
बांके बिहारी मंदिर: यूपी सरकार के अध्यादेश के खिलाफ याचिका पर SC अगले हफ्ते करेगा सुनवाई
ठाकुर श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर की प्रबंधन समिति ने यूपी सरकार के अध्यादेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर अब अगले हफ्ते सुनवाई होगी। सोमवार को यह याचिका न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी।
यूपी के मथुरा स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर की प्रबंधन समिति ने यूपी सरकार के अध्यादेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर अब अगले हफ्ते सुनवाई होगी। यूपी सरकार के अध्यादेश में मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण सरकार को सौंपने का प्राविधान है। सोमवार को प्रबंधन समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। मंदिर प्रबंधन समिति की यह याचिका सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी।
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने श्री बांके बिहारी मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि इस आप इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? इस पर सिब्बल ने पीठ से कहा कि सरकार एक निजी मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले रही है। उन्होंने कहा कि एक संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है जिसमें राज्य सरकार को मंदिर के आसपास के इलाकों के पुनर्विकास परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये के मंदिर कोष को अपने हाथ में लेने की अनुमति दी गई है।
बांके बिहारी निजी मंदिर
शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में लेने के लिए जारी अध्यादेश की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि कृपया देशभर में पता लगाएं कि कितने मंदिर प्रबंधन कानून के माध्यम से सरकारों ने अपने अधीन कर लिए हैं और एक बोर्ड को सौंपे गए हैं। इसके जवाब में, सिब्बल ने पीठ से कहा कि पिछले अधिग्रहण सार्वजनिक मंदिरों से संबंधित थे, जबकि बांके बिहारी मंदिर एक निजी मंदिर है।
बता दें कि एडवाकेट तन्वी दुबे के जरिए दायर मंदिर की प्रबंधन समिति की याचिका में मंदिर प्रबंधन समिति (जिसमें 350 सदस्य और सेवायत रजत गोस्वामी शामिल हैं) ने कहा है कि सरकार का आचरण स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण है। पांच एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए मंदिर के धन के प्रयोग से संबंधित मुद्दे पर हाई कोर्ट ने आठ नवम्बर 2023 को पहले ही फैसला कर दिया था। उसने राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण के लिए मंदिर के धन का प्रयोग करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया।
समिति की ओर से कहा गया है कि यूपी सरकार ने हाई कोर्ट के 8 नवम्बर के आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं की। इसकी बजाए सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित याचिका में एक पक्षकार आवेदन दायर किया। याचिका में कहा गया कि उक्त विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) गिरिराज सेवा समिति के चुनावों से संबंधित एक पूरी तरह से अलग मुद्दे से संबंधित थी, जो बांके बिहारी जी महाराज मंदिर से पूरी तरह से अलग मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 15 मई को जारी एक आदेश में अन्य बातों के साथ-साथ यूपी सरकार को पांच एकड़ जमीन अधिग्रहण करने के लिए मंदिर के धन के इस्तेमाल की इजाजत दी थी।





