
बोले अम्बेडकरनगर: जांच के नाम पर लूट से निकल रही आह, जिम्मेदार बेपरवाह
Barabanki News - अम्बेडकरनगर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध पैथालॉजी सेंटर और अस्पताल संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता है। बड़ी संख्या में ऐसे सेंटरों पर छापे मारे गए हैं, लेकिन संचालक अक्सर भाग निकलते हैं। सरकारी अस्पतालों की लापरवाही का लाभ ये अवैध संस्थान उठाते हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से पैथालॉजी सेंटर व अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन पर कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। समय समय पर ऐसे सेंटर व अस्पताल पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन बड़े सेंटर व अस्पतालों पर कार्रवाई करने से जिम्मेदार कतराते हैं। इतना ही नहीं, अक्सर ऐसा भी होता है कि जब टीम ऐसे किसी सेंटर व अस्पताल पर पहुंचती है, तो संचालक पहले ही शटर गिराकर वहां से नदारद हो जाते हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप भी लगता रहता है। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों की मनमानी का भी पूरा लाभ अवैध रूप से संचालित अस्पताल उठाते हैं।
और तो और अक्सर सरकारी अस्पतालों में विभिन्न प्रकार की जांच किट नदारद रहती है। इससे मजबूर होकर मरीजों को निजी सेंटर का रुख करना पड़ता है। जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी तक निजी सेंटर व अस्पताल के कर्मचारी मंडराते रहते हैं। बोले अम्बेडकरनगर: जांच के नाम पर लूट से निकल रही आह, जिम्मेदार बेपरवाह जिले में 146 पंजीकृत निजी अस्पताल व नर्सिंग होम जबकि 43 डॉयग्नोस्टिक सेंटर संचालित हैं। इसके अलावा तमाम पैथॉलोजी सेंटर व अस्पताल अवैध रूप से संचालित हैं। ऐसे अवैध सेंटर व अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की टीम द्वारा अभियान चलाया जाता है। पिछले छह माह में चले ऐसे अभियान में लगभग 36 पैथॉलोजी सेंटर, जबकि लगभग 24 अस्पताल पर कार्रवाई की गई। कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें कागजात दुरुस्त करने के लिए नोटिस जारी की गई। बीते दिनों ही नगर में संचालित एक डॉयग्नोस्टिक सेंटर जांच में अवैध पाया गया था। उस समय उसे सील कर दिया गया था। हालांकि बाद में सभी कागजात दुरुस्त होने पर उसका संचालन फिर से प्रारंभ कर दिया गया। इसी प्रकार मालीपुर रोड स्थित एक बड़े अस्पताल को भी नोटिस जारी की गई थी। बसखारी में एक पैथॉलोजी सेंटर पर जब छापा मारा गया था, तो वहां अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड मशीन बरामद हुई थी। यह अलग बात है कि अवैध रूप से संचालित संबंधित सेंटर का संचालक वहां से भाग निकलने में सफल रहा था। टीम ने सेंटर को सील कर दिया था, जबकि मशीन को कब्जे में ले लिया था। इसी प्रकार जलालपुर, जहांगीरगंज, टांडा, इब्राहिमपुर, भीटी समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी संचालित अवैध पैथॉलोजी सेंटर व अस्पताल पर कार्रवाई की गई। अपर सीएमओ डॉ रामानंद सिद्धार्थ कहते हैं कि समय समय पर अभियान चलाया जाता है। जांच में यदि कोई गड़बड़ी मिलती है, तो कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। यदि कहीं से कोई शिकयत मिलती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाता है। सरकारी अस्पतालों में मंडराते रहते हैं एजेंट सीएचसी की बात दूर, जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में पैथालॉजी सेंटर व अस्पताल से जुड़े लोग मंडराते रहते हैं। वे दूरदराज से आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को मीठी बातों में फंसाकर अपने सेंटर व अस्पताल ले जाते हैं। इसके बाद जांच व इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम ली जाती है। विभिन्न पैथालॉजी सेंटर व अस्पताल के कर्मचारी जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के साथ ही सीएचसी परिसर में सुबह से ही पहुंच जाते हैं। जैसे ही कोई मरीज ग्रामीण