कठिन तप कर धु्रव तारा का मिला वरदान: व्यास
Barabanki News - सैदनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र की चर्चा की गई। 5 वर्षीय ध्रुव ने अपनी सौतेली माँ के दुर्व्यवहार से आहत होकर भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। 6 महीने तक तप करने के बाद भगवान ने ध्रुव को अचल 'ध्रुव तारा' बनने का वरदान दिया। ध्रुव ने 36 हजार वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य किया।

सैदनपुर। दृढ़ निश्चय, निश्छल भक्ति और अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। भक्त के आगे भगवान को भी झुकना पड़ता है। ध्रुव ने कठोर तप करके भगवान विष्णु को पृथ्वी पर आने को मजबूर करके परम पद को प्राप्त किया। यह बात ग्राम कटका में राजकिशोर विश्वकर्मा द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र प्रसंग पर चर्चा करते हुए कथा व्यास पंडित बब्लू अवस्थी ने कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार ध्रुव चरित्र अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प की एक पावन कथा है। 5 वर्षीय ध्रुव ने सौतेली माँ सुरुचि के दुर्व्यवहार से आहत होकर, नारद जी के निर्देश पर भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की।
भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें अचल 'ध्रुव तारा' बनने का वरदान दिया। नारद उन्हें मूल मंत्र देते हुए कहा कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप करो तो तुम्हें श्री हरि अवश्य दर्शन देंगे और तुम्हारे दुखों का समूल विनाश कर देंगे। ध्रुव ने 6 महीने तक कंद-मूल, फल पत्ते खाए, बाद में उक्त वस्तुओं का परित्याग करके जल ग्रहण कर तप किया और अंत में श्वास रोककर तपस्या की। ध्रुव के कठोर तब से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने प्रकट होकर ध्रुव को वरदान दिया। अंत में ध्रुव को सबसे बड़ा पद (अटल तारा) प्राप्त हुआ। ध्रुव ने 36 हजार वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य करने के बाद दिव्य विमान से विष्णुधाम (परम पद) को प्राप्त हो गए। इस अवसर पर रुपेश गोस्वामी, शास्त्री लालू यादव, मनोज कुमार विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
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