परिवार की सलामती को जेब से भरते किराया
Banda News - बांदा में 18 थाने और 90 पुलिस चौकियों के आवास जर्जर हो गए हैं। पुलिसकर्मी परिवार के साथ रहने में मजबूर हैं और कई जवान किराए के कमरों में रहते हैं। मरका थाने का एक सिपाही बताता है कि वह थाने के आवास में रहने में असुरक्षित महसूस करता है। शहर का पुलिस क्लब भी जीर्ण-शीर्ण है।

बांदा। जिले में 18 थाने और 90 पुलिस चौकियां हैं। इन थानों में आवास भी जर्जर व पुराने हो गए हैं। कहीं छत की पपड़ी झड़ती है तो कहीं छज्जा। ऐसे में दहशत के बीच रक्षक परिवार के साथ रहने को विवश हैं। डर के मारे तमाम पुलिस के जवान किराए से कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं। तनख्वाह से हर माह पांच से छह हजार रुपये भरते हैं, ताकि परिवार सलामत रहे। मरका थाने के एक सिपाही ने बताया वह यहां तीन वर्ष से हैं। थाने के आवास में जो कमरा मिला है वह जर्जर है। इसलिए कस्बा में किराए से कमरा लिया हैं।
इसी तरह शहर के बाबूलाल चौराहा स्थित पुलिस क्लब का भवन 100 वर्ष पुराना है। यह बेहद जीर्ण-शीर्ण हो गया है। जब कभी प्लास्टर गिरता है तो रिपेयरिंग करा दी जाती है। यहां 20 जवान दहशत के साये में हैं। इनमें से कई दरोगा व सिपाहियों ने शहर में ही किराए से कमरा ले रखा है।
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