अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस: अनुशासन के बीच एक ही छत के नीचे चार पीढ़ियों का परिवार
अतर्रा के बुजुर्ग शिव प्रसाद का परिवार एक मिसाल है। चार पीढ़ियों के लगभग 50 सदस्यों का यह संयुक्त परिवार अपने संस्कारों के बल पर एकजुट है। परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं और परिवार के निर्णय एक साथ मिलकर लेते हैं।
बांदा, हिटी। संयुक्त परिवारों के बिखराव में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा रहा है। मोबाइल फोन एक ही छत के नीचे रहने वालों के बीच दीवार बन रहा है। वहीं अतर्रा के बुजुर्ग शिव प्रसाद का परिवार इन सबसे दूर है। वह अपने संस्कारों से परिवार की लंबी होती बेल को सींच रहे हैं, जिससे यह पूरा पौधा बना है। चार पीढ़ियों के करीब 50 सदस्यों के परिवार में सभी लोग पूरे अनुशासन के साथ सभी की भावनाओं का सम्मान करते हैं। बेटों व बहुओं को लेकर सास तक अपनी सीमाएं जानती हैं और एक-दूसरे के सुख दुख का हर तरह से ख्याल रखती हैं। मौजूदा माहौल में जब लगातार एकल परिवार ही टूट रहे हो तब ऐसे दौर में अतर्रा मे शिव प्रसाद का संयुक्त परिवार समाज के लिए मिसाल बन गया है। अतर्रा कस्बा के तिलक नगर मोहल्ला निवासी 75 वर्षीय शिव प्रसाद पांडेय बताते हैं कि परिवार के बड़े बुजुर्ग यानी पिता स्वर्गीय राम सजीवन कह गए थे कि खुशियां वहीं रहती हैं, जिस घर में परिवार मिलजुल कर एक साथ रहता है। कंधे से कंधा से कंधा मिलाकर भाई बंधु चलते हों, हम आज भी अपने बुजुर्गों की बात को निभाते चले आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ा परिवार होने की वजह से रसोई एक साथ बनना कठिन जरूर है, पर मुश्किल नहीं। इसी के चलते रसोई भले ही दो अलग-अलग दो जगह बनाई जाती हो, लेकिन खेती किसानी का काम घर के मुखिया के रूप में शिव प्रसाद पांडेय की सलाह पर ही परिवार के लोग मिलजुल कर करते हैं। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय राम सजीवन पांडेय के तीन पुत्र शिवप्रसाद, गंगा प्रसाद व भागीरथ हैं, जिनकी पत्नी क्रमशः शकुंतला, सुनीता व पदमा हैं। सबसे बड़े भाई शिव प्रसाद पांडेय के तीन पुत्र राघवेंद्र, सुधीर वअभिषेक हैं। जबकि गंगा प्रसाद के रोहित, राहुल और शशि हैं। वहीं पेशे से अधिवक्ता भागीरथ पांडेय के एक पुत्र अमित और तीन बेटियां है। इसके बाद कई पुत्रों की शादी विवाह के बाद उनकी भी पत्नी व कई संताने हैं, जो सभी एक छत के नीचे रहते हैं। इनमें कई प्राइवेट तो कुछ सरकारी नौकरी में हैं। परिवार के कई सदस्य खेती-किसानी में हाथ बंटाते हैं। घर के कोई भी छोटे-बड़े फैसले शिवप्रसाद ही लेते हैं, लेकिन सबकी सलाह जरूर लेते हैं। उनका फैसला हंसी-खुशी पूरा परिवार मानता है.
परिवार को एक धागे में पिरोना बड़ी चुनौती
अतर्रा। संयुक्त परिवार के मुखिया 75 वर्षीय शिव प्रसाद कहते हैं कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने चार पीढ़ियों के परिवार को बंटने नहीं दिया। इसकी मुख्य वजह पत्नी के संस्कार भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को छोटे से परिवार में सभी से प्रेम करने की शिक्षा दी जाती है। उनके परिवार में भी कई बार बिखराव की स्थिति आई, पर उन्होंने टूटने से बचाया। दोनों पक्षों को साथ बैठाकर समझाया और सभी में इतने संस्कार हैं कि वह बात मानते हैं। परिवार के जो भी बेटे व नाती कमाते हैं, उससे सभी का ख्याल रखते हैं। इलाज हो या पढ़ाई, विवाह आदि का खर्चा सब कोई मिलजुलकर उठाते हैं.
स्वतंत्रता छिनती है, पर बदले में मिलता है प्यार
-संयुक्त परिवार में स्वतंत्रता जरूर कुछ छिनती है, पर उसके बदले पूरे बड़े परिवार का प्यार भी मिलता है। मां व भाभी आदि से लेकर सभी स्वतंत्रता का ध्यान भी रखते हैं।
-सुधीर पांडेय
-हम लोगों के पास पुराने संस्कार हैं। जानते हैं कि स्वतंत्रता ही परिवार का बिखराव कराती है। एक ही छत के नीचे रहकर अपनी पत्नी व बच्चों का पूरा ख्याल रखते हैं। उन्हें कोई कमी नहं महसूस होने देते।
-अभिषेक पांडेय
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