
बाराबंकी-नहरों से उड़ रही धूल, पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे किसान
Barabanki News - बाराबंकी में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नहरें झाड़ियों से भरी हैं और अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसान संगठनों ने आंदोलन की योजना बनाई है। नहरों की सफाई में अनियमितता के कारण पानी खेतों तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे किसान परेशान हैं।
बाराबंकी। नहरों में जब सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता हो, धूल उड़ रही है। अधिकांश नहरें जंगल झाड़ियों से पटी हैं। ऐसे में सिंचाई का संकट किसानों के सामने गहराता जा रहा है। जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। हिन्दुस्तान लगातार किसानों के मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसान संगठनों ने आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। वहीं विभाग अभी टेंडर व ठेका पट्टी में जुटा है। टेल तक नहीं पहुंचता है पानी: मसौली संवाद के अनुसार: नहरों, माइनरों की सफाई के नाम ठेकेदार लाखों रुपए डकार रहे है। लेकिन साफ-सफाई में बरती गई अनियमितता के चलते किसानों के खेतों तक पानी पहुंचना सपना बन गया है।
रजबहा रहरामऊ से निकली मूंजापुर मसौली माइनर से सिंचाई मसौली, मूंजापुर और देवकलिया के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा खेतों की सिंचाई होती है। परन्तु कुछ वर्षों से सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एवं ठेकेदारों की अनदेखी के चलते मुंजापुर और देवकलिया के किसानों के लिए नहर से सिंचाई सपना बनकर रह गया है। हालांकि इस बार भी माइनर की साफ-सफाई के नाम पर अनौपचारिक निभाई गई है। जिसके चलते इस बार भी मूंजापुर और देवकलिया के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने की उम्मीद नही दिखाई दे रही है। माइनर की टेल की सफाई नही हो सकी है। कस्बा मसौली के किसान अशोक कुमार वर्मा बताते है कि मुंजापुर माइनर का पानी देवकलिया तक जाता है और अन्तिम छोर का पानी कल्याणी नदी में गिर जाता था। लेकिन कुछ वर्षों से मसौली के किसानों की सिंचाई होती है। निन्दूरा संवाद के अनुसार: क्षेत्र में सीतापुर जनपद के सरौरा नदी से निन्दूरा क्षेत्र की 12 नहरें व तीन रजबहा में पानी दिया जाता है। पिछले वर्ष से अब तक मात्र दो बार ही पानी आखिरी टेल तक पहुंचा है। किसान वीरेंद्र कुमार, अवधेश यादव व राम कुमार आदि किसानों का कहना है धान की सिंचाई के समय एक बार भी पानी नहीं आया है। इस संबंध में सीतापुर के जेई राजीव कुमार सिंह ने बताया कि ऊपर से कम पानी मिलने के कारण पानी नहीं मिल पाता है। नहरों की सफाई 4.30 किलो मीटर दूर सफाई हुई है। जल्द ही नहरों की सफाई का कार्य पूर्ण होगा। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका: रामसनेहीघाट संवाद के अनुसार: जिले में 1,526 किलोमीटर लंबी नहरें किसानों की जीवनरेखा मानी जाती हैं। जिले की करीब 80 प्रतिशत खेती इन्हीं नहरों पर निर्भर है। इसके बावजूद नहर विभाग की लेटलतीफी ने किसानों को ऐसी मुसीबत में डाल दिया है कि रबी की बुवाई गंभीर संकट में फंस गई है। विभाग ने नहरों की सिल्ट सफाई का समय 15 अक्टूबर से 15 दिसंबर तय किया है। नहरों की सफाई के लिए विभाग ने 23 सितंबर से 5 नवंबर तक तीन अलग-अलग तारीखों पर टेंडर जारी किए हैं। टेंडर की यह उलझी और देर से चलती प्रक्रिया साफ दिखाती है कि विभाग खुद काम में रुचि नहीं ले रहा है। परिणामस्वरूप नवंबर के आखिर तक सफाई का वास्तविक काम शुरू भी नहीं हो पाया। अब 15 दिसंबर तक सफाई पूरी करने का दावा सिर्फ कागजों की कहानी लगता है। इनसेट रजबाहों में पानी न आने से किसान परेशान कोठी। सिद्धौर ब्लॉक क्षेत्र के 96 ग्राम पंचायत से अधिक गांव के लिए नवाबगंज रजबहा में इन दिनों पानी नहीं होने से किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रजबहा में उड़ती धूल व बालू के चलते धान कटाई के बाद खेतों की सींच कर गेंहू बुआई करने वाले किसानों को भी महंगे बिजली ट्यूबवेल व निजी डीजल इंजन से सिंचाई करने की मजबूरी है। साथ ही आलू व अफीम के खेती के पानी अभाव की समस्या है। क्षेत्र के कुम्हरावां, उस्मानपुर, भिठौरा लखन, असदामऊ, मोहम्मदपुर चंदी सिंह, छूलापाही, सुसवाई, बिबियापुरघाट, बिबियापुरथाना, कोठी सुहावां, मुबारकपुर, बीबीपुर, इब्राहिमाबाद, भानमऊ, बरगदहा व कोटवा समेत डेढ़ सैकड़ा गांव के किसानों को पानी की समस्या है।

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