बोले बाराबंकी: हाईटेक बनें पुस्तकालय तो आसान हो पढ़ाई

बोले बाराबंकी: हाईटेक बनें पुस्तकालय तो आसान हो पढ़ाई

संक्षेप:

Barabanki News - बच्चों और युवाओं में मोबाइल फोन की लत को कम करने के लिए सरकार अब रीडिंग कल्चर को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग स्कूलों और पुस्तकालयों में पुस्तक पठन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहा है। लोगों का मानना है कि इससे बच्चों की स्क्रीन टाइम में कमी आएगी और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।

Nov 12, 2025 04:41 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बाराबंकी
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बच्चों और युवाओं में मोबाइल फोन की बढ़ती लत को देखते हुए सरकार अब बड़े पैमाने पर रीडिंग कल्चर को बढ़ावा देने की तैयारी में है। लोगों की चेतावनियों के बाद लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों पर गहरा दुष्प्रभाव डाल रहा है और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में पुस्तक पठन को बढ़ावा दे रहा है। लोगों की मांग है कि यदि बच्चों और युवाओं को पुस्तकों की ओर आकर्षित किया जाए तो उनकी मोबाइल और सोशल मीडिया पर निर्भरता स्वाभाविक रूप से कम होगी। इसके लिए जिले में मोबाइल-फ्री लाइब्रेरी जोन बनाया जाए, गांवों तक मोबाइल लाइब्रेरी वैन भेजी जाए, छात्रों के लिए मासिक पुस्तक-पढ़ो प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए, हर कक्षा में बुक कॉर्नर अनिवार्य किए जाने की पहल हो।

