
अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुआ धन्नाग तीर्थ का मेला
संक्षेप: Barabanki News - धन्नाग तीर्थ, जो सीतापुर-बाराबंकी सीमा पर है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण श्रद्धालुओं को सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मेले के दौरान गंदगी और समस्याएँ बढ़ गई हैं।
निन्दूरा। क्षेत्र के ग्राम पंचायत खुज्जी स्थित धन्नाग तीर्थ जो सीतापुर-बाराबंकी सीमा पर है। यह ऐतिहासिक धन्नाग तीर्थ आज भी विरासत को संजोए हैं। मंदिर के चारों ओर कई मील के दायरे में फैले इस तीर्थ की प्राकृतिक सुंदरता तथा सरोवर में खिले असंख्य कमल दल बरबस ही हर किसी का मन मोह लेते हैं। तीर्थ परिसर में पेड़ों के नीचे हर समय साधु-संतों का डेरा रहता है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशाल मेला लगता है। 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शंकर का दर्शन-पूजन करते हैं। किंवदंती के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव इधर से गुजर रहे थे।

हरे-भरे पेड़ों के बीच स्थित विशाल सरोवर वाली यह एकांत जगह पांडवों को इस कदर भा गई कि उन्होंने कुछ दिन यहां ठहरने का मन बना लिया। ऐतिहासिक धन्नाग तीर्थ उपेक्षा का शिकार मेला: धन्नाग मेले में भीड़ अधिक रहती है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के चलते लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मेला परिसर में जगह-जगह गंदगी फैली है। कोई सफाई कर्मी मेला परिसर सफाई करने नहीं पहुंच रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि जब ग्राम पंचायत स्थित प्रसिद्ध मेला लगा है तो ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी होनी चाहिए लेकिन ग्राम प्रधान व ब्लाक के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते मेले में सफाई नहीं हो रही है। 15 दिनों तक चलने वाले मेले में कई जिलों से श्रद्धालु आते हैं, मगर कोई स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया।

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