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बरेलीअजीत-संजना के जन्मों का बंधन एक झटके में गया टूट

हिन्दुस्तान टीम,बरेलीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:40 AM
अजीत-संजना के जन्मों का बंधन एक झटके में गया टूट

प्राइमरी स्कूल धनौरा में शिक्षक अजीत यादव को गुजरे 15 दिन से अधिक हो चुके हैं। अस्पताल, ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाओं की जद्दोजहद में 46 साल के अजीत दुनिया छोड़कर चले गए। पत्नी संजना और दो बच्चे सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। पत्नी ने उनका डेथ सर्टिफिकेट तक नहीं देखा है।

शिक्षक अजीत अपने परिवार साथ आवास विकास कालोनी में रहते थे। चुनावी ड्यूटी से लौटते लौटते उनकी तबियत खराब हो गई। पत्नी संजना की तबियत भी बिगड़ गई। 28 अप्रैल को उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। अजीत की ऑक्सीजन गिरती जा रही थी। उन दिनों को याद कर संजना फूट-फूट कर रोने लगती हैं। कहती हैं, विधायक से फोन करने पर निजी अस्पताल ने उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया मगर आईसीयू में बेड ना होने के कारण दो घण्टे में ही अस्पताल छोड़ना पड़ा। तमाम प्रयास के बाद भी कहीं अस्पताल में बेड नहीं मिला। 4 मई को उनके 75 फीसदी फेफड़े खराब हो चुके थे। उन्होंने बहुत लड़ाई लड़ी मगर हम उन्हें बचा ना सके।

चंडीगढ़ से तक मंगवाए इंजेक्शन

रोते-रोते संजना बताती हैं, हमने ब्लैक में ऑक्सीजन सिलेंडर लिए। चंडीगढ़ से इंजेक्शन मंगवाए। सारी मेहनत पर पानी फिर गया। सात जन्मों का बंधन एक झटके में टूट गया। अजीत का बेटा 10 वर्ष का है वही बेटी 12 साल की है। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में सारी जिम्मेदारी संजना के कंधों पर ही है। अजीत के जाने से संजना बुरी तरह से टूट चुकी हैं। जब उनसे अजीत के मृत्यु प्रमाण पत्र के विषय में पूछा तो उन्होंने कहा कि शमशान भूमि से मृत्यु प्रमाण पत्र मिला था। कांपते हाथों से उसे लेकर मैंने अलमारी में रख दिया। आज तक लिफाफा खोलने की हिम्मत नहीं पड़ी है।

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