
अब प्लास्टिक कचरा बनेगा सड़कों का हिस्सा, प्रदूषण कम, सड़क टिकाऊ
Bareily News - -नगर निगम अब प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में करेगा अब प्लास्टिक कचरा बनेगा सड़कों का हिस्सा, प्रदूषण कम, सड़क टिकाऊ
बरेली। नगर निगम ने पर्यावरण के लिए खतरनाक बन चुके प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह योजना नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत लागू की जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्लास्टिक कचरे को विशेष तकनीक की मदद से सड़क निर्माण में मिलाया जाएगा। इससे न केवल सड़कें टिकाऊ बनेंगी, बल्कि पारंपरिक डामर सड़क निर्माण की तुलना में पर्यावरण और ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी। नगर निगम ने प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत प्लास्टिक कचरा से सड़कों का निर्माण होगा।
पर्यावरण को प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए इस योजना को अधिकारी बेहद कारगर मान रहे हैं। नगर निगम ने इसकी तैयारी कर ली है। केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली एनसीएपी की धनराशि से इन सड़कों का निर्माण किया जाना है। ऐसे तैयार किया जाएगा पेस्ट पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि सबसे पहले पॉलिथीन के कैरी बैग, प्लास्टिक के कप-ग्लास, नमकीन-भुजिया के पैकेट या रैपर, चॉकलेट-लेमन चूस के रैपर और शैंपू के सैशे को बीन कर उसकी सफाई की जाएगी। फिर उसे स्नेडर मशीन से एक निश्चित आकार में ढाल लिया जाएगा। इसके बाद उसे निश्चित तापमान पर गर्म किया जाएगा। इससे तेल जैसा एक पेस्ट तैयार होगा। उसे मिक्सिंग चैंबर में भेज दिया जाएगा। यहां गटके के साथ प्लास्टिक कचरे से तैयार पेस्ट को भी मिला दिया जाता है। अभी सड़क निर्माण में जो तकनीक अपनाई जाती है उसमें डामर को 170 डिग्री तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। प्लास्टिक मिलाने के बाद डामर 110 डिग्री पर ही गर्म हो जाएगा। अभी सीमेंट-कंकरीट की रोड से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। उन पर गुजरने वाले वाहन तेज आवाज करते हैं। प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से इस समस्या के समाधान की बात कही जा रही है। बरसात से भी सड़कों को नहीं होगा नुकसान नगर निगम के एक्सईएन आरके राठी ने बताया कि प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों की ऊपरी परत चढ़ाने में किया जाएगा। इसमें कैरी बैग, प्लास्टिक के कप और गिलास, लेमिनेटेड प्लास्टिक, पान मसाला के रैपर, एल्युमिनियम के फॉयल, बिस्किट व चॉकलेट रैपर, दूध और करियाना के सामान की पैकिंग वाले प्लास्टिक से बनाए गए ग्रेन्युल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण पर खर्च में भी कमी आएगी। ऐसी सड़कों की लाइफ दोगुनी होने के साथ बरसात के बाद भी सड़कों को नुकसान नहीं होगा। प्लास्टिक कोटेड होने से पानी का असर कम होगा साथ ही प्लास्टिक कचरे से शहर को छुटकारा मिल सकेगा। ये सड़कें कम बजट में बनेंगी। इनमें पानी व गर्मी की मार झेलने की क्षमता अधिक होती है। वर्जन प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हम सड़कों के निर्माण में करेंगे। इसके लिए नगर निगम ने प्रक्रिया शुरू करदी है। जल्दी ही इस तकनीकी से सड़क निर्माण काय्र शुरू होगा। राजीव कुमार राठी, अधिशासी अभियंता नगर निगम

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