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बोले बाराबंकी: रास्ता रोक रहे सड़कों पर छुट्टा मवेशी

बोले बाराबंकी: रास्ता रोक रहे सड़कों पर छुट्टा मवेशी

संक्षेप: Barabanki News - शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और छुट्टा मवेशियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। लोग सड़कों पर चलने में असहज महसूस कर रहे हैं और कई बार कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। छुट्टा मवेशियों के...

Thu, 11 Sep 2025 05:14 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बाराबंकी
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शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों व छुट्टा मवेशियों का आतंक दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। खासकर सुबह-शाम के समय लोग चलने-फिरने में असहज महसूस कर रहे हैं। आवारा कुत्ते न केवल राहगीरों पर हमला कर रहे हैं, बल्कि कई जगह छोटे बच्चों व बुजुर्गों को काटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वहीं, छुट्टा मवेशी सड़कों पर खुला घूमते हुए वाहन चालकों के लिए खतरा बन गए हैं। इतना ही नहीं घरों में घुसकर उत्पात मचाने वाले बंदर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इन जानवरों से न सिर्फ आमजन की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि किसानों की मेहनत से उगी फसलें भी बर्बाद हो रही हैं।

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हालात यह हैं कि अब लोग सड़क पर निकलने से पहले कई बार इधर-उधर देखने को मजबूर हैं। हाल ही में बहराइच और सीतापुर में सांड़ के हमले से कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गोंडा में तो एक सांड़ शोरूम की छत पर पहुंच गया, जबकि बहराइच में एक डॉक्टर के कमरे में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। इसी तरह बाराबंकी जिले के विभिन्न तहसील क्षेत्रों में आवारा कुत्तों ने कई लोगों को काटकर घायल किया है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। बोले बाराबंकी: रास्ता रोक रहे सड़कों पर छुट्टा मवेशी बाराबंकी। शहर से लेकर तहसील व कस्बों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। लोग घर से निकलते हैं तो सड़कों पर दौड़ा-दौड़ी कर काटने की घटनाएं रोजाना घटित हो रही हैं। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों ने शिकायत भी की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि हर दिन सुबह या शाम को सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार तो कुत्तों ने हमला कर दिया, जिससे लोग घायल हो चुके हैं। बच्चों को भी अकेले बाहर नहीं जाने दे पा रहे। अन्य ग्रामीणों ने कहा कि आवारा कुत्ते सड़क पर ऐसे घूमते हैं जैसे उनका ही अधिकार हो। किसी का ध्यान नहीं है कि ये कुत्ते लोगों के लिए कितना खतरनाक बन चुके हैं। कई बार प्रशासन की टीम ने आश्वासन दिया, लेकिन जमीन पर बदलाव नहीं दिख रहा। लोगों का कहना है कि हर दिन डर के साए में जीना पड़ रहा है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग तो घर से बाहर निकलने में डरते हैं। फिलहाल, लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं ताकि रोजमर्रा की जिन्दगी भयमुक्त बन सके। मार्ग पर छुट्टा मवेशी वाहनों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं: बाराबंकी से फतेहपुर, जैदपुर, देवा, रामनगर, मसौली, हैदरगढ़, सुबेहा सहित कई इलाकों में मुख्य बाजार, मोहल्लों और गांवों की गलियों में खुलेआम घूम रहे आवारा मवेशियों को लेकर संबंधित विभाग की लापरवाही साफ नजर आ रही है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के चलते इन मवेशियों को पकड़ने का अभियान महज दिखावे तक सीमित रह गया है। नतीजतन, आए दिन सड़क हादसों, बाजारों में उपद्रव और खेतों में फसल नुकसान के मामले बढ़ते जा रहे हैं। