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7 अगस्त, 2020|6:42|IST

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13 सालों से चल रहा एसटीएफ के शहीद जवानों का मामला


 
13 सालों से चल रहा एसटीएफ के शहीद जवानों का मामला

13 साल बीत गए पर अभी तक एसटीएफ के छह जवानों समेत सात की डाकू ठोकिया द्वारा की गई हत्या के मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। दो जिलों में हुई सुनवाई के बाद यह मुकदमा अंतिम स्टेज में है। कोरोना की वजह से इसकी सुनवाई प्रभावित हुई। गुरुवार को प्रकरण में तारीख थी पर एक कर्मी के संक्रमित होने की वजह से सुनवाई टल गई। अब तारीख का निर्धारण सोमवार को होगा।

यूपी एसटीएफ के छह जवानों की हत्या के मामले में कर्वी कोतवाली में 23 जुलाई 2007 को डाकू अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया समेत 16 के खिलाफ हत्या आदि धाराओं में तीन मामले दर्ज हुए। इसके बाद 21 को आरोपित करते हुए चार्जशीट दाखिल हुई। ट्रायल 16 लोगों पर चला। इसमें ठोकिया अगस्त 2008 में मारा गया। इसके अलावा दो और की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी है। यह मामला मुकदमा 140/7 सरकार बनाम अनीस के रूप में चर्चित रहा। वर्ष 2014 तक इसकी सुनवाई कर्वी की अदालत में हुई। इसके बाद जेल में बंद डाकू ज्ञान सिंह की गुहार पर हाईकोर्ट के निर्देश पर बांदा में एंटी डकैती कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट के विशेष शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी बताते हैं कि साक्ष्य व ट्रायल पूरा हो चुका है। इब फाइनल सुनवाई होनी है। कोरोना की वजह से सुनवाई प्रभावित हुई है। इस समय 13 लोग जीवित है, जिन पर सुनवाई चल रही है।

दरअसल 22 जुलाई 2007 को यूपी एसटीएफ ने उस समय केडाकू शिवकुमार उर्फ ददुआ , ठोकिया व छोटवा पटेल के लिए जाल बिछाया। एक ही दिन एक ही समय में तीन टीमों ने अलग-अलग जगहों में इन डकैत गिराहों पर धावा बोला। उस समय के सबसे बड़े इनामी डाकू ददुआ, छोटवा पटेल समेत 10 डाकुओं को झलमल व इटवा के पास जंगल में एसटीएफ ने ढेर कर दिया। एसटीएफ की तीसरी टुकड़ी ने ठोकिया गिरोह पर भी फायर झोंके पर वह बच निकला। उसका साथी मइयादीन पटेल मारा गया। इसके बाद तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और टीम को शाबाशी दी। ददुआ की मौत से बौखलाए ठोकिया ने उसी रात जंगल से गाड़ियों से लौट रही यूपी एसटीएफ पर बघोलन के पास घात लगाकर हमला कर दिया। डकैतों के हमले में छह जवान शहीद हुए। डकैतों की गोली से पुलिस का मुखबिर भी मारा गया। एक अन्य मुखबिर भी घायल हुआ था। सफलता एक साल बाद तब मिली जब एसटीएफ ने दुर्दांत ठोकिया को उसी के गांव में ढेर कर दिया था। एसटीएफ के अफसरों ने उस समय बताया था कि उस काली रात को ठोकिया से मुठभेड़ के बाद गैंग के एक सदस्य का शव लाद पूरी टीम वाहनों से लौट रही थी। बारिश के मौसम में रात के अंधेरे में बीच जंगल में चारों तरफ से घेरकर डकैतों ने गोलियां चलाई थी। इसमें छह जवान शहीद हुए थे। गोलियों से पुलिस वाहन छतिग्रस्त हो गए थे। तब के इंसपेक्टर डीके यादव व एक सीओ स्तर के अधिकारी ने घायल होने के बावजूद जवाबी गोलियां चलाई तब गैंग पीछे हटा वर्ना एसटीएफ के अत्याधुनिक असलहे भी लुट गए होते। इस दौरान राजेश चौहान, लक्ष्मण शर्मा, गिरिश चन्द्र नागर, बृजेश यादव, उमाशंकर यादव, ईश्वर देव सिंह व मुखबिर रामकरन मारे गए थे। जबकि शिवकुमार अवस्थी,डीके यादव ,शरद, योगेश ,श्री चन्द्र यादव, बृजेश तिवारी, राममिलन सिंह, उपेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह के अलावा मुखबिर श्रीपाल घायल हुए थे।

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  • Web Title:Case of martyred soldiers of STF going on for 13 years