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बांदा

बिना नेटवर्क और मोबाइल ऑनलाइन पढ़ाई बनी आफत

हिन्दुस्तान टीम,बांदाPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:50 AM
बांदा। वरिष्ठ संवाददाता 
 कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के साथ स्कूल...
1 / 2बांदा। वरिष्ठ संवाददाता कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के साथ स्कूल...
बांदा। वरिष्ठ संवाददाता 
 कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के साथ स्कूल...
2 / 2बांदा। वरिष्ठ संवाददाता कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के साथ स्कूल...

बांदा। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के साथ स्कूल खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। प्राइमरी के स्कूल पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए एक जुलाई से खुल जाएंगे। हालांकि सिर्फ प्रशासनिक कार्य होंगे। बच्चों को स्कूल नहीं आना होगा। पढ़ाई ई-पाठशाला के जरिए जारी रहेगी। हकीकत दावों से इतर है। बहुत से बच्चों के अभिभावक के पास मोबाइल नहीं है। जिनके पास मोबाइल है तो रीचार्ज के पैसे नहीं जुट पाते या फिर ग्रामीणक्षेत्रों में बिजली और नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। ऐसे में ई-पाठशाला से पढ़ाई की सच्चाई खुद-ब-खुद समझी जा सकती है।

हर बच्चा स्कूल पहुंचे और शिक्षित हो। इसी मकसद के साथ प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील से लेकर काफी-किताब और ड्रेस मुहैया कराई जाती है। प्राइमरी स्कूलों में ज्यादातर गरीब तबके के बच्चे पढ़ते हैं। पूरी तरह सरकारी व्यवस्था पर आधारित शिक्षा कोविड महामारी के चलते ऑनलाइन में बदल चुकी है। सरकारी आंकड़ों और कागज पर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए विभाग और शिक्षक-शिक्षिकाएं जुटे हैं। पर हकीकत दावों से इतर है। स्कूलों में बने क्लासवार व्हाट्सएप ग्रुप में पंजीकृत छात्र संख्या के मुकाबले 30 प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों के पास मोबाइल है। किसी क्लास के दो बच्चे ग्रुप से जुड़े हैं तो किसी के छह। ऐसे में मोबाइल के अभाव में ज्यादातर बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई से दूर हैं।

गांव महुई निवासी संजय गुप्ता ने बताया कि उनके दो लड़के कक्षा पांच व सात में पढ़ते हैं। जब से कोविड के चलते स्कूल बंद हैं, तब से पढ़ाई पूरी तरह से चौपट है। ऑनलाइन शिक्षा बच्चों की समझ में नहीं आती है। दिनभर खेलने में समय जा रहा है।

महुई निवासी प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि बेटियां अवनी और प्रीति गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। जब से स्कूल बंद हुए हैं, तब से बच्चों का पढ़ाई की तरफ ध्यान नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे ज्यादा नेटवर्किंग समस्या हावी है। गांव में कई बच्चों के अभिभावकों के पास मोबाइल की सुविधा नहीं है।

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