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बांदाबांदा को नहीं मिलेगा केन-बेतवा गठजोड़ का फायदा

हिन्दुस्तान टीम,बांदाPublished By: Newswrap
Fri, 20 Apr 2018 11:30 PM
बांदा को नहीं मिलेगा केन-बेतवा गठजोड़ का फायदा

केन-बेतवा गठजोड़ से बांदा को फायदा नहीं नुकसान ही होगा क्योंकि बेतवा नदी का पानी केन में सिर्फ बाढ़ में आएगा।

बेतवा का बहाव केन से निचले स्तर पर होने की वजह पानी नहीं आ पाएगा। वैसे भी यूपी-एमपी में मोरंग खनन की वजह से 427 किलोमीटर लंबी केन नदी मप्र इलाके में करीब डेढ सौ किमी अप्रैल में ही सूख गई है। नदी के प्रकृतिक स्त्रोत अवैध खनन की वजह से बंद हो रहे है। यह बात 33 दिनों में केन नदी पदयात्रा करने वाले सैनडै्रप व वेदितम संस्था के पदयात्रियों ने कही।

शुक्रवार को बांदा में बातचीत में केन नदी पदयात्रा करने वाले भीम सिंह रावत व सिद्वार्थ अग्रवाल न कहा कि केन-बेतवा गठजोड़ के बारे में बुंदेलखंड के लोगों को पता ही नहीं। सिर्फ इतना जानते है कि गठजोड़ के बाद यहां बेतवा का पानी भी आएगा जो गलत है। इस गठजोड़ के बारे में बांदा व पन्ना के ग्रामीणों के साथ चर्चा भी नहीं की गई। इस योजना का डीपीआर 13 साल पहले बना पर पानी बंटवारे का फार्मूला अभी तक नहीं बना। केन बेतवा गठजोड़ से पन्ना रिजर्व टाइगर में बनने वाले दो धन-बांध का उदघाटन भी बिना वन विभाग की एनओसी लिए कर दिया गया। नदी का भूजल दोहन तेजी से बढ़ रहा है। खनन माफिया पानी के अंदर से बालू निकालते है जिससे इसके प्राकृतिक स्त्रोत बंद हो रहे है। तभी तो मप्र इलाके में कई जगह नदी सूख गई है। यूपी क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन पिछले कई सालों में हुआ जिससे जल प्रवाह घटा है। इस पदयात्रा के दौरान नदी में दो रेलवे पुल,21 रोड पुल, पांच रपटा यूपी व एमपी में बने मिले। नदी किनारे 30 प्रकार की वनस्पति नष्ट हो गई है। अभी भी कई जगह नदी में सीपियां नजर आ जाती है। इस नदी किनारे बने प्राचीन दुर्गो में सिर्फ बांदा का भूरागढ़ ही संरक्षित है। बांकी नरैनी क्षेत्र का रनगढ व पन्ना का रमगढ नष्ट हो गया है। एमपी इलाके में अजीतपुर, बहिरासर आदि जगहों में प्राचीन इमारतें है। इस पूरे सफर में नदी में अविरल जल प्रवाह कही नजर नहीं है जबकि यह बांदा के अलावा कई इलाकों में जीवनधारा बन कर प्रवाहित है। हजारों की प्यास इसी नदी से बुझती है।

केन में 13 छोटी बड़ी नदियों का संगम

केन का उदगम मप्र के कटनी जिले के गांव ममौर तहसील रीठी के जंगल में है। वहां से संगम स्थल चिल्ला बांदा के बीच 23 छोटी बड़ी नदियां केन से जुडती है। इसके अलावा कई बरसाती नाले भी है। वहां भी इसके साथ छेड़छाड़ है। उदगम में तो सूखी है पर आगे यूपी सीमा के आसपास प्राकृतिक स्त्रोंतो की वजह से कई जगह अथाह पानी है।

पांच सालों में 12 सेमी घटा केन का जलस्तर

पिछले पांच सालों में बांदा जिले में केन का जलस्तर गर्मियों में 12 सेमी घटा है। कभी सदानीरा रहने वाली यह नदी जिले में कई इलाकों में सूखने की कगार पर है। अप्रैल महीने में इस वर्ष केन का जलस्तर 93.37 मीटर पर है। वर्ष 2017 में 93.49 मीटर था। वर्ष 2016 में 93.23 मीटर था। वर्ष 2015 में 93.57 मीटर और वर्ष 2014 में 93.93 मीटर था।

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