किताब व ड्रेस खरीद में खाली हो रही अभिभावकों की जेब

Apr 06, 2026 10:13 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांदा
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Banda News - बांदा। शासन प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी से अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में किताब व ड्रेस खरीद में खाली हो रही अभिभावकों की जेब

किताब व ड्रेस खरीद में खाली हो रही अभिभावकों की जेब

बांदा। शासन प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी से अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में लुट रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का बस्ता व फीस में 20 से 25 हजार रुपये खर्चा आ रहा है। प्राइवेट विद्यालयों के संचालक और दुकानदारों के बीच कमीशनबाजी में अभिभावकों की जेब खाली हो रही है। संचालक विद्यालयों में तमाम सुविधाओं व अच्छी पढ़ाई का दावा कर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। साथ ही दुकानदार किताबों आदि में प्रकाशित मूल्य में एक रुपये नहीं कम कर रहे हैं। जिले में संचालित करीब दो सौ प्राइवेट स्कूलों में इस समय प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।

विद्यालयों में जो बच्चे पूर्व से पढ़ रहे हैं, कक्षोन्नति के बाद उन्हें नई किताबें लेने के लिए ही बाध्य किया जा रहा है। स्कूलों से बकायदा उन्हें बुक डिपो का पर्चा दिया जा रहा है, जिसमें कापी-किताबों और स्टेशनरी के दाम भी लिखे हैं। कुछ विद्यालय ने तो परिसर में ही दुकान खुलवा रखी है। आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने सोमवार को इस संबंध में पड़ताल की और अभिभावकों से बात की तो सभी ने महंगी पढ़ाई को लेकर पीड़ा जाहिर की। अभिभावकों ने बताया कि कक्षा एक में बच्चे को करीब 20 किताबें और 40 से ज्यादा कॉपियां लाने को बाध्य किया जा रहा है। कक्षा एक की अंग्रेजी व हिंदी की किताब 300 से 400 रुपये तक में दी जा रही है। जबकि, एनसीईआरटी की किताब 30 से 40 रुपये में मिलती है। इसके अलावा टाई, बेल्ट, यूनीफार्म की साज-सज्जा पर तीन से चार हजार खर्च हो रहे हैं। भवन व प्रवेश शुल्क के नाम पर चार से छह हजार रुपये और तीन माह की फीस के साथ यह दस हजार रुपये पहुंच रहा है। इसी तरह कक्षा के अनुसार खर्च बढ़ता जाता है। पांचवी के बच्चे के प्रवेश व कॉपी किताब में 30 हजार रुपये तक खर्च पहुंच रहा है। जिसके घर में तीन-तीन बच्चे हैं, वह अभिभावक बेहद परेशान है।----------------------एसी का शुल्क, बच्चों को पंखे भी नहीं नसीबबांदा। शहर के तमाम प्राइवेट विद्यालयों में बच्चों को एसी में बैठाकर पढ़ाने का वादा किया जाता है। इसी हिसाब से महंगा शुल्क वसूला जाता है। जब बच्चे स्कूल जाते हैं तो उन्हें पंखा के हवा तक नसीब नहीं होती है। शहर के कालूकुआं स्थित एक निजी विद्यालय की संचालिका ने बताया कि एसी चलाने में बिजली का बहुत बिल आता है। इसलिए जब कभी चलाते हैं।-------------------बोले अभिभावक-हमारी नातिन स्नेहा कक्षा तीन में एक निजी स्कूल में पढ़ रही है। चौथी में प्रवेश कराना है। करीब सात हजार रुपये में कापी-किताबें मिली हैं। पांच हजार रुपये यूनीफार्म आदि में खर्च हो गए। इन स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है।-राजेश----------------सरकारी स्कूलों में सभी जानते हैं कि पढ़ाई कैसी होती है। निजी स्कूल संचालक इसका भरपूर फायदा उठाते हैं। बेटे सुयश का कक्षा दो में नाम लिखवाया है। करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए हैं।-अरुण यादव--------------वर्जन--निजी स्कूल संचालकों द्वारा मनमानी फीस वसूली व ज्यादा शुल्क वसूली को लेकर शिकायतें आने पर कार्रवाई की जाएगी। शासन से जो मानक निर्धारित है, उसी के आधार पर ही संचालक फीस ले सकते हैं।-अव्यक्तराम तिवारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा

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