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किससे सिर सजेगा जीत का सेहरा, चार को खुलेगा राज

बलरामपुर। अविनाश त्रिपाठी श्रावस्ती लोकसभा के छठे चरण में चुनाव सम्पन्न हो गया है।...

किससे सिर सजेगा जीत का सेहरा, चार को खुलेगा राज
हिन्दुस्तान टीम,बलरामपुरMon, 27 May 2024 07:25 PM
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बलरामपुर। अविनाश त्रिपाठी

श्रावस्ती लोकसभा के छठे चरण में चुनाव सम्पन्न हो गया है। अब हार-जीत को लेकर विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के समर्थकों में गुणा-भाग जारी है। इस चुनाव में मतदाताओं का उत्साह व जज्बा हिलोरें मार रहा था। यही कारण था कि लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। मतदाताओं ने अपनी पसंद के उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद कर दिया है। किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा यह चार जून को मतगणना के बाद ही पता चलेगा।

श्रावस्ती लोकसभा में जिले की तीन विधानसभा शामिल हैं। इसमें 1162450 मतदाता थे जिसमें तीन विधानसभाओं में कुल 571538 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। लोकसभा के इस चुनाव में जिले की तीन विधानसभाओं में सिर्फ 49.17 फीसदी ही मतदान हुआ है। लोकसभा के इस चुनाव में 12 प्रत्याशी मैदान में थे। जिसमें प्रमुख रूप से भाजपा के साकेत मिश्र, सपा के राम शिरामणि वर्मा व बसपा के मुइनुद्दीन खां उर्फ दद्दन खां चुनावी मैदान में थे। माना जा रहा है कि इन्हीं तीन प्रत्याशियों के बीच में चुनाव की लड़ाई है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी राम शिरोमणि वर्मा ने 5320 वोटों से जीत दर्ज की थी। बसपा से चुनाव जीतने वाले राम शिरोमणि वर्मा को इस बार पार्टी ने निष्कासित कर दिया था। बावजूद इसके वह सपा-कांग्रेस गठबंधन में सपा से टिकट लाने में कामयाब रहे। जातीय समीकरण को देखते हुए सपा ने उन्हें यहां से प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में सबसे ज्यादा हार-जीत को लेकर भाजपा और सपा के समर्थकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। समर्थक व पार्टी पदाधिकारी क्षेत्रीय व जातीय समीकरण पर अपनी जीत को सुनिश्चित मान रहे हैं। यही नहीं कयासबाजी के इस दौर में लोग सट्टे भी खूब लगा रहे हैं। फिलहाल चुनाव परिणाम क्या होगा यह तो चार जून के बाद ही पता चलेगा। बावजूद इसके मतगणना के पूर्व जिले में एक बार फिर राजनीतिक तपिश अपने अंतिम चरम पर है।

मतदान प्रतिशत कम होने से प्रभावित हो सकता है चुनाव परिणाम

इस बार के चुनाव में खासकर लोकसभा में शामिल बलरामपुर के तीन विधानसभाओं के मतदाताओं में कोई खासा उत्साह नहीं दिखाई पड़ा। यही कारण था कि मतदान का प्रतिशत 50 फीसदी भी नहीं पहुंच सका। राजनीति के जानकारों की मानें तो कम मतदान प्रतिशत राजनीतिक पार्टियों खासकर उम्मीदवारों की गणित को बिगाड़ सकता है। जिले की गैसड़ी विधानसभा में सबसे अधिक 51.10 फीसदी मतदान हुआ है। हमेशा से भाजपा के लिए मुफीद साबित होने वाली बलरामपुर सदर विधानसभा में इस बार सबसे कम सिर्फ 47.18 फीसदी ही मतदान हुआ है। वहीं तुलसीपुर में 49.52 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

अपने-अपने हिसाब से हर कोई कर रहा है जीत का दावा

चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस समय सिर्फ चुनावी हार-जीत की चर्चा हो रही है। जो जिस प्रत्याशी या पार्टी का समर्थक है वह उसके जीत का दावा कर रहा है। गौरा चौराहा क्षेत्र के रमन सिंह का कहना है कि उनके यहां सिर्फ कमल ही कमल था। यहां से जैसे जहदरिया व अल्लानगर के क्षेत्र में पहुंचिए तो लोग साइकिल चलने की बात कह रहे थे। यही स्थिति बलरामपुर सदर की है। नगर क्षेत्र में अधिकतर वार्डों में लोग सपा और भाजपा की लड़ाई मान रहे हैं। अलग-अलग विधानसभाओं में भी इसी तरीके की बातें सामने आ रही हैं। चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, इसके लिए चार जून तक इंतजार करना पड़ेगा। परिणाम को लेकर हर दल के लोगों में बेहद बेचैनी है।

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