प्रदेश में अब चिकित्सा महाविद्यालयों, निजी मेडिकल कालेजों में भी होंगे पोस्टमार्टम
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चिकित्सा शिक्षा को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए अब शासन ने नई पहल की है। शासन ने निर्देश जारी किया है कि अब शवों का पोस्टमार्टम राजकीय चिकित्सा शिक्षा महाविद्यालयों के साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों में भी होगा। इसके लिए सभी जिलों के सीएमओ को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान (प्रैक्टिकल एजुकेशन) देना और शव परीक्षण की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझाना है। शवों का पोस्टमार्टम अब तक जिला अस्पतालों या सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक सीमित थी। दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को फोरेंसिक मेडिसिन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव के लिए मानव शरीर संरचना की जानकारी होना जरूरी है।
इसे देखते हुए शासन ने यह पहल की है। नए निर्देशों के तहत, मेडिकल कॉलेजों के शव-विच्छेदन गृहों का उपयोग अब पोस्टमार्टम के लिए किया जाएगा। इससे एमबीबीएस और पीजी कर रहे छात्रों को मानव शरीर की संरचना और मृत्यु के कारणों का गहन अध्ययन करने का सीधा अवसर मिलेगा। यह पोस्टमार्टम सरकारी चिकित्सक ही करेंगे और मेडिकल छात्र इस दौरान शवों का परीक्षण कर सकेंगे। निजी मेडिकल कालेजों में सिर्फ लावारिस शवों का होगा पोस्टमार्टम शासन ने इस नए निर्देश के साथ कई शर्तों का भी प्रावधान किया है। इसके तहत निजी मेडिकल कालेज में लावारिस शवों का ही पोस्टमार्टम किया जा सकेगा। इसकी भी सीएमओ से अनुमति होना आवश्यक है। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी की भी तैनाती की जाएगी। शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टरों की मौजूदगी में होगा पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम के दौरान मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह न केवल छात्रों को सिखाने के लिए जरूरी है, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान इन शवों का परीक्षण कर सकेंगे, जिससे उन्हें अपराध विज्ञान और फोरेंसिक साक्ष्यों को समझने में मदद मिलेगी। चिकित्सा शिक्षा में व्यवहारिक ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है। मेडिकल के छात्र पोस्टमार्टम के दौरान शवों का पोस्टमार्टम प्रक्रिया न केवल देखेंगे बल्कि मानव शरीर संरचना समझने में भी काफी मदद मिलेगी। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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