सरकारी गाड़ियों से गई जान, मुआवजे को भटक रहे परिजन
Bareily News - पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों की टक्कर में मारे गए लोगों के परिजन वर्षों से मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से ग्रांट न आने के कारण भुगतान रुका है। विभिन्न मामलों में कोर्ट ने कई बार नाराजगी जताई, लेकिन पीड़ितों को धनराशि नहीं मिल पा रही है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की सरकारी गाड़ियों की टक्कर से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन वर्षों बाद भी मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की कड़ी नाराजगी के बाद भी इन लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है शासन स्तर से ग्रांट न आने के कारण भुगतान रुका हुआ है। ग्रांट आते ही मुआवजा राशि दी जाएगी।
मामले की जानकारी
प्रेमवती बनाम फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट केस में सीएमओ बरेली से 667800 रुपये वसूल करने के निर्देश दिए गए थे। वर्ष 2010 से यह केस चल रहा है। पीठासीन अधिकारी एमएसीटी ने 31 दिसंबर 2025 को आयुक्त को पत्र भेज कर डीएम के माध्यम से आरसी का अनुपालन करने के लिए निर्देशित किया था। कोर्ट ने अभी तक वसूली न होने पर कड़ी नाराजगी भी जाहिर की थी। एसडीएम सदर इस संबंध में सीएमओ कार्यालय को छह पत्र भेज चुके हैं। सीएमओ इस धनराशि को स्वीकृत करने का प्रस्ताव शासन को भेजने के लिए संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण को पत्र भेज चुके हैं। फिलहाल अभी तक प्रेमवती को धनराशि नहीं मिल पाई है।
दुर्घटना का विवरण
24 अगस्त 2009 को प्रदीप कुमार अपने पिता के साथ फतेहगंज पश्चिमी से अपने घर चनेटा को मोटरसाइकिल से जा रहे थे। डीआईजी की स्कॉर्ट गाड़ी से एक्सीडेंट होने के कारण प्रदीप की मृत्यु हो गई थी। प्रदीप की मां वीरावती ने केस दायर किया था। न्यायालय पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 2 अप्रैल 2013 को वीरवती के पक्ष में सुनवाई करते हुए एक महीने के अंदर क्षतिपूर्ति की धनराशि 2 लाख रुपए मय ब्याज और अवार्ड की धनराशि 458000 रुपये मय ब्याज वसूल करने का निर्देश दिया था। सदर तहसील ने ब्याज सहित बकाया धनराशि की वसूली के लिए डीआईजी कार्यालय को पत्र भी भेजा था।
अन्य मामलों की स्थिति
विमला देवी आदि बनाम पुलिस उप महानिरीक्षक केस में भी न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 322000 रुपये मय 7 फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज की दर से जमा करने का निर्देश दिया था। एसडीएम सदर कार्यालय से पुलिस को दर्जन भर से ज्यादा बार पत्र भेजा गया। धनराशि जमा नहीं होने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी भी जताई मगर फिर भी भुगतान नहीं हुआ।
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