यूजीसी के नए नियम के समर्थन में छात्रों ने दिखाई एकजुटता
Banda News - बांदा में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के युवाओं ने यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव रोकने और कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण की मांग की। ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया, जिसमें नए नियमों को आवश्यक बताया गया। न्यायालय ने 2012 के नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया है।

बांदा। शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के नए नियमों के बाद से प्रदर्शन और आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को ओबीसी एससी एसटी वर्ग के युवाओं ने यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में प्रदर्शन किया। हाथों में लेकर आए तख्तियां लहराईं। वहीं राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंपा है। प्रदर्शन में एससी/एसटी/ओबीसी/महिला, दिव्यांग एंव कमजोर वर्ग के छात्र अजय, सुफल राय, सचिन , अजय, मनीष कुमार, पवन नरेश, रोहित, अमित, अंशु वर्मा ने ज्ञापन में बताया कि यूजीसी द्वारा अधिसूचित ये नए नियम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदायों, महिलाओं, दिव्यांगों, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों और शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं आवश्यक पहल हैं।
इन नियमों का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जातिगत, सामाजिक तथा संस्थागत भेदभाव को प्रभावी ढंग से रोकना है। 29 जनवरी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए अंतिम निर्णय तक वर्ष 2012 के नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया है। हम न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए यह निवेदन करना चाहते हैं कि वर्ष 2012 में बनाए नियम वर्तमान समय की सामाजिक वास्तविकताओं, उच्च शिक्षा संस्थानों में सामने आ रहे भेदभाव के स्वरूप तथा बढ़ती शिकायतों को प्रभावी रूप से संबोधित करने में अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। जनवरी 2026 में अधिसूचित नए नियम अधिक स्पष्ट, व्यापक एवं जवाबदेही-आधारित हैं। इन नियमों के माध्यम से शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ किया गया है। उच्च शिक्षण संस्थानों पर भेदभाव की रोकथाम हेतु स्पष्ट और ठोस जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इससे विशेष रूप से एससी एसटी,ओबीसी, महिलाओं, दिव्यांगों, ईडब्लूएस एवं अन्य वंचित वर्गों के छात्रों और शोधार्थियों को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समान शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हो सकेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की रोकथाम के लिए इस कानून को लागू करना चाहिए।
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