Banda News: करोड़ों से बना विशिष्ट मंडी व अवस्थापना केंद्र चढ़े भ्रष्टाचार की भेंट
Banda News: बांदा में खास मंडी स्थल और अवस्थापना केंद्र भ्रष्टाचार और उपेक्षा के शिकार हो गए हैं। सपा शासनकाल में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ये मंडी स्थल अब निष्प्रयोज्य पड़े हैं। 11 साल बाद भी व्यापारियों ने दुकानों की नीलामी नहीं कराई है और रख-रखाव के अभाव में स्थिति जर्जर हो गई है।

Banda News: बांदा। किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य दिलाने के लिए करीब दशक भर पहले करोड़ों रुपये से बनकर तैयार हुए विशिष्ट मंडी स्थल व अवस्थापना केंद्र भ्रष्टाचार व उपेक्षा की भेंट चढ़ गए। सपा शासनकाल में बुंदेलखंड विशेष पैकेज से जिले में 64 करोड़ की लागत से महोबा रोड में हाईवे किनारे हाईटेक सुविधाओं से लैस विशिष्ट मंडी स्थल और पैलानी, बबेरू, नरैनी व अतर्रा तहसील में दो-दो करोड़ की लागत से अवस्थापना केंद्र बनवाए गए थे। 11 वर्ष पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इनका उद्घाटन किया था। तब से आज तक ये मंडी स्थल निष्प्रयोज्य पड़े हैं। यहां व्यापारी पहुंच सके और न ही किसान। अधिकारियों के भ्रष्टाचार व भाजपा शासन की उपेक्षा की वजह से यहां की सड़कें, भवन व टीनशेड सब जर्जर होकर ढहने की कगार पर पहुंच गए।
भ्रष्टाचार की परतें
विशिष्ट मंडी स्थलों व अवस्थापना केंद्रों के निर्माण में मंडी परिषद के अफसरों व कर्मचारियों ने जमकर कमशीनखोरी की। इसकी परतें भी लगातार खुलती जा रही हैं। तीन करोड़ 16 लाख 70 हजार 255 रुपये के गबन में मंडल मंडी परिषद के छह पूर्व अफसरों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मंडी स्थल निर्माण में प्रयोग होने वाले स्टील व लोहे की खरीद में अधिकारियों ने जमकर घोटाला किया और करोड़ों रुपये का बंदरबाट कर मालामाल हो गए। जबकि बुंदेलखंड के किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत दिलाने की मंशा से योजना आयोग ने वर्ष 2009-10 में विशिष्ट मंडी स्थल व 20 अवस्थापना केंद्रों को जिले में मंजूरी दी थी। वर्ष 2015 में बनकर ये तैयार हुए तो खुद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इनका उद्घाटन किया। किसानों को उनकी तरक्की के सब्जबाग दिखाए गए, लेकिन उन्हें बाद में मायूसी मिली। विशिष्ट मंडी स्थल दशक भर से वीरान पड़े हैं। महोबा रोड पर नेशनल हाईवे के किनारे वर्ष 2015 में 64 करोड़ रुपये से बनी विशिष्ट मंडी एक दशक बाद भी आबाद नहीं हो पाई। आज तक किसी आढ़ती व व्यापारियों ने दुकानों की नीलामी नहीं कराई। जबकि इस मंडी के आसपास लगभग 35 गांव आवाद हैं। 11 साल बाद हालत यह है कि अब यह जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। कमरों में चमगाड़दों का डेरा है तो सड़कों पर बबूल की झांड़ियां उग आई हैं। व्यापारियों को दुकानों और चबूतरों का आवंटन ही नहीं किया गया। रख-रखाव के अभाव में दुकानें, चबूतरा, कार्यालय भवन आदि गिरने ढहने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कमरों के खिड़कियों के कांच और फर्श टूट गई है। शटर जंग खा गए हैं। यह विशिष्ट मंडी मुख्यालय से आठ किमी दूर है। व्यापारियों का कहना है कि तिंदवारी रोड मंडी में जो दुकान चार सौ की है, वह यहां चार हजार की है। ऐसे में व्यापारी वहां जाने को तैयार नहीं हैं।
बिजली और रख-रखाव की समस्या
मंडी स्थल में बिजली की समस्या है। तीन करोड़ बिल बकाया है और कनेक्शन काट दिया गया है। दुकान नीलामी को दो-तीन बार बोली लगाई,पर कोई जाने को तैयार नहीं हैं। अब यहां झाड़-झंखाड़ की भरमार है। इसे साफ कराने व मरम्मत का कोई बजट नहीं है।
-प्रदीप रंजन, सचिव, मंडी समिति, बांदा
सवाल और जवाब
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


