जेडी की जांच में वित्तीय अनियमितता के दोषी मिले डीडी

Newswrap हिन्दुस्तान, बांदा
share

Banda News - बांदा में जिला पंचायत राज अधिकारी और उप निदेशक के बीच विवाद बढ़ रहा है। उप निदेशक परवेज आलम पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है, जिसमें सरकारी आवास के लिए किराया भत्ता लेना शामिल है। शिकायत के बाद संयुक्त निदेशक ने जांच की, जिसमें उप निदेशक द्वारा सहयोग न करने की बात सामने आई। कार्रवाई शासन के पाले में है।

जेडी की जांच में वित्तीय अनियमितता के दोषी मिले डीडी

बांदा। जिला पंचायत राज अधिकारी व उप निदेशक पंचायत कार्यालय में अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच रार बढ़ती जा रही है। संयुक्त निदेशक की जांच में उप निदेशक वित्तीय अनियमितता के दोषी पाए गए हैं। सरकारी आवास लेने के बाद भी किराया भत्ता ले रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं पर भी उन्होंने जांच कर आख्या भेजी है। अधिकारियों ने जांच में डीडी द्वारा सहयोग न करने की बात भी कही गई है। अब उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर गेंद शासन के पाले में है। रायबरेली जनपदद के ग्राम गुरदी का पुरवा (लालगंज) निवासी योगेंद्र प्रताप सिंह ने 12 नवंबर 2025 को विधान परिषद सचिवालय के विशेष सचिव को पत्र भेजकर शिकायत की थी।

उन्होंने डीडी पंचायत परवेज आलम खां पर कर्मचारियों से व्यक्तिगत कार्य लिए जाने व अनियमितता की शिकायत की थी। शासन ने मामले की जांच संयुक्त निदेशक पंचायत जयदीप त्रिपाठी ने पंचायत निदेशालय के वित्त एवं लेखाधिकारी के साथ 24 फरवरी को मौके की जांच की। इसके बाद 20 मार्च को जांच आख्या पंचायत निदेशक ने विशेष सचिव को भेजी। बताया गया कि दो सदस्यीय टीम ने जांच की। अधिकारियों ने बताया कि उप निदेशक परवेज आलम ने जांच के लिए अभिलेख मांगे गए, पर नहीं उपलब्ध कराए। कहा कि संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति से संबंधित शिकायतीपत्र की जांच में सहयोग न करके डीडी ने शासन के आदेशों की अह्वेलना की है। संयुक्त निदेशक ने जांच रिपोर्ट में बताया कि उप निदेशक ने कार्यालय में नियम विरुद्ध पांच सफाई कर्मचारियों को संबंद्ध कर रखा है। उधर, आहरण वितरण अधिकारी व डीआरडीए के परियोजना निदेशक राजेश ने 17 जून 2025 को पंचायतीराज निदेशालय को अवगत कराया है कि मंडलीय उप निदेशक पंचायत परवेज आलम ने जिला पंचायत उद्योग परिसर को सितंबर 2024 से अपने आवास के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। साथही हर माह वेतन के साथ मकान का किराया भत्ता भी ले रहे हैं। जांच के अनुसार जबकि यह शासनादेश के खिलाफ है। परियोजना निदेशक ने इस संबंध में निदेशालय से मार्गदर्शन भी मांगा था। उन्होंने डीडी की पे बिल की छायाप्रति भी भेजी है, जिसमें उनके द्वारा किराया भत्ता प्राप्त करने के साक्ष्य हैं। इस संबंध में उप निदेशक पंचायत परवेज आलम से कई बार बात करने का प्रयास किया गया, पर उनका कोई जवाब नहीं मिल सका।मांगा गया स्पष्टीकरण-डीपीआरओ और डीडी पंचायत के मामले में जांच चल रही है। दोनों पक्षों से मामले को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अजीत कुमार, मंडलायुक्त , चित्रकूट धाम मंडल बांदा

Voice of UP
Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।