पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों और नदियों के चीरहरण से बांदा आगबबूला

हिन्दुस्तान, बांदा
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बांदा। बुंदेलखंड के बांदा का तापमान देश भर सबसे अधिक है। बुधवार को तापमान पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों और नदियों के चीरहरण से बांदा आगबबूला

पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों और नदियों के चीरहरण से बांदा आगबबूला

बांदा। बुंदेलखंड के बांदा का तापमान देश भर सबसे अधिक है। बुधवार को तापमान ने 37 साल का रिकार्ड तोड़कर 49 डिग्री पर पहुंच गया। पर्यावरण विद और सामाजिक कार्यकर्ता भी मान रहे हैं कि बांदा का इको सिस्टम गड़बड़ा गया है। इससे तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जिले में खनिज संपदा होने के चलते यहां दिन रात केन समेत सभी नदियों में पोकलैंड गरज रही हैं। एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर नदियों की जलधारा को रोककर किया जा रहा जल स्रोतों को नष्ट होने के साथ जलीय जीवों के लिए भी खतरा मंडरा रहा है।‌ वहीं पहाड़ों को खोदकर छोड़ दिया गया है। बुंदेलखंड में लाइफ लाइन कही जाने वाली केन बेतवा परियोजना में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान की गई है। इसी तरह पपरेंदा सुमेरपुर मार्ग को फोरलेन किया जा रहा है। जिसको लेकर बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है। इन काटे गए पेड़ों के बदले इतने पेड़ नहीं रोपे गए हैं। जिससे बांदा का तापमान आगबबूला है। जिला खनिज अधिकारी राज रंजन का कहना है कि मानक के अनुसार ही खनन किया जा रहा है। अगर कहीं पर अवैध खनन पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है। बांदा का तापमान पहले भी इतना दर्ज हो चुका है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए काटे गए थे 1.90 लाख पेड़

बुंदेलखंड में विकास योजनाओं का खामियाजा हरे पेड़ों को भुगतना पड़ा था। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे निर्माण में 1.90 लाख पेड़-पौधे काटे गए हैं। इनमें कई पेड़ प्राचीन और विरासत वृक्ष की श्रेणी के हैं। बांदा के कनवारा गांव के पास एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए लगभग 200 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष काट दिया था। वहीं वन विभाग का पौधरोपण कागजी ज्यादा रहता है। इस साल भी 64 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। बांदा का वन क्षेत्र महज तीन प्रतिशत है। जबकि इसे 33 फीसदी होना चाहिए।

जिले में हो रहे अंधाधुंध खनन पर रोक लगानी चाहहिए

बांदा में बढ़ते तापमान का मुख्य कारण पर्यावरणीय असंतुलन है। नादियों के पानी को रोक के अवैध बालू खनन से नदियों की प्राकृतिक संरचना नष्ट हो रही है, भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है। वहीं, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से हरित आवरण कम होता जा रहा है, जो स्थानीय जलवायु को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन दोनों गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव से बांदा जिले में गर्मी की तीव्रता बढ़ी है, वातावरण में नमीं कम हुई है।

- डॉ. रुपेन्द्र सिंह , हिमनद एवं प्राकृतिक आपदा विशेषज्ञ, जेएनयू दिल्ली

- बुंदेलखंड के बांदा में बढ़ता तापमान चिंतनीय है। इसका मुख्य कारण है कि यहां का इकोसिस्टम गड़बड़ा रहा है। नदियां वन जल सभी का एक दूसरे जुड़ाव है। इस पर नीति नियंताओं को विचार करने की जरूरत है।

- उमाशंकर पांडेय, पद्मश्री

- जिले में मौजूदा में 101.3 किमी. में ओपेन फारेस्ट है। तापमान बढ़ने के कई कारण है। मौजूदा साल में पौधरोपण अभियान की तैयारी चल रही है।

-अरविंद, प्रभागीय वनाधिकारी, बांदा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांदा का तापमान कितना पहुंचा है?
बांदा का तापमान 49 डिग्री पर पहुंच गया है।
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