नहीं रहीं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई
Barabanki News - बाराबंकी की वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई का दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया। उनका जन्म 1932 में हुआ था और उन्होंने कांग्रेस में अपना राजनैतिक जीवन शुरू किया। वे दो बार राज्यसभा सदस्य रहीं और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर है।
बाराबंकी। कांग्रेस से ही अपना राजनैतिक जीवन शुरू करने वाली वरिष्ठ कांग्रेसी महिला नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई ने अंतिम सांस भी कांग्रेस में रहते हुए लीं। उनका बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह बाराबंकी जिले के बड़ागांव की रहने वाली थीं, उनका मायका और ननिहाल भी यहीं का था। वह 93 साल की थीं। उनके निधन की सूचना मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बाराबंकी जिले के अहमदपुर गांव में एक जनवरी 1932 को जन्मी मोहसिना किदवई का मसौली ब्लॉक के बड़ागांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे खलीलउर्रहमान किदवई से विवाह 1952 में हुआ था।
बड़ागांव की बहू बनने और उनके ससुर स्व. जमीलउर्रहमान के कांग्रेसी नेता होने के चलते वह भी राजनीति में सक्रिय हो गई। जिले के वरिष्ठ पत्रकार हसमतउल्ला बताते हैं कि बड़ागांव के किदवई परिवार का देश की आजादी में बड़ा योगदान होने के नाते गांधी परिवार से गहरा लगाव रहा। 1968 में तत्कालीन राज्यपाल द्वारा मोहसिना किदवई को विधान परिषद का नामित सदस्य घोषित किया गया। वहीं से मोहसिना किदवई ने कांग्रेस से ही राजनैतिक जीवन शुरू किया। उसके बाद 1972 में कांग्रेस से प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी हेमवती नंदन बहुगुणा ने उन्हें हरिजन एवं समाज कल्याण विभाग का राज्यमंत्री बनाया। यह कार्यकाल उनका सिर्फ दो साल का ही रहा। उसके बाद 1972 में विधानसभा का चुनाव हुआ और मोहसिना किदवई को मसौली विधानसभा (वर्तमान में जैदपुर विधान सभा है) से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया गया और वह भारी बहुमत से जीतीं। उसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद दिया गया। इसके साथ ही मोहसिना किदवई को पार्टी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। वर्ष 1977 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने राम नरेश यादव जो कि आजमगढ से लोकसभा सदस्य थे, उनकी सीट खाली हुए तो उपचुनाव में मोहसिना किदवई को उस सीट से प्रत्याशी बनाया गया। आजमगढ़ से चुनाव जीत कर वह पहली बार लोकसभा पहुंची। कांग्रेस में उनकी लोकप्रियता और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा ऐसी थी कि गांधी परिवार में उनको खास दर्जा मिलने लगा। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी तो पार्टी ने उन्हें मेरठ से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था। इस सीट से भी वह भारी बहुमत से जीती और इंदिरा गांधी ने उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया। शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी। उनकी नीति और नियत दोनो ही देश व पार्टी के लिए बेहतर देख इंदिरा गांधी ने उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस की महासचिव बना दिया। महासचिव होने के नाते वह कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा व पंजाब की चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभाई। 1997 से वह दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहीं।राजीव गांधी की सरकार में भी रहीं कैबिनेट मंत्री: बताया जाता है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब 1984 में राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके मंत्रिमण्डल में मोहसिना किदवई दोबारा केंद्र में शहरी आवास व अल्पसंख्यक विभाग की केंद्रीय मंत्री रहीं। राजनीति में बतौर कांग्रेस की महिला नेता के रूप में उनका सबसे लंबा कार्यकाल रहा।प्रदेश में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनाने की थी इच्छाकस्बा बड़ागांव निवासी प्रधान प्रतिनिधि नूर मोहम्मद बताते हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जब अपने निवास पर रहती थी तब क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का नोट कर उन कार्यों को प्राथमिकता के तौर पर तत्काल निस्तारण करवाती थी। उन्होंने कहा कि करीब दो साल पहले मोहसिना किदवई बड़ागांव अपनी सुसराल आई थी। उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा था कि हमारे जिंदा रहते ही प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बने यह उनकी प्रबल इच्छा है। उनके परिवार के सदस्य महमूद किदवई ने बताया कि मोहसिना किदवई के निधन की खबर मिलते ही कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी और सशक्त महिला नेता खो दिया है। कांगे्रस के पूर्व सांसद पीएल पुनिया, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन आदि कांग्रेसजनों ने शोक व्यक्त किया है।
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