बरेली स्मार्ट सिटी परियोजना में करोड़ों के घोटाले का आरोप की आंच मुख्यमंत्री तक, ईडी और विजिलेंस जांच की मांग
बरेली स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम की भूमि पर निर्माण कार्यों को लेकर विवाद हुआ है। शिकायत में अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन की बर्बादी का आरोप लगाया गया है। स्ट्रीट वेंडरों के लिए बनाई गई दुकानों को ध्वस्त कर भूमि को एक निजी संस्था को लीज पर देने का भी आरोप है।

बरेली, वरिष्ठ संवाददाता। बरेली स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम की भूमि पर हुए निर्माण कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में परियोजना से जुड़े अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन की बर्बादी का आरोप लगाया गया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (विजिलेंस), आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) अथवा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता चन्द्र प्रकाश का आरोप है कि स्ट्रीट वेंडरों के लिए लगभग 1100 वर्गमीटर भूमि पर 67 टीन शेड दुकानों के निर्माण पर करीब 3.02 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। निर्माण पूरा होने और भुगतान होने के बावजूद किसी भी स्ट्रीट वेंडर को दुकान आवंटित नहीं की गई। आरोप है कि करीब 18 महीने बाद इन्हीं दुकानों को ध्वस्त कर उसी भूमि को एक निजी संस्था को 15 वर्ष की लीज पर दे दिया गया।
सरकारी धन की बर्बादी का आरोप
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर दुकानें बनाई गई थीं तो उन्हें किसके आदेश पर तोड़ा गया और इस नुकसान की भरपाई किस अधिकारी से की जाएगी। साथ ही आरोप लगाया गया है कि परियोजना के लिए नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति और बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया गया।
व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण पर भी सवाल
शिकायतकर्ता का दावा है कि अब उक्त भूमि पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है और दुकानों को प्रीमियम एवं किराये पर दिए जाने की तैयारी है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि के बाजार मूल्य की तुलना में लीज प्रक्रिया में सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में परियोजना पर तत्काल रोक लगाने, बीडीए से निर्माण की वैधता की जांच कराने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि भविष्य में परियोजना को लेकर न्यायालय या शासन स्तर से कोई कार्रवाई होती है तो वहां व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मामला सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी परियोजना और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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