फरियादी ही नहीं जांबाजों को भी डरा रहीं दीवार व छतों की दरारें
Banda News - बांदा में पुलिस जवान अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन खुद दहशत में हैं। अधिकांश पुलिस चौकियां और थाने जर्जर हैं, जिनकी छतें बारिश में टपकती हैं। फील्ड में रहने वाले जवान कुर्सियों की रखवाली कर रहे हैं, जबकि फरियादी दीवारों की दरारें देखकर डरते हैं।

बांदा। लोगों को संकट से उबराने के लिए खुद की जान की बाजी लगाकर कर्तव्य निभाने वाले पुलिस जवान खुद दहशत में हैं। जनपद में ज्यादातर पुलिस चौकी और थानों के भवन व आवास जर्जर व खंडहर हैं। वहां रात दिन रहकर पुलिस कर्मी ड्यूटी निभा रहे हैं। बारिश होने पर पुलिस चौकी व व थानों की छतें टपकती हैं। दीवारों में दरारें हैं। पुलिस चौकियां कहीं जर्जर भवनों में तो कहीं खंडहर हो चुके अन्य विभागों के भवनों में संचालित हो रही हैं। दहशत इतनी है दरोगा व सिपाही अक्सर फील्ड के बहाने बाहर रहते हैं और कुर्सी की रखवाली पीआरडी जवान करते हैं।
फरियादी भी समस्या लेकर आते हैं तो दीवारों की दरारें और जर्जर छत देखकर भय खाते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं न्याय मिलने से पहले चौकी की दीवारें कब्र न बन जाएं। आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने मंगलवार को पुलिस चौकियों व थाना भवन और पुलिस कर्मियों के आवासों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। दहशत के बीच पुलिस चौकी में बैठे पीआरडी जवान ने बताया कि क्या करें, उनकी तो यहां बैठे रहना मजबूरी है।
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