Hindi NewsUttar-pradesh NewsBarabanki NewsRising Road Accidents in Barabanki Urgent Need for Helmet Use and Traffic Rule Awareness
बोले बाराबंकी:सड़क सुरक्षा में लापरवाही जान पर सबसे बड़ा खतरा

बोले बाराबंकी:सड़क सुरक्षा में लापरवाही जान पर सबसे बड़ा खतरा

संक्षेप:

Barabanki News - बाराबंकी में सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है, जहाँ तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना और ओवरलोडिंग मुख्य कारण हैं। दुर्घटनाओं में ज्यादातर दोपहिया वाहन चालक शामिल हैं। लोगों का मानना है कि प्रशासन को सख्ती से...

Sep 09, 2025 05:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बाराबंकी
share Share
Follow Us on

जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर की जा रही लापरवाहियों का खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। आए दिन सड़क हादसों की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई परिवार तबाह हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क हादसों के पीछे मुख्य कारण तेज रफ्तार, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चलाना, ओवरलोडिंग, गलत दिशा में गाड़ी चलाना और शराब पीकर ड्राइविंग करना है। इसके अलावा जगह-जगह टूटे हुए सड़क मार्ग, अतिक्रमण और पर्याप्त सिग्नल लाइट व संकेतक न होने से भी दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। पेश है बोले टीम की एक रिपोर्ट... बाराबंकी।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट न पहनना बन गया है। आए दिन दुर्घटनाओं में अधिकतर घायल और मृतक वे होते हैं, जिन्होंने सिर पर सुरक्षा कवच यानी हेलमेट नहीं लगाया होता। सड़क हादसों में मरने वालों में अधिकांश दोपहिया वाहन चालक या सवार होते हैं। यदि समय पर हेलमेट का उपयोग किया जाए तो इन हादसों में बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। ग्रामीण इलाकों और कस्बों में लोग हेलमेट को बोझ समझकर इस्तेमाल नहीं करते। वहीं शहर में युवा वर्ग फैशन और दिखावे की वजह से बिना हेलमेट बाइक चलाना पसंद करते हैं। नियम तोड़ने पर चालान से बचने के लिए लोग हेलमेट साथ रखते हैं, लेकिन पहनते नहीं। सड़क हादसों में सिर पर चोट लगना सबसे गंभीर स्थिति होती है। हेलमेट लगाने से ऐसी गंभीर चोटों से काफी हद तक बचाव संभव है। लोगों का कहना है कि पुलिस की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन सख्ती की कमी के कारण लोग दोबारा लापरवाही बरतने लगते हैं। जबकि लोगों का कहना है कि हेलमेट न लगाने वालों पर चालान के साथ कड़ी सजा दी जाए। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता पर जागरूक किया जाए। सस्ते और अच्छे गुणवत्ता वाले हेलमेट आसानी से उपलब्ध कराए जाएं। हाईवे पर बाइक पर तीन सवारियों की लापरवाही, जरा सी चूक बन रही जानलेवा: हाईवे पर तेज रफ्तार के बीच दोपहिया वाहनों पर तीन लोग बैठकर यात्रा करना आम नजारा बन गया है। यह नियम विरुद्ध और बेहद खतरनाक है, लेकिन लापरवाह लोग इसे मजाक समझकर अनदेखा करते हैं। नतीजा यह है कि जरा सी चूक बड़े हादसे का कारण बन जाती है। पिछले कुछ दिनों में जिले के हाईवे पर हुए कई सड़क हादसों की वजह यही रही है कि बाइक पर तीन सवारियां थीं। संतुलन बिगड़ने पर वाहन फिसल जाता है और पीछे बैठा व्यक्ति सड़क पर जा गिरता है। तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक या कार की चपेट में आने से कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। लोगों की माने तो दोपहिया वाहन को केवल दो लोगों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है। तीसरी सवारी बैठाने से वाहन का बैलेंस बिगड़ जाता है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों और कस्बों में लोग तीन-तीन लोग बैठकर आराम से यात्रा करते दिखाई देते हैं। लोगों ने बताया कि इस तरह के हादसों में सबसे ज्यादा चोट सिर और रीढ़ की हड्डी पर आती है। अगर हेलमेट न हो तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। हेलमेट और ट्रैफिक नियमों का पालन अनिवार्य कराया जाए। यदि प्रशासन सख्ती से नियमों का पालन कराए और लोग खुद अपनी जिम्मेदारी समझें, तो हाईवे पर हो रहे इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। बाइक पर बैठकर रील बनाने की होड़, रोजाना हो रहे हादसे:सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज ने युवाओं को एक नए खतरे की ओर धकेल दिया है। जिले में आए दिन ऐसे हादसों की खबरें आ रही हैं, जिनमें बाइक पर बैठकर रील बनाने वाले युवक-युवतियां शिकार हो रहे हैं। तेज रफ्तार, स्टंट और कैमरे में खुद को दिखाने की लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। पिछले कुछ महीनों में सड़क हादसों की संख्या में तेजी आई है। इनमें अधिकतर मामले रील और वीडियो शूटिंग करते समय बाइक चलाने या उस पर स्टंट करने के दौरान