
बोले बाराबंकी: ठहराव न होने से हैदरगढ़ से लंबी दूरी की ट्रेनों का अभाव
Barabanki News - हैदरगढ़ तहसील के रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव न होने से यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोग बाराबंकी और लखनऊ जैसे दूर के स्टेशनों पर जाकर ट्रेन पकड़ने को मजबूर हैं। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जिले की हैदरगढ़ तहसील के रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव न होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैदरगढ़ क्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ों लोग रोज़गार, इलाज, शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता सहित अन्य महानगरों की यात्रा करते हैं, लेकिन ट्रेनों के ठहराव न होने के कारण यात्रियों को दूर-दराज़ के स्टेशनों का सहारा लेना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनें हैदरगढ़ तहसील के रेलवे स्टेशन से होकर गुजरती तो हैं, लेकिन ठहराव न मिलने से बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
मजबूरी में यात्रियों को बाराबंकी, रायबरेली या लखनऊ जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। इस समस्या को लेकर समाजसेवी संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। समाजसेवियों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन की उदासीनता के चलते वर्षों पुरानी मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रेनों के ठहराव न होने से क्षेत्र का आर्थिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। वहीं छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने में उन्हें अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बोले बाराबंकी: ठहराव न होने से हैदरगढ़ से लंबी दूरी की ट्रेनों का अभाव बाराबंकी। शहर के रेलवे स्टेशन के सामने तिराहे पर अवैध अतिक्रमण ने यात्रियों और राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्टेशन के मुख्य द्वार से लेकर आस-पास की सड़क तक ठेला-खोमचे और दुकानदारों ने कब्जा जमा लिया है। इस वजह से सड़क संकरी हो गई है और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि अक्सर ट्रेन पकड़ने के लिए जल्दी-जल्दी स्टेशन की ओर जाना पड़ता है, लेकिन अतिक्रमण और भीड़ के कारण फंसना आम बात हो गई है। स्टेशन के सामने अवैध अतिक्रमण के कारण अक्सर लोग गिर कर चोटिल भी हो जाते हैं। अतिक्रमण की वजह से न सिर्फ आमजन परेशान हैं, बल्कि स्टेशन आने वाले यात्रियों पर भी गलत प्रभाव पड़ता है। लोगों ने रेलवे प्रशासन और स्थानीय नगर पालिका से मांग की है कि नियमित अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाए और स्टेशन के सामने चौड़ी सड़क उपलब्ध कराई जाए, ताकि आवागमन सुचारु हो सके। रामसनेही घाट तहसील के दरियाबाद रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने और वेटिंग रूम का अभाव होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफार्म पर खड़ा रहना पड़ता है। भीषण गर्मी, सर्दी या बारिश के मौसम में बैठने और आराम करने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। कई बार यात्रियों को बाहर दुकानों से महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। यात्रियों ने आरोप लगाया कि स्टेशन पर लगे हैंडपंप या पानी की टंकी या तो खराब रहती है या उससे गंदा पानी आता है, जो पीने योग्य नहीं होता। वहीं वेटिंग रूम न होने के कारण महिलाएं और बुजुर्ग जमीन पर बैठकर समय काटने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इस समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों द्वारा कई बार रेलवे प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि दरियाबाद जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का न होना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यात्रियों की मांग है कि स्टेशन पर शीघ्र ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराई जाए और यात्रियों की सुविधा के लिए एक स्थायी वेटिंग रूम का निर्माण किया जाए। ताकि आम जनता को राहत मिल सके और स्टेशन पर यात्रा करना सुगम हो सके। भाकियू राष्ट्रीयतावादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र सिंह की अगुवाई में ट्रेनों के ठहराव को लेकर पिछले दो वर्षों में कई बार रेलवे स्टेशन पर धरना प्रदर्शन किए गए हैं। रेल अधिकारियों ने हर बार हैदरगढ़ आकर आश्वासन देकर भाकियू का आन्दोलन स्थगित करा दिया। भाकियू अध्यक्ष श्री सिंह ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक रेल अधिकारियों के अलावा केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात कर ट्रेनों के ठहराव की मांग की। लेकिन स्थित नहीं बदली। