हिन्दुस्तान की सलामती के लिए बारगाह ए इलाही में झुके सिर
- कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाजियों ने अदा की बकरीद की नमाज हिन्दुस्तान की सलामती के लिए बारगाह ए इलाही में झुके सिर हिन्दुस्तान की सलामती के लि

बरेली, वरिष्ठ संवाददाता। ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज जिले भर की 176 ईदगाह और 1415 मस्जिदों में अमनो अमान की दुआ के साथ पढ़ी गई। सभी से मिल जुलकर ईद मनाने और किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाने की अपील की हुई। बकरीद की नमाज कड़ी सुरक्षा के बीच हुई। मुख्य नमाज बाकरगंज स्थित ईदगाह में खुशनुमा माहौल में नमाज अदा की। इस दौरान नमाज में हिन्दुस्तान की सलामती और अमन, एकता और खुशहाली के लिए दुआ की गई। लोगों ने गले मिलकर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद भी दी। गुरुवार से बकरीद का त्योहार सौहार्द्र और उत्साह के माहौल में मनाया जा रहा है। सुबह के समय शहर की मस्जिदों और बाकरगंज स्थित ईदगाह में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि सुबह से ही ईदगाह समेत सभी छोटी-बड़ी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ी। उधर, शहर में मुख्य नमाज बाकरगंज स्थित ईदगाह में सुबह 10 बजे काजी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती असजद मियां ने अदा कराई। सभी से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां, महासचिव फरमान मियां ने सबको गले लगकर ईद की मुबारकबाद पेश। ईदगाह कमेटी के लोगों ने भी काजी ए हिन्दुस्तान के ईदगाह पहुंचने पर जोरदार इस्तकबाल किया। ईदगाह समेत सभी मस्जिदों में हजरत इब्राहीम व हजरत ईस्माइल की जानवरों की कुर्बानी का वाक्या इमामों ने बयान किया।
सबसे पहले और बाद में इन मस्जिदों में पढ़ी नमाज
नासिर कुरैशी ने जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले बाजार संदल स्थित दरगाह वली मियां की चांद मस्जिद में सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर नमाज अदा की गई। सबसे आखिर में दरगाह आला हजरत स्थित रजा मस्जिद में मुफ्ती जईम रजा ने साढ़े दस बजे नमाज अदा कराई। दुआ तौसीफ मियां ने की। यहां दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां समेत खानदान के बुजुर्गों समेत आदि ने नमाज पढ़ी। दरगाह ताजुशशरिया, दरगाह शाह शराफत अली मियां, खानकाह ए वामिकिया निशातिया, दरगाह बशीर मियां और खानकाहे नियाजिया समेत किला की जामा मस्जिद, दरगाह नासिर नोमहला मस्जिद में, दरगाह शाहदाना वली पर नमाज अदा की गई।
सड़कों पर नहीं हुई नमाज, पहरे में रहा इंतजाम
इस बार भी ईद-उल-अजहा की नमाज सड़क पर नहीं पढ़ी गई। नमाज शुरू होते ही ईदगाह भरने के बाद लोग खुद ही मस्जिदों में नमाज पढ़ने के लिए निकल पड़े। हालांकि पुलिस प्रशासनिक बंदोबस्त काफी सख्त था। सड़क पर नमाज न पढ़ने की हिदायत पहले की दी जा चुकी थी।बकरीद को लेकर पुलिस प्रशासन ने तमाम तैयारियां कर रखी थी।
मस्जिदों से दिया पैगाम हरियाली को लगाएं पौधे
बकरीद पर शहर से लेकर देहात की ईदगाह, मस्जिदें खचाखच भरी रही। हरियाली के लिए पौधे लगाने की अपील की गई। मस्जिदों में नमाजियों को पौधे भी बांटे गए। नमाज अदा करने वाले इमामों ने यही पैगाम दिया पौधे बचाने और लगाने में हम सभी की जिम्मेदारी है। इमामों ने कहा कि इस्लाम में पर्यावरण संरक्षण को बहुत अहमियत दी गई है।
ईदगाह सहित कई जगह लगे मेले
ईद-उल-अजहा के मौके पर शहर में कई जगहों पर बच्चों के लिए मेले भी आयोजित किए गए। ईदगाह समेत कई स्थानों पर मेलों में खासी रौनक रही। बच्चों ने झुलों और खान पान की चीजों का जमकर मजा लिया। खिलौने भी खरीदे। बच्चों के साथ परिवार के बाकी सदस्य भी मेले में पहुंचे।
दो शिफ्टों में हुई नमाज
पहले गढ़ी मस्जिद में नमाजियों की संख्या अधिक होने के चलते यहां दो शिफ्टों में नमाज अदा कराई गई। कानून व्यवस्था बरकरार रखने के लिए पुलिस प्रशासनिक और नगर निगम के अधिकारी शहर में दौड़ लगाते रहे। ईदगाह पर सुरक्षा इंतजाम का जायजा लिया। शहर की दूसरी मजिस्दों पर भी सुरक्षा व्यवस्था को परखा गया। साफ-सफाई को लेकर विशेष ध्यान देने के निर्देश नगर आयुक्त ने दिए।
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