
दस वर्ष बाद गुम बेटा मिला तो संगीता की आंखों में छलक पड़े आंसू
Banda News - बांदा। संवाददाता चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा करते समय मां से बिछड़ा छह वर्षीय
बांदा। संवाददाता चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा करते समय मां से बिछड़ा छह वर्षीय बच्चा दस वर्ष बाद मिला तो मां संगीता के आंसू छलक पड़े। बेटे को जी भर के निहारा और उससे लिपट कर रोई। आपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस ने बच्चे को छह माह पहले बरामद किया था। तब से उसकी मां की तलाश की जा रही थी। सूरत में रह रही मां को बुलवाया और बच्चा उसके सुपुर्द किया। बच्चे ने बताया कि उसे बंधुवा बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ बाल बंधुवा मजदूरी की रिपोर्ट भी दर्ज की है। मरका थाने के मऊ गांव निवासी संगीता सिंह वर्ष 2015 में अपने छह वर्षीय बेटे बउवा को लेकर चित्रकूट परिक्रमा करने आईं थीं।

उसके साथ गांव के कुछ और लोग भी थे। परिक्रम के समय बेटा मां बिछड़ गया। संगीता ने उसे पूरे परिक्रमा व चित्रकूट सभी जगह तलाश की पर कहीं पता नहीं चला। पुलिस को भी सूचना दी। करीब दो वर्ष तलाश के बाद संगीता को लगा कि अब कलेजे का टुकड़ा नहीं मिलेगा। वह सूरत में मेहनत-मजदूरी करने लगी। उधर, छह माह पहले बउवा मटौंध से महोबा जाने वाली रेलवे लाइन के किनारे जा रहा था। तभी ट्रैक मैन ने डायल-112 को सूचना दी। पीआरवी ने उससे पूछताछ करते हुए महोबा पुलिस चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर भेजा दिया। बच्चे की काउंसिलिंग के दौरान उसने अपना पता ग्राम मऊ, थाना मर्का व बबेरू बताया। इसके बाद महोबा पुलिस ने बच्चे को बाल कल्याण समिति बांदा भेजा। पुलिस की विशेष टीमों का गठन कर बच्चे के मां को खोजने के प्रयास किए गए। थाना मरका, कोतवाली देहात, कोतवाली नगर व जनपद के अन्य थानों में बच्चे के परिजनों की खोज की गई। चित्रकूट के सभी थानों व कामदगिरी परिक्रमा पथ में पुलिस ने पंफलेट लगवाए। बच्चे ने बताया कि कुछ लोगों ने उसे अपने घर में बंधुवा बनाकर रखा था और प्रताड़ित करते हुए मजदूरी करा रहे थे। थाना मानव तस्करी रोधी में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। 12 अक्तूबर को कोर्ट के समक्ष चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। वहीं कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग मजदूरी करने गुजरात भी जाते हैं। संयुक्त पुलिस टीम ने गुजरात के रहने वाले लोगों से बातचीत की। करीब छह माह के कठिन प्रयासों के बाद बच्चे की मां संगीता देवी का पता चला। उसको गुजरात से बांदा बुलाया गया। शुक्रवार को पुलिस ने बच्चों को संगीता के सुपुर्द किया। दस वर्ष के बाद अपने जिगर के टुकड़े को देखा तो वह रो पड़ी। बच्चे को मां से मिलने में इनका रहा योगदान बांदा। दस वर्ष पहले बिछड़े बच्चे को मां से मिलने में मानव तस्करी रोधी पुलिस थाना के प्रभारी निरीक्षक अखिलेश प्रताप सिंह, विजय सिंह, गुमशुदा सेल व डीसीआरबी के प्रभारी निरीक्षक रामजीत गौड़, यूनिसेफ के मंडलीय तकनीकी सलाहकार राजेश कुमार सैनी, चाइल्ड लाइन के परियोजना समन्वयक आकाश यादव, पर्यवेक्षक शिवसंपत, एसआई अनिल उपाध्याय, सिपाही प्रशांत यादव, महिला सिपाही स्वेतला मौर्य व ज्योति गुप्ता की अहम भूमिका रही। सभी ने छह माह तक पूरी मेहनत व लगन के साथ काम किया।

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