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैय्या ने तमाम बार रेलवे के अधिकारियों को ज्ञापन दिया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं रक्षा मंत्री राजनाथ से मिलकर समस्या बताई। फिर भी नतीजा नहीं निकला। इसी क्रम में भाकियू के अन्य संगठनों ने भी क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर प्राय: होने वाले आन्दोलनों में भी हैदरगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग रख रहे हैं। पर क्षेत्रवासियों की मांग पूरी नहीं हो रही है। हैदरगढ़ रेलवे स्टेशन का शौचालय बदहाली का शिकार बारांबकी। हैदरगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बना शौचालय इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। शौचालय में फैली गंदगी, बदबू और साफ-सफाई के अभाव के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। यात्रियों का कहना है कि शौचालय में नियमित सफाई नहीं होती, पानी की व्यवस्था भी अक्सर बाधित रहती है। गंदगी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है। लोगों का आरोप है कि स्टेशन पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बना दिया गया, लेकिन उसके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रेलवे प्रशासन की लापरवाही के चलते यह शौचालय नाम मात्र का रह गया है। लोगों ने मांग की है कि शौचालय की नियमित सफाई कराई जाए, पानी, बिजली और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और स्टेशन परिसर स्वच्छ बना रहे। हैदरगढ़ स्टेशन पर बंदरों व छुट्टा मवेशियों का आतंक बाराबंकी। हैदरगढ़ रेलवे स्टेशन इन दिनों बंदरों और छुट्टा मवेशियों के आतंक से जूझ रहा है। स्टेशन परिसर और प्लेटफार्म पर खुलेआम घूमते बंदर व आवारा पशु यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। आए दिन होने वाली घटनाओं से यात्री दहशत में हैं और किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। यात्रियों का कहना है कि बंदर अक्सर सामान छीन लेते हैं, बच्चों और महिलाओं पर झपट्टा मार देते हैं, जिससे लोग डर के साये में यात्रा करने को मजबूर हैं। वहीं छुट्टा मवेशी प्लेटफार्म और रेलवे ट्रैक के पास घूमते रहते हैं, जिससे ट्रेन के आने-जाने के समय गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। रात के समय यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब कम रोशनी के कारण यात्रियों को जान-माल का खतरा बना रहता है। इस गंभीर समस्या को लेकर यात्रियों और समाजसेवियों द्वारा रेलवे प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। लोगों का आरोप है कि स्टेशन पर न तो पशुओं को रोकने के लिए घेराबंदी की गई है और न ही बंदरों को भगाने के लिए कोई व्यवस्था की गई है। यात्रियों की मांग है कि स्टेशन परिसर में तत्काल प्रभाव से बंदरों व छुट्टा मवेशियों को हटाने की ठोस व्यवस्था की जाए। इनकी भी सुनिए हैदरगढ़ रेलवे स्टेशन पर शौचालय बदहाली का शिकार बना हुआ है। शौचालय में फैली गंदगी, बदबू और सफाई के अभाव के कारण परेशानी होती है। -लाला लक्ष्मी नारायण ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफार्म पर खड़ा रहना पड़ता है। सर्दी या बारिश के मौसम में बैठने और आराम करने की व्यवस्था नहीं है। -धमेन्द्र दरियाबाद रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। यात्रियों के लिए पेयजल की व्यवस्था न होने पर परेशानी होती है। -अमरदीप स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए एक वेटिंग रूम का निर्माण किया जाए। ताकि आम जनता को राहत मिल सके और स्टेशन पर यात्रा करना आसान हो सके। -आदर्श वेटिंग रूम न होने के कारण महिलाएं और बुजुर्ग जमीन पर बैठकर समय काटने को मजबूर हैं, जिससे काफी परेशानी होती हैं। वेटिंग रूम का निर्माण होना बहुत जरूरी हैं। -सुशील सोनी रेलवे प्रशासन की उदासीनता के चलते वर्षों पुरानी मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है। ट्रेनों के ठहराव न होने से क्षेत्र का आर्थिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। -पप्पू सिद्दीकी बोले जिम्मेदार अमृत भारत योजना के अर्न्तगत यात्रियों के लिए नया भवन बनाया जा रहा हैं। जिसमें प्रतीक्षालय, सहित अन्य सुविधा लोगों को मिलेगी। कोन कोर्स भी होगा। पार्किंग की भी अच्छी व्यवस्था होगी। आने जाने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छा रास्ता भी बनाया जाएगा। रेल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। -अरूण कुमार रायजादा, अधीक्षक रेलवे स्टेशन बारांबकी

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