अब अवैध खनन पर एनजीटी करेगी 19 मार्च को सुनवाई
Banda News - बांदा जनपद में अवैध खनन का मामला एनजीटी तक पहुंच गया है। जांच के दौरान अधिकारियों ने साक्ष्य जुटाए। सीएजी की रिपोर्ट में 11 जिलों में अवैध खनन का खुलासा हुआ है। अब मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। एनजीटी ने संयुक्त कमेटी का गठन भी किया है।

बांदा। जनपद में हो रहे अवैध खनन का मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गया है। इसको लेकर बीते 18 फरवरी को एनजीटी की टीम ने साड़ी खादर खंड-77 जनपद पहुंचकर जांच पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए थे। जांच के दौरान पाल्यूशन कंट्रोल, वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी शामिल थे। । इस मामले की सुनवाई 25 फरवरी को होनी थी। जिसमें अब अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। बुंदेलखंड सहित प्रदेश के 11 जिलों में अवैध खनन और खनिज के परिवहन के नाम पर हुए फर्जीवाड़े को लेकर सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में उजागर किया था। दिसंबर माह में पर्यावरण पैरोकार आशीष सागर दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर एनजीटी की मुख्य बेंच ने प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और डीएम को नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए थे।
याचिका में शामिल बांदा की साड़ी खंड- 77 बालू खदान की जांच के लिए संयुक्त कमेटी भी गठित की गई थी। पैलानी तहसील में साड़ी (खंड-77) बालू खदान में उड़ाई जा रही पर्यावरण एवं खनन नियमों की धज्जियों की जानकारी दी गई थी है। जिसमें सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया है कि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर सहित फतेहपुर, कानपुर देहात, कौशांबी आदि 11 जिलों में पट्टा क्षेत्र के बाहर 268 हेक्टेयर में अवैध खनन किया गया है। जिसको लेकर एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. सेंथिल तथा डा. अफरोज अहमद की बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका में उठाए गए तथ्यों को गंभीर बताते हुए साड़ी खदान की जांच के लिए संयुक्त कमेटी गठित की थी। इसमें प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव पर्यावरण और प्रमुख सचिव वन विभाग सहित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा डीएम और खदान संचालक पट्टाधारक को शामिल किया है। खान अधिकारी राज रंजन ने बताया कि एनजीटी ने सुनवाई की तिथि बढ़ा दी है। अब मामले की सुनवाई 19 मार्च को करेगी।
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