
सुसाइट नोट में जिंदगी बदतर लिख, युवती ट्रेन के आगे कूदी
Bareily News - नवाबगंज की 30 वर्षीय गुलनाज ने नौकरी न मिलने से तंग आकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने अपनी असफलताओं और जीवन से निराशा की बात कही। परिवार में उसके पिता फहीम और मौसा पप्पू का नाम लिखा था। जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
नवाबगंज। नौकरी के लिए संघर्ष कर थक चुकी युवती ने लगातार मिल रहीं असफलताओं से तंग आकर जान दे दी। सुसाइट नोट में अपनी व्यथा लिखकर बिजौरिया स्टेशन पर ट्रेन के आगे कूद गई। उसके पास से मौसा और पापा के नाम सुसाइड नोट मिला। पीलीभीत जीआरपी शव को पोस्टमार्टम के लिये ले गई। बिजौरिया स्टेशन पर रेलवे फाटक के पास सोमवार की सुबह एक युवती ट्रेन के आगे कूद गई। लोको पायलट ने ट्रेन को रोका। ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, आरपीएफ,जीआरपी और सिविल पुलिस पहुंची। शव ट्रैक से हटाया गया। इसके बाद ट्रेन रवाना हुई। युवती की पहचान 30 वर्षीय गुलनाज पुत्री फहीम के रूप में हुई।
परिवार से मौसा पप्पू, पिता फहीम आदि पहुंच गये। पिता और मौसा के नाम से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें संघर्ष करने के बाद भी नौकरी न मिलने की बात लिखी थी। घर वालों के अनुसार गुलनाज किसी परीक्षा के लिए पेपर दे रही थी। घर से सुबह पेपर देने निकली थी लेकिन सालों से असफलताएं ही मिल रही थीं। इससे वह टूट गई और जान दे दी। इंस्पेक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घटना स्थल जीआरपी पीलीभीत थाना क्षेत्र में था। जीआरपी ने ही पंचनामा की कार्रवाई की है। पिता बेले- होनहार बेटी नौकरी न मिलने से थी परेशान परिवार ने बताया, गुलनाज तीन भाई बहन में सबसे बड़ी थी। पिता फहीम का चार साल पहले एक्सीडेंट हुआ था, जिसके चलते वह घर पर ही रहते हैं। गुलनाज ने बड़े संघर्ष से पढ़ाई की। बीएससी, डीएलएड, सीटेट, यूपी टेट पास कर लिया। इसी उम्मीद में पढ़ाई की थी, शायद नौकरी मिल जाएगी। तीन चार साल में कई आवेदन किये। कहीं नौकरी नहीं मिली। खुद बड़ी होने के नाते गुलनाज पर परिवार की जिम्मेदारी बढ़ रही थी। जब संघर्ष करने के बाद भी हताश निराशा मिली तो गुलनाज टूट गई और खुद की जिंदगी बदतर बताकर ट्रेन के आगे कूदकर हमेशा को जिंदगी समाप्त कर ली। परिवार में पिता फहीम, मां शहनाज, बहन नरगिस और भाई शहबाज है। सुसाइड नोट में लिखा मैं दुनिया से दूर जा रही हूं जीआरपी को मृतिका गुलनाज के पास से एक सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट पर मौसा पप्पू और पिता फहीम का नाम लिखा है, दोनों के मोबाइल नंबर लिखे थे। गुलनाज ने एक पेज का सुसाइड नोट लिखा। मैं अपनी मर्जी से खुदकुशी करना चाहती हूं। जिंदगी से बहुत तंग आ चुकी हूं। आज तक मेरे साथ कुछ अच्छा नहीं हुआ। जिंदगी के जो दिन बचे हैं, उनमें भी अच्छा होने की उम्मीद करना बेकार है। मुझे यकीन हो गया है, कभी किस्मत नहीं बदलेगी। इससे भी बदतर जिंदगी होने वाली है। मेरे ऊपर किसी का कोई दवाब नहीं है। मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। किसी प्रकार की कोई जांच या कार्यवाही ना की जाये। यह सब अपनी मर्जी से कर रही हूं। तुम लोगों को लगता होगा मैंने खुदकुशी करके अच्छा नहीं किया, लेकिन जिंदगी भी कहां बची है। और अच्छी जिंदगी होगी ऐसी उम्मीद ही नहीं है। मैं टूट चुकी हूं। बाद में तुम सभी लोगों को सही लगेगा। तुम खुश रहना। मैं इस दुनिया से दूर जा रही हूं। मेरे दोनों बैंक एकाउंट में पैसे नहीं हैं। 10 हजार रुपये खजूर वाले डिब्बे में एकाउंट से निकालकर रख दिये हैं। कुछ रुपये पर्स में रखे हैं, उसमें ही सोने की नथ और बुंदे रखे हैं।

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