Barabanki News: गुरु पूर्णिमा से शुरू होगा श्रीनाग देवता का ऐतिहासिक मेला, तैयारियां तेज
Barabanki News: श्री नाग देवता मंदिर में गुरु पूर्णिमा से शुरू होने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बेहतर रात्रि विश्राम की व्यवस्था की आवश्यकता है, क्योंकि हर वर्ष लाखों लोग दूर-दूर से इस मेले में शामिल होते हैं। मान्यता है कि बाबा नागादास के उपदेश से इस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू हुई।

Barabanki News: सतरिख, संवाददाता। हैदरगढ़-बाराबंकी राजमार्ग पर मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित पौराणिक श्रीनाग देवता मंदिर में लगने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरु पूर्णिमा से शुरू होने वाला यह मेला करीब पंद्रह दिनों तक चलेगा। मंदिर परिसर में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हर वर्ष मेले में बाराबंकी के अलावा लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, रायबरेली और आसपास के कई जनपदों से लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु मिट्टी की मालिया में दूध और चावल भरकर श्रीनाग देवता को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि पूजा के बाद खाली मालिया घर में रखने से सर्प भय नहीं रहता।
रात्रि विश्राम की व्यवस्था
हालांकि मेले में आने वाले दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर में बने दो रैन बसेरों में से एक पर अग्निशमन विभाग का कब्जा रहता है। जिससे बारिश के दौरान रात में रुकने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। मेला प्रबंधक देवकीनंदन वर्मा ने बताया कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में मेला परिसर में अतिरिक्त रैन बसेरे और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कराई जानी चाहिए।
मेला की मान्यता
बाबा नागादास के उपदेश से जुड़ी है मेले की मान्यता: किंवदंती के अनुसार वर्तमान मंजीठा गांव का क्षेत्र कभी मंजीठ के पेड़ों से घिरा हुआ घना जंगल था। एक बार बाबा नागादास अपने शिष्यों के साथ यहां से गुजर रहे थे। चरवाहों ने जंगल में विषैले सर्पों का भय बताकर उन्हें रोकना चाहा। लेकिन बाबा आगे बढ़ गए। तभी एक विषैला सर्प उनकी ओर बढ़ा। बाबा ने उसे जीव हत्या का पाप समझाते हुए उपदेश दिया। इसके बाद सर्प पास की बांबी में चला गया। तभी से इस स्थान पर उसकी पूजा शुरू हुई और बाद में यहां श्रीनाग देवता मंदिर का निर्माण कराया गया। गुरु पूर्णिमा पर लगने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ शामिल होते हैं।


