बेजुबान पशु भी समझते हैं मालिक की भाषा

Newswrap हिन्दुस्तान, बाराबंकी
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Barabanki News - दिनेश मोंगिया, जो तिवारीपुर के निवासी हैं, ने अपने व्यस्त जीवन के बीच पशु सेवा को विशेष महत्व दिया है। उन्होंने अपने पेट्रोल पंप के पास एक फार्म विकसित किया है, जहाँ गाय, घोड़े और कुत्ते रहते हैं। उनका मानना है कि इन बेजुबान पशुओं से आत्मीयता इंसानों को सुकून देती है। उनका परिवार भी पशु प्रेम में शामिल हो गया है।

बेजुबान पशु भी समझते हैं मालिक की भाषा

रामसनेहीघाट, संवाददाता। कोई शौक के लिए तो कोई मानसिक सुकून और सेवा भाव से कुत्ता, बिल्ली, घोड़ा पाल रखा है। दिन भर की भागदौड़ और तनाव के बीच सुकून की तलाश अक्सर लोग अलग-अलग तरीकों से करते हैं, लेकिन तिवारीपुर निवासी दिनेश मोंगिया ने बेजुबान पशुओं के साथ रहने का एक अनोखा रास्ता चुना है। पेशे से बड़े व्यवसायी दिनेश मोंगिया का मानना है कि कहने को ये बेजान पशु हैं, लेकिन इनकी आत्मीयता कई बार इंसानों को भी मात दे देती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने व्यस्त जीवन के बीच पशु सेवा को खास जगह दी है। उन्होंने अपने पेट्रोल पंप के पास ही हाईवे किनारे एक बड़ा फार्म विकसित किया है, जहां आधा दर्जन से अधिक गाय, दो घोड़े और एक कुत्ता परिवार की तरह रहते हैं।इन

पशुओं की देखभाल के लिए उन्होंने चार लोगों की नियुक्ति की है, लेकिन खुद भी सुबह-शाम उनके बीच समय बिताना नहीं भूलते। वह गायों और कुत्ते को अपने हाथों से नहलाते हैं, दुलारते हैं, जबकि घोड़ों को रोजाना चना खिलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। खास बात यह है कि उन्होंने सभी पशुओं के नाम रखे हैं और जैसे ही वह फार्म पर पहुंचते हैं, नाम लेकर पुकारते ही पशु उनके पास दौड़े चले आते हैं।अकेले दिनेश ही नहीं, बल्कि उनकी इस पहल से प्रेरित होकर उनका पूरा परिवार भी पशु प्रेम से जुड़ गया है। उनकी पत्नी शांति देवी और 10 वर्षीय बेटी इंदू भी पशुओं के साथ गहरा लगाव रखती हैं। इंदू बताती है कि सुबह-शाम पालतू पशुओं के साथ खेलना उसे बहुत अच्छा लगता है। वह स्कूल जाते समय अपने टिफिन में रखा नाश्ता भी अपने पालतू कुत्ते ‘पैंथर’ को खिलाना नहीं भूलती।दिनेश बताते हैं कि जब भी किसी बात को लेकर तनाव होता है, वह सीधे अपने फार्म पर पहुंचते हैं। गायों को सहलाते ही मन हल्का हो जाता है और सारी थकान जैसे गायब हो जाती है, वह मुस्कुराते हुए कहते हैं।11 अप्रैल को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पशु दिवस को लेकर भी वह खासे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि कम से कम एक दिन तो इन बेजुबान साथियों के नाम होना ही चाहिए, जिनसे हमें निस्वार्थ प्रेम और सुकून मिलता है।दिनेश मोंगिया की यह पहल न केवल पशु प्रेम का संदेश देती है, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच संवेदनशील रिश्ते की भी एक सुंदर मिसाल पेश करती है।

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