बरेली बवाल में मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर के करीबी के भाई का सरेंडर, हथियार सप्लाई का आरोप
बरेली बवाल में हथियार सप्लाई करने वाले गैंग का सरगना और तौकीर रजा के करीबी फरहत अली का भाई इशरत अली पुलिस को चकमा देकर जेल चला गया। पुलिस अब उसे रिमांड पर लेकर बवाल की साजिश और हथियारों की फंडिंग के बारे में पूछताछ करेगी।

Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुए हिंसक बवाल और पुलिस पर फायरिंग के मामले में जांच कर रही टीमों के दबाव का बड़ा असर दिखा है। बवाल के दौरान दंगाइयों को अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना और हिस्ट्रीशीटर इशरत अली ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। इशरत अली का कनेक्शन सीधे तौर पर इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा के करीबियों से जुड़ रहा है, जिससे इस पूरे बवाल के पीछे एक सुनियोजित साजिश की बू आ रही है।
तौकीर रजा के करीबी से कनेक्शन
पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि हिस्ट्रीशीटर इशरत अली, मौलाना तौकीर रजा के बेहद खास माने जाने वाले फरहत अली का सगा भाई है। फरहत अली वही व्यक्ति है जिसने बवाल के बाद मौलाना को अपने घर 'फाइक इंक्लेव' में शरण दी थी और वह मौलाना के साथ जेल भी जा चुका है।
बहेड़ी पुलिस ने हाल ही में असलाह सप्लायर तस्लीम और सोमू खान उर्फ औशाफ को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से भारी मात्रा में विदेशी पिस्टल और कारतूस बरामद हुए थे। इन आरोपियों ने कबूल किया कि उनके गैंग का असली आका इशरत अली है। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इशरत ने ही 26 सितंबर 2025 को हुए बरेली बवाल के लिए हथियारों की बड़ी खेप भेजी थी, जिसकी डिलीवरी झुमका चौराहे के पास दी गई थी।
पुलिस को चकमा देकर जेल पहुंचा आरोपी
इशरत अली के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और गोकशी समेत कुल नौ गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस बवाल में हथियारों की सप्लाई का ठोस सबूत मिलने के बाद उस पर भारी इनाम घोषित करने की तैयारी कर रही थी। लेकिन शातिर अपराधी इशरत ने पुलिस की घेराबंदी को भांपते हुए हाफिजगंज के एक पुराने मुकदमे में अपनी जमानत तुड़वा ली और चुपचाप कोर्ट पहुँचकर जेल चला गया। इस पैंतरे से उसने न केवल एनकाउंटर के डर को टाला, बल्कि पुलिस की तत्काल गिरफ्तारी से भी बच गया।
रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ
सीओ बहेड़ी, अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इशरत अली की गिरफ्तारी हथियार सप्लाई के मामले में बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस अब उसे कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी। रिमांड के दौरान उससे यह उगलवाया जाएगा कि बवाल के लिए हथियार खरीदने की फंडिंग किसने की थी और बरेली में किन-किन लोगों को ये अवैध हथियार बांटे गए थे। पुलिस को अंदेशा है कि उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर (किच्छा) के कुछ सफेदपोश लोग भी इस अवैध हथियारों के सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


