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बेटी की लड़खड़ा रही जुबान, जेवर गिरवी रख करा रहे इलाज

बेटी की लड़खड़ा रही जुबान, जेवर गिरवी रख करा रहे इलाज

संक्षेप:

Banda News - बांदा में एक पिता अपनी बेटी के इलाज के लिए संघर्ष कर रहा है, जिसे दरिंदे ने दुष्कर्म के दौरान बर्बरता से जीभ काट दी थी। छह महीने बाद भी बेटी ठीक से बोल नहीं पा रही है। सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिला है, और परिवार को डाक्टर की सलाह पर सफाई रखनी पड़ रही है।

Jan 08, 2026 09:13 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांदा
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बांदा। दरिंदे ने दुष्कर्म के साथ बर्बरता पूर्वक जीभ काट ली थी। छह माह बाद भी बेटी सही से बोल नहीं पा रही है। उसकी जुबां लड़खड़ाती है। हंस भी नहीं पा रही है। मां के जेवर रिश्तेदारों के यहां गिरवी हैं। उन्ही रुपयों और कुछ उधार लेकर उसकी इलाज करा रहे हैं। यह दर्द भरी दांस्ता बताते हुए एक पिता का गला रुंध जाता है। बेबस पिता का कहना है कि अभी तक हिम्मत नहीं हारी है कि उसका इलाज नहीं करवा पाऊंगा। मजदूर हूं , खेती भी नहीं है लेकिन सोचता हूं बिटिया जब बड़ी हो जाएगी तो उसका घर कैसे बसेगा।

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क्योकिं डाक्टर ने कह दिया है कि पता नहीं वह कभी मां बन पाएगी या नहीं? जवान होने पर आपरेशन की बात कही है। पांच माह से बांदा में रह रहा पिता : पिता का कहना है कि नाजुक अंगों के आपरेशन होने के बाद डाक्टर ने उसे सफाई में रखने की सलाह दी थी। तब से वह बिटिया को लेकर शहर एक मोहल्ला में रिश्तेदारों के यहां रहा ताकि इंफेक्शन से बचाया जा सके। गांव में है पुलिस का नजर : कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में दरिंदगी की घटना के मामले में मंगलवार को आए फैसले में दोषी अमित रैकवार को फांसी की सजा होने के बाद गांव में खुशी का माहौल है। वहीं पीड़ित परिवार अभी भी दहशत में हैं। उसे डर है कि कहीं दोषी पाए गए युवक का परिवार कोई बड़ी घटना को अंजाम न दे दें। आरोप है कि पीड़िता का पिता धमका रहा है। वहीं आरोपी परिवार इस बात को नकार रहा है। इसको लेकर पुलिस भी चौकन्ना है। बुधवार को गांव पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है। सरकारी सहायता का अब तक नहीं मिला लाभ : पीड़िता बच्ची के पिता का कहना है कि उनके परिवार को सरकारी सहायता के नाम पर धेला नहीं मिला है। दस लाख का प्रतीकात्मक चेक मिला था लेकिन अब तक उनके खाते में एक रुपये नहीं आया है। उधर, प्रोबेशन अधिकारी मीनू सिंह का कहना है शासन स्तर से ही उनके खाते में दस लाख की धनराशि भेजी जाएगी। लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम ने बताया कि दोषी को फांसी की सजा दिए जाने के बाद 24 घंटे के अंदर फैसला उच्च न्यायालय भेज दिया जाता है। करवटें बदलकर गुजरी रात :दोषी अमित रैकवार को फैसला आने के बाद उसके मंडल कारागार भेज दिया गया था। फैसले के समय वह निराश हो गया था। जेल में रात में करवटें बदलता रहा। हालांकि जेलर अधिकारियों का दावा है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है उसके खाना भी खाया है। उसे किसी तरह की समस्या नहीं हैं।