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बांदाविवि में भर्ती: प्रोफेसर की ओर से हाईकोर्ट में रिट

हिन्दुस्तान टीम,बांदाPublished By: Newswrap
Sat, 12 Jun 2021 04:22 AM
विवि में भर्ती: प्रोफेसर की ओर से हाईकोर्ट में रिट

बांदा। वरिष्ठ संवाददाता

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर सवालिया निशान रिजल्ट जारी होने से पहले उठा था। विवि के एक प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में रिट भी दाखिल कर रखी है।

विश्वविद्यालय में 40 पद पर भर्ती के लिए दो चरणों में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया। पहले विज्ञापन में 29 और दूसरे में 11 पद के लिए वैकेंसी निकाली गई। दोनों विज्ञापन निकलने के बाद विश्वविद्यालय के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने रोस्टर का अनुपालन न होने को लेकर आवाज उठाई। विरोध को दबाने की कोशिश हुई तो असिस्टेंट प्रोफेसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। भर्ती के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके साथ ही सत्ता पक्ष के विधायक तिंदवारी ब्रजेश प्रजापति और सपा से राज्यसभा सदस्य विशंभर निषाद भी लामबंद हो गए। दोनों जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भर्ती विज्ञापन में आरक्षण रोस्टर का अनुपालन न होने की शिकायत की।

एनजीओ चलानेवाले को बना दिया प्रोफेसर:विधायक तिंदवारी ब्रजेश प्रजापति ने आरोप लगाते हुए दावा है कि कुलपति ने अपने दो चहेतों के लिए आरक्षण रोस्टर से खिलवाड़ कराया। दोनों का प्रोफेसर पद पर चयन हुआ है। जबकि इससे पहले दोनों कभी भी शिक्षण कार्य से जुड़े नहीं रहे। दोनों एनजीओ चलाते हैं।

विधायक का तर्क:विधायक के मुताबिक, आरक्षण 100 पदों के सापेक्ष हिन्दी वर्णमाला अक्षर के क्रम में होना चाहिए। ये ही व्यवस्था है। भर्ती विज्ञापन में इस रोस्टर का पालन नहीं किया गया। उदाहरण के तौर पर कीट विज्ञान विभाग, कृषि अर्थशास्त्र और कृषि प्रसार में पद रिक्त हैं तो इन विभाग के पहले अक्षर और लागू आरक्षण व्यवस्था अनुसूचित जाति, अनारक्षित, अन्य पिछड़ा वर्ग के क्रम में होना चाहिए था। लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।

नौ पद पर क्षत्रिय, पांच पर प्रतिद्वंद्वी ही नहीं:आरोप में दावा किया गया है कि 11 पद पर सिर्फ एक जाति क्षत्रिय को वरीयता दी गई है। उनकी ही नियुक्ति की गई है। विवि के निदेशक प्रशासन वीके सिंह ने स्पष्ट किया कि 24 पद पर भर्ती हुई है। इसमें नौ पद पर क्षत्रिय भर्ती हैं। ऐसा इस वजह से हुआ। क्योंकि पांच पदों पर कोई भी प्रतिद्वंद्वी आवेदक नहीं था। सिर्फ एक-एक जाति के आवेदक रहे, वो भी क्षत्रिय। मेरिट के आधार पर चयन किया गया।

विश्वविद्यालय की सफाई:विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस गौतम की सहमति पर जारी विज्ञप्ति में विधायक सहित सभी के आरोप निराधार बताए गए। दावा किया कि जारी दोनों चरण के विज्ञापन में रोस्टर आरक्षण का अनुपालन हुआ है। 40 पदों में 24 पर उपयुक्त अभ्यर्थी पाए गए। 16 पद पर अनारक्षित, पांच ओबीसी, तीन अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों का चयन हुआ। शेष 16 पद पर उपयुक्त अभ्यर्थी न पाए जाने से रिक्त हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए आगे विज्ञापन निकाला जाएगा।

इन्होंने किया चयन:चयन समिति के अध्यक्ष कुलपति होते हैं। इनके अलावा राज्यपाल के द्वारा नामित दो विषय विशेषज्ञ, एक अधिष्ठाता, एक विभागाध्यक्ष, एक ओबीसी और एक अनुसूचित जाति के सदस्य चयन समिति में शामिल रहते हैं। अभ्यर्थियों का चयन स्कोर बोर्ड में प्राप्त अंक, प्रस्तुतिकरण और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर किया जाता है।

प्रदेश सरकार ने दिए जांच के आदेश:कुलपति की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि विवि की छवि धूमिल किए जाने के लिए भ्रामक और तथ्यहीन बातें फैलाई जा रही हैं। प्रदेश सरकार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

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