हुए हैं। कई बार तो पीछे बैठे साथी हाथ में मोबाइल पकड़े रहते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ने पर दोनों सड़क पर जा गिरते हैं। सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की होड़ युवाओं को जान की बाज़ी लगाने पर मजबूर कर रही है। जहां उन्हें अपने परिवार और भविष्य की चिंता करनी चाहिए, वहीं वे सड़क पर मौत से खेलते हुए वीडियो बनाने में मशगूल रहते हैं। इस दौरान होने वाले हादसों में गंभीर चोटें आती हैं, जिनमें सिर, रीढ़ और पैरों की हड्डियां सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। कई मामलों में युवाओं को जिंदगी भर के लिए अपंग होना पड़ता है। प्रशासन को ऐसे स्टंट और रील बनाने पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। बाइक पर बैठकर रील बनाने का चलन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। हादसों के शिकार अधिकतर 18 से 25 वर्ष के युवक-युवतियां हो रहे है। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार ही मुख्य वजह बनी हुई हैं। अगर हेलमेट और नियम पालन हो तो कई जिंदगियां से बच सकती हैं। सड़क हादसों से बचाव के लिए यातायात पुलिस चलाती है जागरूकता अभियान:जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए यातायात पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए अक्सर अभियान भी चलाती है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना और सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है। अभियान के दौरान पुलिसकर्मी चौराहों, स्कूलों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में लोगों को रोककर उन्हें हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा और यातायात संकेतों के महत्व के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यातायात विभाग ने बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया है। छात्रों को पोस्टर, पंपलेट और नारेबाजी के माध्यम से बताया जा रहा है कि सड़क पर लापरवाही करना खुद की जान के साथ-साथ दूसरों के लिए भी खतरा बन सकता है। जेब्रा लाइन व ट्रैफिक सिग्नल का पालन न करने से बढ़ रहे हादसे: शहर की सड़कों पर लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं। जेब्रा लाइन पर वाहन रोकने के बजाय लोग सीधे आगे बढ़ जाते हैं, जिससे पैदल यात्रियों को सड़क पार करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, रेड सिग्नल तोड़कर निकलने वाले वाहन चालक आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, सिग्नल तोड़ने और जेब्रा लाइन का पालन न करने की वजह से पिछले एक महीने में आधा दर्जन से अधिक सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सड़क पर अनुशासन ही दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है। अगर चालक जेब्रा लाइन और सिग्नल का पालन करें तो हादसों में भारी कमी आ सकती है। ट्रैफिक पुलिस लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही है और चालान भी काटे जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही का आलम बरकरार है। लोगों से अपील है कि सड़क पर चलते समय नियमों का पालन करें, जेब्रा लाइन पर वाहन रोकें और ट्रैफिक सिग्नल का सम्मान करें। यह छोटी-सी सावधानी किसी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है। बोले लोग-: लोग ज्यादातर लाल बत्ती की अनदेखी करते हैं। अगर सख्ती से चालान लगाए जाएं तो नियमों का पालन बढ़ सकता है। -आदित्य पांडे पैदल यात्रियों के लिए जेब्रा लाइन पर वाहन रोकना जरूरी है। इससे हम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। -विक्रम अंशुमान कई बार स्पीड ब्रेकर न होने की वजह से तेज रफ्तार में हादसे होते हैं। प्रशासन को इसे जल्द सुधारना चाहिए। -सुनीत अवस्थी स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं। इससे हम और हमारे साथी सुरक्षित रह सकते हैं। -चंद्रिका कश्यप मोबाइल पर रील बनाना और ध्यान भटकाना हादसों का बड़ा कारण है। सभी को इसे छोड़ना चाहिए। -हिमांशु दीक्षित गांव और कस्बों में गति संकेतक नहीं हैं। इन्हें लगाना बहुत जरूरी है। इससे लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। -रजनीश सिग्नल की अनदेखी और तेज रफ्तार से रोजाना हादसे होते हैं। लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए। -सुरेश चन्द्र सड़क नियमों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। स्कूलों में इसे सिखाया भी जाता है। और लोग जागरूक होते हैं। -मेराज बोले जिम्मेदार: बाराबंकी के यातयात प्रभारी राम यतन यादव का कहना है कि हर चौराहे पर घूम घूमकर लोगों को हेलमेट लगाने के लिए कहा जाता है। लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जाता हैं, जो नियमों का पालन नहीं करता है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। बाइक पर तीन सवारीं बिठाने पर चालान किया जाता है।