बीयर व ठंडा के शौकीनों को लग सकता महंगाई का झटका
मध्य पूर्व में तनाव के कारण भारत की एल्युमिनियम इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। आयात में कमी से कैन निर्माण प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें बढ़ने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो कैन की कीमतें 30% तक बढ़ सकती हैं, जिससे छोटे रिटेलरों का व्यापार प्रभावित होगा।

बांदा। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर देश की एल्यमिनियम इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त मात्रा में एल्युमिनियम का आयात न होने से पर्याप्त मात्रा में कैन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इससे आने वाले दिनों में कैन की कीमतें आसमान छूने की उम्मीद है। इस आशंका से जनपद के व्यापारी चिंतित हैं। उनके मुताबिक ऐसा हुआ तो लोग कैन में बिकने वाले उत्पादों से दूरी बनाना शुरु कर देंगे। जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। भारत अपनी एल्युमिनियम संबंधी जरूरत का 70 प्रतिशत जरूरत विदेशों से पूरी करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट के देश प्रमुख हैं।
इस एल्युमिनियम का उपयोग कैन जैसे उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। मिडिल ईस्ट के देशों से आयातित एल्युमिनियम होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। हालांकि इन दिनों वेस्ट एशिया में ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है। जिसके चलते ईरान ने दोबारा हार्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के साथ मालवाहक जहाजों के आवागमन पर रोक लगा दी है। इस घटना का देश की एल्युमिनियम कैन इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ रहा है। एल्युमिनियम का आयात बाधित होने से देश की हिंदाल्को और नोवेलिस जैसी प्रमुख कैन निर्माता कंपनियो ने अपनी प्रोडक्शन लाइनें 50 से 60 प्रतिशत क्षमता पर चला रही हैं। इससे कंपनियां मांग के अनुरुप कैन का निर्माण नहीं कर पा रही हैं। जनपद की बात करें तो यहां कोल्ड ड्रिंक्स, बियर जैसे कैन में बिकने वाले उत्पाद बड़ी मात्रा में उपयोग में लाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जनपद में हर साल करीब 10 करोड़ रुपये के कैन में बिकने वाले उत्पादों की बिक्री की जाती है। हालांकि अब एल्युमिनियम न पहुंचने से आने वाले दिनों में कैन की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटरों के मुताबिक कैन की कीमतें बढ़ने का असर अभी से दिखने लगा है। कंपनियों ने कैन में बिकने वाले उत्पादों को भेजना कम कर दिया है। अगर यह स्थिति जुलाई तक चली तो इन उत्पादों का थोक मूल्य 20 से 25 प्रतिशत बढ़ सकता है। ग्रामीण इलाकों का हाल तो और भी खराब है। यहां पर्याप्त सप्लाई न होने से रिटेलर लोगों को पेय पदार्थ उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और यदि करा रहे हैं तो ऊंचे दामों पर। जानकारों के मुताबिक पर्याप्त एल्युमिनियम की आपूर्ति न होने से जून-जुलाई के पीक सीजन में दुकानों पर खाली शेल्फ नजर आ सकते हैं। जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।--गर्मी के साथ दिक्कतें बढ़ने का अंदेशागर्मी के मौसम में पेय पदार्थों की बिक्री तेजी से बढ़ जाती है। बीते साल मई के महीने में कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री 40 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। हालांकि इस बार एल्युमिनियम कैन संकट से आने वाले दिनों में स्थितियां बिगड़ने का अंदेशा है। जानकारों की माने तो कोल्ड ड्रिंक्स के अलावा डाइट कोक, एनर्जी ड्रिंक्स और बीयर पैकेजिंग भी प्रभावित होगी।बोले व्यापारीगर्मियों में पेय पदार्थों की मांग चरम पर होती है, एल्युमिनियम की अनुपलब्धता से कैन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे छोटे रिटेलरों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सरकार को एल्युमिनिमय की पर्याप्त मात्रा में आयात करने के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।-कमलेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल---जनपद में कैन में बिकने वाले कोल्ड ड्रिंक्स, बीयर जैसे उत्पादों की बड़े स्तर में बिक्री की जाती है। गर्मी के मौसम में इन पेय पदाथार्ें की बिक्री और बढ़ जाती है। कैन की कीमतें बढ़ीं तो इन्हें बेंचने वालों का व्यापार प्रभावित होगा। सरकार को एल्युमिनियम आयात पर सब्सिडी देनी चाहिए।-अमित सेठ भोलू, व्यापारी--------------------बोले डॉक्टरगर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ता है। ऐसे में लोग कोल्ड ड्रिंक्स का प्रयोग करते हैं। अगर कोल्ड ड्रिंक्स महंगे या अनुपलब्ध हुए तो लोग नींबू पानी, छाछ या ओआरएस जैसे घरेलू उपाय अपना सकते हैं।डॉ. विनीत सचान, फिजीशियन
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