क्षेत्र से इलाज के लिए पहुंचते हैं, तो वे उन्हें बेहतर जांच व इलाज का हवाला देकर अपनी बातों में उलझा लेते हैं। तरह तरह की सहूलियत मिलने की लालच में आकर अक्सर मरीज व उनके तीमारदार बहकावे में आ जाते हैं। जब वे संबंधित सेंटर व अस्पताल पहुंचते हैं, तो उनसे जांच व इलाज के नाम पर मोटी रकम ले लेते हैं। विरोध किया जाता है, तो तरह तरह से धमकाया जाता है। लगभग एक वर्ष पहले जिला अस्पताल में ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया गया था, लेकिन कुछ ही दिन बाद अभियान रुक गया। नतीजा यह है कि ऐसे दलाल अभी भी अस्पतालों में घूमते रहते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा कहते हैं कि जिम्मेदारों को चाहिए कि वे ऐसे सेंटर व अस्पताल से जुड़े लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। मरीजों व उनके तीमारदारों को भी चाहिए कि वे ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं। खुद भी जागरूक हों और दूसरों को भी जागरूक करें। सरकारी अस्पताल में उठाते हैं लापरवाही का फायदा अम्बेडकरनगर। जिला अस्पताल हो या फिर सीएचसी व पीएचसी। लगभग सभी अस्पतालों में अक्सर व्यवस्थाएं बेपटरी होती रहती हैं। चिकित्सक भी कई बार देर से अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में मजबूर होकर लोग निजी अस्पताल या फिर पैथालॉजी सेंटर का सहारा लेते हैं। सरकारी अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की मनमानी पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसकी शिकायत भी जिम्मेदारों से की जाती है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जाता है। इसका खामियाजा अक्सर मरीजों व उनके तीमारदारों को ही भुगतना पड़ता है। इसका पूरा लाभ ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्र में जगह जगह संचालित अवैध अस्पतालों के संचालक उठाते हैं। झोलाछाप से इलाज कराने के बाद अक्सर मरीजों की तबियत और भी खराब हो जाती है। सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र कुमार कहते हैं कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की छूट किसी को भी नहीं देनी चाहिए। जिले में अवैध तरीके से संचालित अस्पतालों व पैथालॉजी सेंटर पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इनकी भी सुनिए इलाज इतना महंगा है कि हर एक मरीज निजी अस्पताल नहीं जा सकता है। निजी चिकित्सक जितना फीस लेते हैं, उतने में एक सप्ताह की दवा मिल सकती है। -अशेाक कुमार पंजीकृत पैथालॉजी सेंटर व नर्सिंग होम पर इलाज व जांच के नाम इतना पैसा लिया जाता है कि मरीज व तीमारदार परेशान हो जाते हैं। -रामशेष वर्मा कई बार लोग जब अवैध पैथालॉजी सेंटरों व नर्सिंग होम की मनमानी की शिकायत तो करते हैं, लेकिन जिम्मेदार उनकी शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान नहीं लेते हैं। -राम सुभावन व्यवस्थाएं बेहतर हो जाएं तो ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल व अन्य सरकारी अस्पतालों में ही इलाज करा सकते हैं। लेकिन जिम्मेदारों को इसकी चिन्ता नहीं होती है। -उदयराज बीते दिनों अवैध निजी पैथालॉजी व नर्सिंग होम संचालकों पर कार्रवाई की गई थी। अभी भी तमाम पैथालॉजी व नर्सिंग होम अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। -चंद्रकेश सरकारी अस्पतालों में जांच व अन्य व्यवस्थाएं सुचारु न होने का पूरा लाभ निजी पैथालॉजी व नर्सिंग होम वाले उठाते हैं। खून व अन्य जांच के नाम पर ज्यादा पैसा लिया जाता है। -खुशीराम बोले जिम्मेदार जिले में संचालित अवैध नर्सिंगहोम व पैथालॉजी सेंटर पर कार्रवाई के लिए समय समय पर अभियान चलाया जाता है। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है। मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगे भी जांच में यदि पैथालॉजी सेंटर व नर्सिंग होम अवैध रूप से संचालित होते पाए जाएंगे तो कार्रवाई की जाएगी। -डॉ संजय शैवाल, सीएमओ, अम्बेडकर नगर

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