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर देहात की पगडंडियों तक, गाय-बैल और भैंसों के झुंड बेधड़क घूमते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक आने से जानमाल का खतरा बढ़ जाता है। व्यापारी और दुकानदार भी परेशान हैं, क्योंकि मवेशी दुकान के बाहर रखा सामान खा जाते हैं और कई बार झगड़ालू स्वभाव के बैल चोट पहुंचा देते हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। किसानों की तैयार फसलें रातों रात चौपट हो जाती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। लोगों का कहना है कि विभाग की टीम सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में घुसकर फसल भी नष्ट हो रही है। लोग डरे-सहमे घरों से बाहर निकल रहे हैं, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में भी छुट्टा मवेशी के आतंक से परेशान हैं लोग बंकी ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में हर शाम के समय अव्यवस्था का आलम बन जाता है। छुट्टा मवेशी झुंड बनाकर सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वाहन चालक परेशान हो रहे हैं, पैदल चलने वाले राहगीर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा है। ग्राम पंचायत जराहरा में जैदपुर बाराबंकी जाने वाले मार्ग पर शाम होते ही मवेशियों का सैलाब सड़क पर उतर आता है। ना तो कोई प्रशासनिक टीम समय पर पहुंचती है, ना ही मवेशी पालकों की जिम्मेदारी नजर आती है। इससे सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। रास्तों पर मवेशियों के कारण अक्सर छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी साइकिल मवेशी से टकराकर गिर गई थी, जिससे उसे चोटें भी आईं। ग्राम पंचायत में तैनात सचिव व जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही के कारण गंाव में छुटटा मवेशियों के आतंक से लोग काफी भयभीत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशु नियंत्रण टीम को सक्रिय कर मवेशियों को आवारा घूमने से रोका जाएगा। साथ ही, पशु पालकों को जिम्मेदारी से पशु पालन करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि ठोस कार्रवाई की जाए ताकि शाम के समय सड़कें फिर से सुरक्षित बन सकें और लोगों की परेशानी दूर हो। जैदपुर कस्बे में कुत्तों के आतंक से नहीं मिल पा रहा छुटकारा कस्बा जैदपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र मचौची, बरेहठा, बलछत, अबहीपुर, अतरौली, टेरा, कोला, बंगलाबाजार, बरैइया चौराहा में आवारा कुत्तों व छुट्टा मवेशियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण लगातार छुट्टा मवेशियों से त्रस्त हैं। उनका कहना है कि बिना किसी रोक-थाम के मवेशी सड़क, गलियां और खेतों में खुलेआम घूम रहे हैं। इससे दुर्घटनाएं, फसल क्षति और लोगों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हमने कई बार अधिकारियों से मांग की कि ब्लॉक में विशेष टीम बनाई जाए जो छुट्टा मवेशियों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजे। लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब हमारी सब्र की सीमा समाप्त हो चुकी है। महिला ग्रामीण ने कहा कि शाम होते ही मवेशी सड़क पर आ जाते हंै। छोटे बच्चे और बुजुर्ग बाहर निकलने से डरते हैं। हम चाहते हैं कि अभियान चलाकर इन मवेशियों को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए। ग्रामीणों ने ब्लॉक प्रशासन से अपील की है कि एक विशेष टीम गठित की जाए, जिसमें पशु चिकित्सा विभाग, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हों। मवेशी कर रहे फसलों को चौपट, किसानों में नाराजगी जिले की ब्लॉकों की विभिन्न पंचायतों में छुट्टा मवेशियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक के सचिव की लापरवाही के कारण समस्या और गंभीर हो गई है। शाम होते ही मवेशियों के झुंड सड़क और गलियों में घूमते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वहीं खेतों में घुसकर ये फसलें भी चौपट कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सचिव अगर समय रहते कार्यवाही करते तो यह समस्या इतनी नहीं बढ़ती। छुट्टा मवेशी अब बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी खतरा बन गए हैं। एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा हम रोज फसल की रखवाली में रातें जागकर काटते हैं। मवेशियों से परेशान होकर किसान खेती छोड़ने की सोचने लगे हैं। सचिव और प्रशासन को इस पर तुरंत कदम उठाना चाहिए। