आरटीआई की सूचना न देने पर आयोग बीएसए पर नाराज
Banda News - बांदा में राज्य आयोग ने बीएसए पर जनसूचना में देरी और गलत जानकारी देने पर नाराजगी जताई। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में आयोग ने बीएसए के प्रतिनिधि को फटकार लगाई। समाजसेवी पुष्पेंद्र सिंह ने कई बिंदुओं पर जनसूचना मांगी थी, जिसमें कस्तूरबा विद्यालयों में भुगतान का सत्यापित ब्योरा शामिल था।

बांदा। जनसूचना में सही व समय से जानकारी देने पर राज्य आयोग ने बीएसए पर कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए सुनवाई की। बीएसए के प्रतिनिधि को आयोग अध्यक्ष ने देरी से व गलत सूचना देने पर फटकार लगाई। अगली सुनाई में स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित होने को कहा। समाजसेवी पुष्पेंद्र सिंह चुनाले ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से कई माह पहले पांच बिंदुओं पर जनसूचना मांगी थी। इसमें उन्होंने जिले में संचालित आठ कस्तूरबा विद्यालयों में विभिन्न मदों में किए भुगतान का सत्यापित ब्योरा मांगा था। विभाग से दो मई को उन्हें जनसूचना दी गई, पर ज्यादातर यह गलत थी।
उनका आरोप था कि विभाग के लेखाकारों ने बीएसए व अन्य विभागीय अधिकारियों की सह पर कई बोगस फर्में बनाकर लाखों रुपये का भुगतान कर बंदरबाट कर लिया।बताया कि जो सूचनाएं जिले के आठ कस्तूरबा को आवासीय विद्यालयों से मंगाई गई हैं, उनमें से कई वार्डनों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। वार्डन के नमूना हस्ताक्षर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजें जाएं । उनका आरोप है कि मिशिका टेडर्स को ब विद्यालयों में दूध, नाश्ता, फल, फूल व राशन सामग्री का भुगतान किया है, जबकि यह फर्म सिर्फ कास्मेटिक का काम करती है। इसे अलावा तत्कालीन लेखाकार के सगे भाईकी फर्म आराध्या ट्रेडर्स को बिना टेंडडर के 30 लाख का भुगतान किया गया है। पुष्पेंद्र सिंह चुनाले ने बताया कि वीडियो कान्फ्रेंसिंग में आयोग ने सुनवाई की और नाराजगी जताई है। अगली सुनवाई में बीएसए को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। बीएसए अव्यक्तराम तिवारी का कहना है कि जो सूचनाएं मांगी जाती है वह दी जाती हैं। जो आयोग का निर्देश होता है उसका पालन किया जाता है।
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