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लोगों का ऐसा मानना है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम तेज़ी से बढ़ा है। औसतन 6 से 18 वर्ष के बच्चे 4 से 7 घंटे तक मोबाइल टैब पर रहते हैं, जिससे उनकी आंखों में चुभन, धुंधलापन, सिरदर्द, जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। किताबें पढ़ने से आंखों पर कम तनाव पड़ता है और दिमाग की एकाग्रता बेहतर होती है। अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया ने बच्चों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। सरकार की इस पहल से उन्हें उम्मीद है कि बच्चे फिर से किताबों से जुड़ेंगे और डिजिटल एडिक्शन कम होगा। प्रशासन भी अभिभावकों और शिक्षकों से भी सहयोग की अपील की अपेक्षा कर रहा है कि वे बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। बोले बाराबंकी: हाईटेक बनें पुस्तकालय तो आसान हो पढ़ाई भले ही शहर में सरकारी पुस्तकालय व दर्जनों निजी पुस्तकालय मौजूद हों, लेकिन इनकी वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। सरकारी हो या निजी-ज्यादातर पुस्तकालयों में युवाओं को मनचाही किताबें नहीं मिल पा रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों से लेकर सामान्य ज्ञान बढ़ाने वाले पाठकों तक, हर कोई संसाधनों की कमी से परेशान हैं। युवाओं की सबसे भी बड़ी शिकायत है कि कई महत्वपूर्ण किताबें नहीं है। करेंट अफेयर्स की पत्रिकाओं की नियमित सप्लाई नहीं है। एक छात्र ने बताया कि पुस्तकालय तो है, लेकिन वहां वह किताबें नहीं जो हमारी पढ़ाई के लिए जरूरी हैं। कई बार हमें बाहर से महंगी किताबें खरीदनी पड़ती हैं। कई पुस्तकालयों में बैठने की सुविधा अपर्याप्त है। पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन का अभाव हैं। इसके अलावा कई मूलभूत समस्याएं रोजाना छात्रों को झेलनी पड़ती हैं। कई निजी पुस्तकालयों में छात्रों को प्रति माह अच्छी-खासी फीस देनी पड़ती है, लेकिन सुविधाओं में सुधार नहीं हो रहा। युवाओं का कहना है कि पैसे लेते हैं लाइब्रेरी वाले, लेकिन सुविधाएं आधी भी नहीं मिलती। सरकारी पुस्तकालयों में किताबों की कमी है। कई जगह स्टाफ की कमी, बजट का अभाव और रखरखाव में लापरवाही साफ दिखती है। युवाओं की मांग है कि किताबें अपडेट हों, सुविधा बढ़ाई जाए। पुस्तकालयों की ऐसी हालत के बावजूद अब तक स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। शहर में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन सुविधाएं उसी गति से नहीं बढ़ रहीं। शहर के हजारों युवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे बैंकिंग, एसएससी, यूपीएसएसएससी, टीईटी, पुलिस भर्ती, रेलवे तथा सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा पुस्तकालयों की सीमित क्षमता, किताबों की कमी और संसाधनों की बदहाली के कारण छात्र रोजाना परेशान हो रहे हैं। अब युवाओं ने एक बड़ी, आधुनिक और सुव्यवस्थित लाइब्रेरी बनाने की जोरदार मांग की है, जो उनकी पढ़ाई की जरूरतों को पूरा कर सके। छात्रों की मांग है कि शहर को चाहिए एक मेगा लाइब्रेरी बनाई जाएं। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने कहा कि शहर में एक ऐसी लाइब्रेरी होनी चाहिए जहां सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की लेटेस्ट किताबें और स्टैंडर्ड टेक्स्टबुक्स, करंट अफेयर्स, मैगज़ीन और वर्षों के हल प्रश्नपत्र, शांत, बड़ा और सुव्यवस्थित अध्ययन कक्ष, हाई-स्पीड इंटरनेट, आरामदायक सीटिंग व्यवस्था, साफ-सुथरे वॉशरूम पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण जैसी सभी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों। एक छात्र ने कहा कि परीक्षा की मेहनत हम कर रहे हैं, लेकिन सुविधाएं आधी-अधूरी मिल रही हैं। एक बड़ी लाइब्रेरी बन जाए तो हमारी तैयारी का स्तर ही बदल जाएगा। शहर के मौजूदा पुस्तकालय छोटे हैं किताबें सीमित और पुराने संस्करण में उपलब्ध है और सीटें भी कम हैं। ग्रामीण शिक्षा को मिले नई दिशा हर ब्लॉक पर लाइब्रेरी बने बाराबंकी। उच्च व बेहतर शिक्षा की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययन संसाधनों की कमी। इसी को देखते हुए अब क्षेत्र के छात्रों, अभिभावकों और समाजसेवियों ने हर ब्लॉक पर एक बड़ी व आधुनिक लाइब्रेरी स्थापित करने की मांग तेज कर दी है। ग्रामीण युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आज ज्यादातर ऑनलाइन हो गई है, लेकिन अच्छी किताबें, शांत अध्ययन कक्ष और मार्गदर्शन की सुविधा उन्हें गांवों में उपलब्ध नहीं हो पाती यदि प्रत्येक ब्लॉक पर एक डिजिटल व पारंपरिक दोनों सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी बने, तो हजारों युवाओं को पढ़ाई में बड़ा सहारा मिलेगा। छात्रों का भी कहना है कि अगर पास में लाइब्रेरी हो तो रोजाना पढ़ाई के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा। कई