देश में सबसे गर्म बांदा, नेता बरसा रहे एक-दूसरे पर अंगारे
बांदा में भीषण गर्मी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गर्मी का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया, जबकि जलशक्ति मंत्री रामकेश निषाद ने सपा को जिम्मेदार ठहराया। विशेषज्ञों ने वृक्षारोपण और जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने न्यूयॉर्क की हडसन नदी के मॉडल को अपनाने की सलाह दी।
बांदा, संवाददाता। बांदा में भीषण गर्मी के बाद सियासी बयानों के अंगारे भी बरसने लगे हैं। सोमवार को बांदा देश में सबसे ज्यादा गर्म रहा। मौसम विभाग द्वारा यह आंकड़े जारी होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गर्मी पर बयान की तोप भाजपा सरकार की तरफ मोड़ दी। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध खनन हो रहा है। सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। ऐसे तो कुछ दिन बाद लोग कहेंगे.. ‘एक था बांदा’। यानी बांदा का नाम-ओ-निशान मिट जाएगा। बांदा से ही विधायक जलशक्ति मंत्री रामकेश निषाद ने पलटवार कर इसके लिए सपा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा-2012 से 2017 के बीच अखिलेश की सरकार ने बांदा ही नहीं पूरे बुंदेलखंड में खनन का जो हाहाकार मचाया, हमारी सरकार उसे ठीक कर रही है। खनन किसने, कैसे कराया, यह तो उनकी सरकार के खनन मंत्री का हश्र देख कर हर कोई समझ रहा है।
अखिलेश का वार
धन लोभी भाजपा सरकार और उनके पालित-पोषित लालची ठेकेदारों द्वारा निर्मम उत्खनन के कारण बांदा को साज़िशन ख़त्म किया जा रहा है। ‘बांदा’ को मिटाया जा रहा है और दूसरी जगहों को बसाया जा रहा है। बांदा के इस ‘प्राकृतिक उत्पीड़न’ के कारण स्थानीय पैदावार चक्र भी बुरी तरह प्रभावित होना शुरू हो चुका है और काम-कारोबार की कमी की वजह से लोग दूसरी जगह जा रहे हैं। इससे बांदा ‘प्राकृतिक पलायन’ का शिकार हो रहा है।
- अखिलेश यादव, सपा प्रमुख
मंत्री का पलटवार
सपा की सरकार में बुंदेलखंड की धरती त्राहि-त्राहि कर रही थी। जंगल, पहाड़ नदियां सब तबाह कर दिए गए। पर्यावरण को बेपनाह क्षति पहुंचाई गई। उस वक्त हुई तबाही को ठीक करने में हमारी सरकार जूझ रही है। भाजपा सरकार में बड़े पैमाने पर पौधे रोपे गए। नदियां पुनर्जीवित की जा रही हैं। खनन पर अंकुश है। सपा प्रमुख बांदा की बर्बादी को मुद्दा बना कर अपनी नाकामियां छिपाना चाहते हैं।
- रामकेश निषाद, जलशक्ति राज्यमंत्री
गंभीरता दिखाएं लोग, वृक्ष लगाएं और जल संरक्षण भी करें
बुंदेलखंड पथरीला व मैदानी इलाका है। यहां मानक के अनुरूप वन क्षेत्र की बेहद कमी है। ऊपर से अवैध खनन व पर्वतों में विस्फोट में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जल संरक्षण का काम सिर्फ कागजों में चल रहा है। पौधे लगाने से ही तापमान नियंत्रित हो सकता है। घर-घर चलने वाले एसी भी तापमान बढ़ने की मुख्य वजह है। आम लोगों को इसे गंभीरता से लेना होगा। ज्यादा से ज्यादा छायादार वृक्ष लगाए जाएं। जल को ज्यादा से ज्यादा रोकें। इससे जल स्तर बढ़ेगा तो काफी राहत होती है। मृदा क्षरण भी कम होगा।
- अर्चना खरे, पर्यावरण विशेषज्ञ व बॉटनी विभागाध्यक्ष, पंडित जेएन डिग्री कॉलेज, बांदा
न्यूयॉर्क की हडसन नदी का माडल अपनाए सरकार
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों की कटान बंद हो। नए पौधों की देखरेख हो। तालाब और पोखरों के सुंदरीकण के साथ पानी की व्यवस्था की जाए। नदियों में गंदे नाले गिर रहे हैं। इस पर सकारात्मक पहल होनी चाहिए। न्यूयॉर्क की हडसन नदी एक समय पर बहुत प्रदूषित थी। इस पर वहां सरकार ने जल पुलिस को सफाई करने से लेकर अन्य कामों को लेकर जिम्मेदारी दी। आज वहां की स्थित बेहतर है। उन्होंने एक बार यह मुद्दा सदन में भी उठाया था। अधिक तापमान हमारे जिले की गंभीर समस्या है। इसमें पक्ष विपक्ष सबको मिलकर काम करना चाहिए।
- विशंभर प्रसाद निषाद, पूर्व सांसद
प्राकृतिक संस्कृति की ओर लौटना होगा
यह आपदा प्राकृतिक है, इससे निपटना आसान नहीं है। छायादार पौधे कम हो रहे हैं। पौधे लगाने की जगह नहीं है। पहले रोड के किनारे महुआ, आम, पीपल के पौधे लगाए जाते थे। अब शीशम लगा रहे हैं, जो छाया नहीं देते हैं। फिर से हमें प्राकृतिक संस्कृति की ओर लौटना होगा। प्राकृतिक खेती करनी होगी। मोदी जी ने अपील की है कि हम प्राकृतिक खाद का उपयोग करें व ईंधन बचाएं। उस पर गंभीरता से अमल करना होगा। ज्यादा से ज्यादा फल व छायादार पौधे लगाएं और उनकी रखवाली करें। धरती की हरियाली बढ़ाने में सरकार व वन विभाग का आमजन गंभीरता से सहयोग करें।
- संतोष गुप्ता, राष्ट्रीय परिषद कार्यकारिणी सदस्य, भाजपा
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