Farmers adopt organic farming make use of chemical fertilizers - रसायनिक उर्वरक से करें तौबा, जैविक खेती को अपनाएं किसान DA Image

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रसायनिक उर्वरक से करें तौबा, जैविक खेती को अपनाएं किसान

रसायनिक उर्वरक से करें तौबा, जैविक खेती को अपनाएं किसान

खेती बारी में लगातार रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेतों की उर्वरा शक्ति बर्बाद हो रही है। ऐसे में किसान अपने में जैविक उर्वरक का प्रयोग कर जैविक खेती करें। जैविक उर्वरक से जहां फसल की पैदावार अच्छी होगी वहीं फसलों में कीट रोगों का भी प्रकोप कम होगा। अतर्रा में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जानकारी दी गई।

लखनऊ की संस्था ने अतर्रा में राज्य स्तरीय जैविक कृषि प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कासा पार्टनर के जनपद गाजीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर के कसिानों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। क्षेत्रीय किसानों को जैविक खेती और जैविक उर्वरक के बारे में जानकारी दी गई। इतना ही नहीं किसानों को जैविक उर्वरक बनाने की विधि भी बताई गई। प्रशिक्षक देवीदीन, रोहित कुमार ने जैविक कृषि के महत्व के बारे में बताया। देशी बीज, परम्परागत फसले, मिश्रित खेती, बीज शोधन, कीटनाशक प्रबन्धन, गौपालन, जैविक खादों के बारे में वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, हरी खाद, जीवामृत, घनजीवामृत, कीटनाशक, में नीमास्त्र, ब्रम्हास्त्र, अग्नेयास्त्र, सोंठास्त्र, दशपर्णी अर्क, पांचपर्णी अर्क, ताब्रयुक्त छाछ तैयार करने की विधि को बताया गया। पंकज बागवान ने कहा कि किसान अपनी जरुरत और अपने परिवार की जरुरतों को पूरा करने के लिए खेतीबारी करें। संस्था के निदेशक अशोक कुमार ने कहा कि रासायनिक खादों व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से हमारे भोजन में जहर आ रहा है। जैविक खेती के लिए हमारे पास जल, जंगल जमीन, जानवर है। लेकिन इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हम सभी को जैविक खेती के बारे में एक बार फिर से सोचना होगा तभी हम अपने खेतों को बचा सकेगें। इस मौके पर बुद्धविलाश, सुखलाल, अर्जुन प्रसाद आदि मौजूद रहे।

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