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद सचिव स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। न तो पशुओं को गौशाला में पहुंचाने का प्रयास हो रहा है और न ही इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत सचिव की जिम्मेदारी तय की जाए और तत्काल प्रभाव से मवेशियों के आतंक से राहत दिलाई जाए। छुट्टा मवेशी पकड़वाने की जिम्मेदारी सफाई कर्मचारियों पर ब्लाक हो चाहे नगर पंचायत क्षेत्रों में बढ़ते छुट्टा मवेशियों के आतंक से निपटने के लिए एक अजीबोगरीब व्यवस्था अपनाई जा रही है। प्रशासन की ओर से मवेशियों को पकड़ने की जिम्मेदारी सफाई कर्मचारियों पर थोप दी गई है, जिससे सफाई कर्मचारियों में मन ही मन में काफी आक्रोश व्याप्त है। एक सफाईकर्मी ने बताया कि हमारा काम तो सफाई करना है, मवेशी पकड़ना नहीं। फिर भी हमें मजबूरी में यह कार्य करना पड़ता है। यह हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती। अगर मवेशी द्वारा किसी को चोट पहुंची या हम खुद घायल हो गए तो कौन जिम्मेदार होगा, एक अन्य सफाईकर्मी ने कहा, बार-बार हम प्रशासन से उचित व्यवस्था की मांग कर चुके हैं। हमें प्रशिक्षित कर्मी नहीं दिए जा रहे और न ही विशेष उपकरण। फिर भी हम मजबूरी में इन मवेशियों को पकड़ते हैं। इससे हमारी जान जोखिम में आ जाती है। स्थानीय नागरिक भी इस व्यवस्था पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना है कि मवेशी मालिकों को जिम्मेदार ठहराना चाहिए, न कि सफाईकर्मियों को। सफाईकर्मी प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें अनावश्यक खतरे में न डाला जाए। जनता भी चाहती है कि मवेशी मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और अव्यवस्था का स्थायी समाधान निकाला जाए। इनकी भी सूनिए स्कूल के पास आवारा कुत्तों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। बच्चों को हर समय डर लगता है। - अर्जुन सड़क पर मवेशियों के झुण्ड से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त कदम उठाने चाहिए। -ननकू खेत में रोजाना मवेशी घुस आते हैं और फसल बर्बाद कर देते हैं। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द कार्रवाई करें। -रामराज गांव में सफाई की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए ताकि कचरा इधर-उधर न फेंका जाए। कचरे से आवारा कुत्ते ज्यादा आकर्षित होते हैं। -अंशू आवारा कुत्तों के काटने से रैबीज फैलने का खतरा रहता है। इसलिए उनका टीकाकरण और नियंत्रण बहुत जरूरी है। -सुमित कुमार मवेशियों के मालिक अपनी जिम्मेदारी समझें और उन्हें खुले में न छोड़ें। प्रशासन को नियम बनाकर पालन करवाना चाहिए। -सुजीत कश्यप हमने पंचायत स्तर पर एक समिति बनाई है जो समय-समय पर मवेशी व आवारा कुत्तों की निगरानी करेगी। -अली आवारा मवेशी किसानों की मेहनत को बर्बाद कर देते हैं। इसके गांव में अभियान चलाकर मवेशियों को पकड़कर आश्रय स्थल भेजना चाहिए। - प्रदीप कुमार आवारा कुत्तों को पकड़े के लिए कभी अभियान नहीं चलता। इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए भी अभियान नहीं चल रहे हैं। - नाथराम सड़क पर मवेशियों के कारण व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इसके लिए विशेष व्यवस्था करें। - अजीज मुझे डर रहता है कि कोई बच्चा आवारा कुत्तों के हमले का शिकार न हो जाए। गांव में कुत्तों के लिए सेल्टर हाउस का तैयार कराना चाहिए। - चंदन मिश्रा सरकार को कड़े कानून बनाकर पालन कराना चाहिए, ताकि मवेशी व कुत्तों के मालिकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो और समाज सुरक्षित बन सके। - संतोष कुमार बोले जिम्मेदार जिले में सभी ब्लॉक, नगर पंचायत व तहसील स्तर पर छुट्टा मवेशियों को पकड़ने के लिए टीमें गठित हैं। 122 गोआश्रय स्थलों पर 32 हजार गोवंश हैं। जहां पर ज्यादा छुट्टा मवेशियों के होने की सूचना मिली थी, वहां टीमों को भेज उन्हें पकड़ाया गया था, निरंतर अभियान चल रहा है। -डॉ. अतुल कुमार अवस्थी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बाराबंकी।