बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में दिया इस्तीफा
Jan 26, 2026 06:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बरेली
Bareily News - बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है और वह इसे वापस नहीं लेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने विरोध का प्रदर्शन किया, जिससे उनके समर्थन में कई संगठन सड़कों पर उतरे।
बरेली, शंकराचार्य और उनके शिष्यों के कथित अपमान तथा यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए रेगुलेशन के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गणतंत्र दिवस के दिन दिए गए इस इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया निर्णय बताया है और साफ किया है कि वह किसी भी दबाव या समझाइश में आकर अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद दोपहर करीब दो बजे उन्होंने अपने फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। तस्वीरों में वह अपने आवास के बाहर एक पोस्टर पकड़े नजर आए, जिस पर ‘यूजीसी रोलबैक’, ‘काला कानून वापस लो’ और ‘शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारे लिखे थे। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट कुछ ही देर में वायरल हो गई। 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री एक अन्य तस्वीर में अपने कार्यालय में लगे अधिकारियों के बोर्ड पर अपने नाम के आगे ‘रिजाइन’ लिखते हुए दिखाई दिए। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजने की बात कही है। मीडिया से बातचीत में सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य और उनके बटुक शिष्यों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह अत्यंत निंदनीय है। उनका आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा जारी यूजीसी रेगुलेशन 2026 का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि यह कानून रोलेट एक्ट की तरह दमनकारी है और शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। इन्हीं कारणों से उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देने का फैसला लिया। शहर में अलंकार अग्निहोत्री अपने मुखर ब्राह्मणवादी रुख के लिए जाने जाते रहे हैं। बीते कुछ समय से वह ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे थे और इस दिशा में बरेली में कई कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया था।
सोच समझकर दिया इस्तीफा, नहीं लूंगा वापस
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे की जानकारी मिलते ही एडीएम सिटी सौरभ दुबे, अपर आयुक्त प्रीति जयसवाल, एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह, एडीएम-जे देशदीपक सिंह, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार और तहसीलदार विदित कुमार उनके आवास पर समझाने पहुंचे। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका निर्णय अंतिम है और वह इसे किसी भी हाल में वापस नहीं लेंगे। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आगे का कदम समाज के लोगों की राय के अनुसार तय किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य जिलों और राज्यों से ब्राह्मण, क्षत्रिय और सर्वण संगठनों के लोग उनके समर्थन में बरेली पहुंच रहे हैं।
मेयर बोले, यूजीसी कानून की खामियों को दूर कराएंगे
मेयर डॉ. उमेश गौतम भी सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पर पहुंचे। मीडिया से बातचीत में मेयर ने कहा कि यूजीसी कानून में खामियां हैं और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर उन खामियों को दूर कराया जाएगा।
सिटी मजिस्ट्रेट के पक्ष में उतरे कई संगठन
सिटी मजिस्ट्रेट के समर्थन में कई ब्राह्मण नेता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए। उनके आवास के बाहर ‘काला कानून वापस लो’ के नारे लगाए गए, जबकि कुछ हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
डीएम बोले, मेरे पास नहीं आया इस्तीफे का कोई औपचारिक पत्र
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इस पूरे मामले पर कहा कि उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। अभी तक उनके पास कोई औपचारिक पत्र या ई-मेल प्राप्त नहीं हुआ है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे की कार्रवाई औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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