
अभियान : हथेली पर हमारी जान, रेलवे अधिकारी क्यों नहीं दे रहे ध्यान
संक्षेप: Bareily News - दोहना रेल अंडरपास, जो पहले लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, अब जलभराव के कारण खतरे का प्रतीक बन गया है। इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को रोजाना रेल पटरी पार करके आने-जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। रेलवे प्रशासन ने अब मेंटेनेंस कार्य की स्वीकृति दे दी है, लेकिन छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे धरना देंगे।
दोहना रेल अंडरपास, जो कभी लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, आज खतरे का पर्याय बन चुका है। पिछले करीब पांच महीने से अंडरपास में जलभराव की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। नतीजा यह है कि स्थानीय लोग और इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र रोजाना जान जोखिम में डालकर रेल पटरी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। छात्रों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। शनिवार दोपहर दर्जनों छात्र-छात्राएं कक्षाओं में पहुंचने के लिए पानी से भरे अंडरपास को छोड़ सीधे रेल लाइन से होकर गुजरते दिखे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पता है कि यह गलत और खतरनाक है, तो सभी ने एक स्वर में कहा, ‘हां, हमें मालूम है, लेकिन मजबूरी है।’ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र राकेश, अक्षय और विकास ने बताया कि पिछले कई महीनों से अंडरपास में इतना पानी भरा रहता है कि पैदल या बाइक से निकलना नामुमकिन हो गया है। कई बार छात्र और राहगीर फिसलकर घायल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि रोजाना यह खतरा मोल लेकर रेल पटरी से गुजरना पड़ता है, क्योंकि दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है। छात्रों ने बताया कि अंडरपास के निर्माण के समय ही जल रिसाव की समस्या दिखाई दे रही थी, लेकिन रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने उस पर ध्यान नहीं दिया। आसपास के तालाब से पानी रिसकर अंडरपास में जमा हो जाता है। यह लापरवाही अब जनता पर भारी पड़ रही है। इस समस्या से न केवल छात्र, बल्कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी परेशान हैं। कई बार ट्रेन आने से पहले लोग भागते हुए पटरी पार करते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही रेलवे विभाग ने जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया, तो वे सभी धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। जनसमस्या बनकर रह गई जनसुविधा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों का कहना है कि यह अंडरपास करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से 2023 में बनाया गया था। अब यह उदाहरण बन गया है कि लापरवाही से किया गया निर्माण कैसे जनसुविधा को जनसमस्या में बदल देता है। छात्रों की मांग है कि रेलवे विभाग तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करे, ताकि दोहना अंडरपास से गुजरने वाले लोगों की ‘हथेली पर रखी जान’ सुरक्षित हो सके। अंडरपास मेंटेनेंस को मिली स्वीकृति दोहना अंडरपास में जलभराव की लगातार शिकायतों और अखबार में प्रकाशित खबरों के बाद आखिरकार रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया है। इज्जतनगर रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने अंडरपास के मेंटेनेंस कार्य को स्वीकृति दे दी है। सीनियर डीसीएम संजीव शर्मा ने बताया कि दोहना अंडरपास के मेंटेनेंस कार्य के लिए निर्माण एजेंसी को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। कार्य जल्द शुरू होगा और जलभराव की समस्या से जल्द राहत मिलेगी। दोहना अंडरपास के पास जलभराव की वजह से अंडरपास से गुजरना बेहद मुश्किल हो गया था। आसपास के गांवों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को मजबूरी में रेल पटरी से होकर आना-जाना पड़ रहा था, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। हिन्दुस्तान समाचार पत्र में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों का संज्ञान लेकर शुक्रवार को किसान एकता संघ के कार्यकर्ताओं ने भी स्थानीय ग्रामीणों के साथ अंडरपास पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया था। दो दिन में मेंटेनेंस कार्य शुरू न होने पर रेल मंडल कार्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी थी। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी। बताया जा रहा है कि शनिवार दोपहर प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगते ही गाजियाबाद स्थित निर्माण एजेंसी की टीम बरेली के लिए रवाना हो गई। रविवार को टीम मौके पर पहुंचकर सर्वे करेगी और कार्य योजना के अनुसार मेंटेनेंस कार्य शुरू कराया जाएगा।

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