छात्रों ने बताया कि शहर की लाइब्रेरी तक जाने-आने में उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता है। ग्रामीण युवक-युवतियों का कहना है कि अगर ब्लॉक स्तर पर लाइब्रेरी बने तो वे न केवल बेहतर तरीके से पढ़ाई कर पाएंगे बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम देकर क्षेत्र का नाम भी रोशन करेंगे। शहर में किताबें मिलना बड़ी चुनौती बारांबकी। आजकल ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाएं अब ऑनलाइन मोड में हो रही हैं चाहे सरकारी नौकरी की भर्ती हो, बैंकिंग-एसएससी की तैयारी, लेकिन तैयारी आज भी किताबों से ही सबसे मजबूत मानी जाती है। मगर शहर के पुस्तकालयों की हालत ऐसी है कि छात्रों को क्वालिटी स्टडी मटेरियल तक आसानी से पहुंच ही नहीं मिल पा रही। लोगों का कहना है कि किताबों से पढ़ने पर कॉन्सेप्ट मजबूत होते हैं। अभ्यास सेट और सॉल्व्ड पेपर समझने में आसानी होती है। इसलिए आज भी ज्यादातर छात्र मानते हैं कि अच्छी किताबें ही तैयारी की रीढ़ हैं। लेकिन शहर में किताबें मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई छात्रों ने शिकायत की है कि बैंकिंग, एसएससी, रेलवे, यूपीएसएसएससी, टीईटी, पुलिस भर्ती आदि की लेटेस्ट एडिशन नहीं मिलते है। कई पुस्तकालयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों का अलग सेक्शन ही नहीं है जिससे युवाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है। एक छात्र ने कहा कि परीक्षा ऑनलाइन है, लेकिन तैयारी ऑफलाइन करनी पड़ती है। पर यहां तो किताबें ही नहीं मिलतीं है। हालत यह है कि मानक और संसाधन दोनों कमजोर हैं, मगर इतने बड़े शहर में आज तक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। जब परीक्षाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी हैं, ऐसे में ऑफलाइन तैयारी के लिए किताबें ही छात्रों का सबसे बड़ा सहारा हैं और उनकी उपलब्धता में इतनी खामियां युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। सुरक्षित माहौल में परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं छात्राएं बाराबंकी। समाज में शिक्षा को लेकर नई सोच और बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं पूजा शुक्ला ने। उन्होंने बिना किसी सरकारी या बाहरी सहयोग के अपने दम पर सिर्फ लड़कियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था शुरू की है। पूजा शुक्ला का मानना है कि अगर बेटियों को सही दिशा और सुरक्षित वातावरण मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उनकी इस सोच को साकार रूप देने के लिए ट्रस्ट द्वारा एक विशेष शिक्षण केंद्र चलाया जा रहा है, जहां छात्राओं को मुफ्त या नाममात्र शुल्क पर कोचिंग, अध्ययन सामग्री, वाईफाई और परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूजा शुक्ला का यह प्रयास क्षेत्र की बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बना है। समाजसेवियों और अभिभावकों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की है। रोजाना दर्जनों छात्राएं यहां आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी रहती हैं। लड़कियों ने बताया कि न केवल पढ़ाई पर ध्यान देती हैं बल्कि सुरक्षा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान देती हैं। परिसर में सीसीटीवी, महिला प्रबंधक और स्वच्छ, शांत वातावरण जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। जिससे अभिभावकों को भी भरोसा रहता है। इनकी भी सुनिए कालेज की लाइब्रेरी में इंटरनेट कनेक्शन लगा है, जिससे काफी आसानी होती है। कालेज के शिक्षक भी सहयोग करते है। जिसका लाभ अभ्यर्थी उठा रहे हैं। -आकाश कुमार आज प्रतियोगिता की तैयारी कड़ी हैं, हम लोगों को कालेज से सभी आधुनिक सुविधाएं मिलती है। कोई परेशानी नहीं होती है। -नेहा सिंह लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित अख़बार और मैगज़ीन प्रतिमाह आती है। गर्मी में पंखे और रोशनी की कोई दिक्कत नहीं रहती है। -खुशी वर्मा कालेज की लाइब्रेरी में सारी व्यवस्था है। कालेज के शिक्षक भी पूरा सहयोग करते है। कोई परेशानी नहीं होती है। अब प्रतियोगी परीक्षा पहले से बिल्कुल अलग हो गई है। -निशा यादव अगर कस्बे में पुस्तकालय खोलवा दिए जाए तो छात्र छात्राओं को अन्य जिलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नहीं जाना पड़ेगा। इस पर ध्यान दें। -अब्दुल्ला आसिफ पुस्तकालय में छात्र छात्राओं को शांत वातावरण मिलता है। प्रशासन ने भी पुस्ताकलय में काफी अच्छी सुविधा दी है। छात्रों को काफी फायदा भी मिल रहा है। -मिनहाज अंसारी जिला पुस्तकालय में फर्नीचर की आवश्यकता है। प्रतियोगी परीक्षा की किताबों की भी आवश्यकता है। पुस्तकालय में सारी सुविधा है। पुस्तकालय आने वाले छात्र छात्राओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। -डा. पूनम सिंह प्रभारी जिला पुस्तकालय बारांबकी।