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हवा से चलती बाइक, गांधी जी के चरखे से बिजली उत्पादन

हवा से चलती बाइक, गांधी जी के चरखे से  बिजली उत्पादन

राजकीय मेडिकल कालेज में आयोजित किए जा रहे इन्नोवेशन एण्ड स्टार्ट- अप समिट में आए इनोवेटरों के वैज्ञानिक माडल कौतूहल का विषय तो बने ही हैं। इसके साथ ही युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं। इन नई तकनीकों को अपना कर युवा अपने हौसलों की उड़ान भर सकता है। यहां लखनऊ से आए ज्ञानेन्द्र यादव की हवा से चलती बाइक जहां लोगों को आश्चर्यचकित कर रही है। वहीं बनारस से आए ज्याउर्रहमान का माडल चरखा से बिजली उत्पादन लोगों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना हुआ है।

एसएमएस लखनऊ से आए ज्ञानेन्द्र यादव ने एक्सपो में हवा से चलती बाइक का माडल सजा रखा है। इस बाइक को देखते ही लोग अनायास ही इसकी तरफ खिचते चले आते हैं। आखिर इस बाइक में खासियत भी तो भरी पड़ी है। इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मात्र हवा से चलती है। ज्ञानेन्द्र ने बताया कि बाइक में कम्प्रेस्ड करके एक सिलेण्डर में हवा भरते हैं। काफी दबाव में हवा जब मिनी टरबाइन हवा से लड़ती है तो इससे हवा से चलती है। बताया कि यह एसएमएस निदेशक डा. भरत राज सिंह की खोज है। यह बाइक 5 रूपए की हवा में 30 किमीं की रफ्तार से 40 किमीं तक का सफर तय कर सकती है। इसी तरह बनारस से आए 12 वीं पास नन्हें वैज्ञानिक ज्याउर्रहमान और इनके सहयोगी सलमान का चरखा भी आर्कषण है। ज्याउर्रहमान का दावा है कि गांधी जी के चरखे में वैज्ञानिक प्रयोग कर इससे बिजली उत्पादन किया जाता है। इसके मार्डन चरखा भी कहा जा सकता है। ज्याउर्रहमान ने बताया कि गांधी जी द्वारा बनाए गए चरखे में मैने विज्ञान का प्रयोग करके इसे धागा कातने के साथ साथ बिजली का उत्पादन भी किया जाता है। इस नए चरखे को मार्डन चरखा भी कहा जा सकता है। बताया कि मैने इस चरखे में एक डायनमो लगाया है। इसके एक चक्कर के द्वारा चरखे में घूमने वाली रिंग के साथ जोड़ दिया है। जब बुनकर अपना कातने के लिए इस चरखे को चलाएगा तो इसके साथ डायनमो भी चलेगा और बिजली का उत्पादन भी होगा। चरखे के द्वारा उत्पन्न बिजली को हम एक बैटरी में एकत्रित कर लेंगे। आवश्यकतानुसार इस बिजली को हम उपयोग में लाएंगे। बताया कि इस माडल के लिए विगत वर्ष अक्टूबर 2018 में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें 25 हजार की नकद राशि और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी कर चुके हैं।

किसानों के लिए 20 हजार की लागत का मिनी ई रिक्शा

बांदा। मेडिकल कालेज के एक्सपो में उन्नाव से आए दसवीं पास प्रशांत कुमार ने किसानों के लिए कम लागत का मिनी ई रिक्शा तैयार किया है। प्रशांत ने बताया कि नार्मल चौर 48 वोल्ट की बैटरी से यह रिक्शा तैयार किया गया है। करीब बीस हजार की लागत से तेयार इस बैटरी और पेट्रोल चालित मिनी ई रिक्शा में किसान ढ़ाई कुंतल तक का वजन लादकर एक बार की चार्जिंग में 48 किमीं तक का सफर तय कर सकता है। एक बाइक भी तैयार की है, जिसमें बैटरी लीथियम आयन का प्रयोग किया गया है। इसे एक बार चार्ज करना पड़ता है, करीब तीन घंटे की चार्जिंग में 90 किमी तक का सफर तय किया जा सकता है। बताया कि पुरानी बाइक में इस प्रयोग को करके करीब एक साल से मैं खुद चल रहा हूं कम से कम प्रतिदिन सौ रूपए का पेट्रोल तो बच रहा है।

आईटीआई छात्र ने तैयार किए कम खर्चे के कई माडल

बांदा। मेडिकल कालेज के एक्सपो में झांसी से आए आईटीआई छात्र अनुज विश्वकर्मा ने कम खर्चे में आटोमेटिक टेस्टर, आटोमेटिक स्ट्रीट लाइट, ड्रिप अलार्म आटोमेटिक सेफ्टी अलार्म और पानी की टंकी को आटोमेटिक बंद करने का यंत्र तैयार किया है। अनुज ने बताया कि उसके पिता रामनारायण किसानी करते हैं। दसवीं करने के बाद आईटीआई कंपलीट किया। बताया कि एक टेस्टर बनाया है, जो पल भर में शार्ट वायर को बिना तार खोले बता देगा कि कहां से शार्ट है। इस टेस्टर में ट्रांजिस्टर, रजिस्टेंस और एलईडी का प्रयोग किया। जिसकी फुटकर में करीब 25 रूपए है। इसी तरह ड्रिप अलार्म तैयार किया है। इसे लगाने के बाद अस्पताल में मरीजों को ड्रिप लगाने के बाद ड्रिप चढने के दौरान एलईडी जलती रहेगी। लेकिन ड्रिप लिक्विड खत्म होते ही अलार्म बजेगा। इसकी कीमत करीब 45 रूपया है।

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  • Web Title: Wind-driven bikes electricity from Gandhiji s charkis