाव, रोजगार सृजन और जीडीपी योगदान की जानकारी जुटाना है। सर्वे दिसंबर तक चलेगा।

जिले में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे छोटे कारोबार, वर्कशॉप और घरेलू उद्योग अब सरकार की नजर में आ रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय ने ‘असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण’ शुरू कर दिया है, जिसके जरिए इन इकाइयों का विस्तृत डेटा जुटाया जा रहा है। इस सर्वे से न सिर्फ छोटे उद्योगों की डिजिटल मैपिंग होगी, बल्कि यह भी सामने आएगा कि कितने कारोबारियों ने यूपीआई, नेट बैंकिंग और ई-कॉमर्स जैसे आधुनिक माध्यमों को अपनाया है। दरअसल, देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को और मजबूती देने के लिए उद्योग-कारोबार की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा जरूरी है। संगठित क्षेत्र के उद्योगों का डेटा तो उपलब्ध है, लेकिन असंगठित क्षेत्र जहां लाखों लोग रोजगार से जुड़े हैं, उसकी सटीक तस्वीर अब तक सामने नहीं आ सकी थी।
इसी कमी को दूर करने के लिए यह राष्ट्रीय स्तर का सर्वे शुरू किया गया है। बरेली इस सर्वे के लिए बेहद अहम जिला माना जा रहा है। यहां का विश्व प्रसिद्ध ज़री-ज़रदोज़ी, बांस-बेंत फर्नीचर और पतंग उद्योग बड़े पैमाने पर असंगठित श्रेणी में आता है। अनुमान है कि इन क्षेत्रों का करीब 90 फीसदी हिस्सा बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा है। ऐसे में इनका वास्तविक टर्नओवर और रोजगार का आंकड़ा सामने आना देश की जीडीपी गणना के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।बरेली स्थित सांख्यिकी मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय इस सर्वे के तहत बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर और लखनऊ मंडल के 15 जिलों में डेटा संग्रह कर रहा है। इस बार सर्वे सिर्फ इकाइयों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके डिजिटल बदलाव और वास्तविक आय का भी आकलन किया जा रहा है। पहली बार सूक्ष्म स्तर पर यह जांचा जा रहा है कि छोटे व्यापारी डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को किस हद तक अपना चुके हैं।सर्वे को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए गणना अधिकारी कागजी फार्म की बजाय टैबलेट का उपयोग कर रहे हैं। इससे डेटा संग्रहण में त्रुटियों की संभावना कम होगी और जानकारी तेजी से संकलित हो सकेगी।भविष्य की योजनाओं का बनेगा आधारइस सर्वे से प्राप्त आंकड़े भविष्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए सरकारी नीतियों, सब्सिडी और ऋण योजनाओं को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि छोटे उद्योग किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और उन्हें किस तरह की सहायता की जरूरत है। सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम-2008 के तहत कारोबारियों से ली गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस डेटा का उपयोग किसी भी प्रकार की टैक्स वसूली या कानूनी कार्रवाई के लिए नहीं किया जाएगा।दिसंबर तक चलेगा सर्वेक्षणवरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी आशुतोष द्विवेदी के अनुसार, यह सर्वे दिसंबर तक जारी रहेगा। इसके तहत कुटीर उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ी विनिर्माण, व्यापार और सेवा गतिविधियों की वास्तविक स्थिति, रोजगार सृजन की क्षमता, जीडीपी में योगदान और मौजूदा चुनौतियों से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। यह सर्वे न केवल असंगठित क्षेत्र की सटीक तस्वीर पेश करेगा, बल्कि आने वाले समय में छोटे कारोबारियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।
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