
विलुप्त हो रहे ‘सारस’ को बचाने के लिए डॉ.यशमिता ने छेड़ी मुहिम
Banda News - डॉ. यशमिता चमकीले रंगों वाली पेंटेड स्टॉर्क को बचाने के लिए जागरूकता मुहिम चला रही हैं। उन्होंने विद्यालयों में प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं और स्थानीय समुदाय को संरक्षण के लिए प्रेरित किया है। उनकी संस्था ने पेंटेड स्टॉर्क के घोंसले वाले स्थलों के संरक्षण के लिए परियोजना शुरू की है।
बांदा। संवाददाता प्रकृति संरक्षक के रूप में प्रसिद्ध चमकीले रंगों वाली पेंटेड स्टॉर्क (सारस) को बचाने के लिए डॉ. यशमिता मुहिम चला रही हैं। वह जिले भर में लोगों को जागरूक कर रही हैं और इन पक्षियों के महत्व से अवगत कराते हुए उन्हें इनके संरक्षण को प्रेरित कर रही हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम में उन्होंने कई विद्यालयों में प्रतियोगिताएं कराईं। डॉ.उल्मन यशमिता नितिन ने पेंटेंड स्टॅार्क के संरक्षण के लिए द हैबिटैट्स ट्रस्ट के नाम से स्वयं सेवी संस्था बनाई है। इसमें कई लोगों को जोड़ा है। उन्होंने बताया कि यह उत्तर प्रदेश की निवासी पक्षी प्रजाति है। इस समय एक बार फिर अपने पारंपरिक घोंसले वाले स्थलों पर प्रजनन मौसम की शुरुआत के लिए लौट आए हैं।

यह आकर्षक पक्षी है, जो अपने विशिष्ट रंगरूप और पारिस्थितिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। इनका घोंसले वाले आवासों की ओर आगमन सामान्यतः अगस्त माह से शुरू हो जाता है। जिले में इनके तीन महत्वपूर्ण घोसला स्थलों की पहचान की गई है। इनमें सदर तहसील में परम पुरवा, बबेरू के पल्हरीऔर टोलाकला गांव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सारस को बचाने के लिए संस्था ने ‘कम्युनिटी-ड्रिवन कंज़र्वेशन ऑफ पेंटेड स्टॉर्क नेस्टिंग साइट्स इन उत्तर प्रदेश’ नाम से परियोजना शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य पेंटेड स्टॉर्क के आवासों का संरक्षण व स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए विद्यालयों में पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। ग्रामीणों को इन पक्षियों को बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सारस पर्यावरण संरक्षण की प्रमुख कड़ी है। अब इनकी संख्या में तेजी से कमी आ रही है। ---------

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