हज कमेटी में गैर मुस्लिम सीईओ की नियुक्ति पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन
Bareily News - महाराष्ट्र सरकार द्वारा हज कमेटी का सीईओ एक दूसरे धर्म के व्यक्ति को बनाए जाने पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने इसे इस्लाम के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया और तत्काल नियुक्ति वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि हज मुसलमानों का धार्मिक फर्ज है, जिसे समझने वाला ही बेहतर ढंग से संचालित कर सकता है।
बरेली। महाराष्ट्र सरकार द्वारा हज कमेटी का सीईओ अधिकारी दूसरे धर्म के सदस्य को बनाए जाने पर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने इस नियुक्ति को इस्लाम के धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। शनिवार को प्रेस को जारी बयान में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि हज इस्लाम का अहम फर्ज है, जो केवल सक्षम मुसलमानों पर अनिवार्य होता है। हज से जुड़ी तमाम व्यवस्थाएं पूरी तरह धार्मिक प्रकृति की हैं, जिन्हें वही व्यक्ति बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिसे इस्लाम का ज्ञान हो।
उन्होंने कहा कि हज कमेटी अल्पसंख्यक मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र संस्था है और देश के हर राज्य में हज यात्रियों की सुविधाओं के लिए हज कमेटियां गठित हैं। भारत के इतिहास में पहली बार किसी गैर मुस्लिम को हज कमेटी का सीईओ बनाया गया है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि शर्मनाक भी है। - दूसरे धर्म के लोगों को जिम्मेदारी देना गलत मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार में कई योग्य मुस्लिम अधिकारी मौजूद हैं, इसके बावजूद किसी मुसलमान को यह जिम्मेदारी न देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। जिस व्यक्ति का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है, उसे हज जैसे संवेदनशील धार्मिक कार्य की जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह नियुक्ति मुसलमानों के धार्मिक मामलों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। मुसलमान अपने धार्मिक मामलों में इस तरह का हस्तक्षेप कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।अंत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि नियुक्त किए गए दूसरे धर्म के सीईओ को तुरंत हटाकर किसी योग्य मुस्लिम अधिकारी को हज कमेटी का सीईओ बनाया जाए।
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