भाव से मिले आमंत्रण पर कुनबे के साथ भंडारे में पहुंचे बंदर
Barabanki News - अयोध्या के सुमेरगंज कस्बे में शनिवार को भक्तों ने बंदरों के लिए विशेष मालपुआ भंडारे का आयोजन किया। पिछले 28 वर्षों से चल रही इस परंपरा में बंदरों को निमंत्रण देकर गरमागरम मालपुए परोसे गए, जिससे सभी श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस आयोजन में डॉ. आशुतोष गुप्ता की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

रामसनेहीघाट, संवाददाता। अयोध्या - बाराबंकी की सीमा पर स्थित सुमेरगंज कस्बे में शनिवार की सुबह भाव और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भक्तों ने भाव से बुलाया तो दोनों जिले के बार्डर के जंगलों से उछलते- कूदते बंदरों का दल कुनबे के साथ तड़के पहुंचकर भंडारे में शामिल हो गए। कुनबे के साथ बंदरों को चाव से मालपुआ खाते देख लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अवसर था बालाजी पूजा समिति के तत्वावधान में बंदरों के लिए विशेष मालपुआ भंडारे के आयोजन का। सुमेरगंज कस्बे की शनिवार की भोर इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन की साक्षी नहीं बनी, बल्कि उसने इंसान और जीवों के बीच करुणा, दया और भक्ति का ऐसा दृश्य देखा, जिसने हर किसी का हृदय भावविभोर कर दिया।
बंदरों के लिए भंडारे का आयोजन
बालाजी पूजा समिति द्वारा पिछले 28 वर्षों से निभाई जा रही अनूठी परंपरा के तहत बंदरों के लिए विशेष मालपुआ भंडारे का आयोजन किया गया। शुक्रवार को समिति के सदस्यों ने पूरे कस्बे और आसपास की बागों में जाकर बंदरों को अभिमंत्रित चने वितरित कर निमंत्रण दिया था। लोगों का मानना है कि यह केवल निमंत्रण नहीं, बल्कि जीवों के प्रति प्रेम और सेवा का संदेश है।
बंदरों का आगमन
शनिवार तड़के करीब तीन बजे से ही बंदरों के आने का सिलसिला शुरू हो गया जो कि सुबह 7 बजे तक चलता रहा। देसी घी से बने गरमागरम मालपुए बड़े प्रेम और श्रद्धा से बंदरों को परोसे गए। कोई बंदर चार मालपुए लेकर पेड़ों पर जा बैठा तो कोई दर्जनों मालपुए समेटकर अपने साथियों के बीच बांटता नजर आया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और आनंद से भर उठीं। छोटे-छोटे बच्चे भी हाथ जोड़कर बंदरों को प्रसाद ग्रहण करते देख जय बजरंगबली के जयकारे लगा रहे थे।
परंपरा का महत्व
बता दें कि करीब 28 वर्ष पूर्व स्वर्गीय भगवान दुबे द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धाभाव से जीवित है। कस्बे के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. आशुतोष गुप्ता अपनी टीम के साथ इस आयोजन को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि जीवों की सेवा ही सच्ची भक्ति है और बजरंगबली की कृपा तभी प्राप्त होती है जब मन में दया और करुणा का भाव हो।
भंडारे के बाद का आयोजन
भंडारे के बाद सुबह सुंदरकांड पाठ और हवन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल मालपुआ भंडारा शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन में मुख्य रूप से सुरेंद्र कौशल, चंदन कौशल सहित कस्बे के तमाम लोगों ने सहभागिता निभाई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


