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अनाज भंडारण में सल्फास की गोली, कैंसर का कारण

हिन्दुस्तान टीम,बलरामपुरNewswrap
Thu, 02 Dec 2021 10:25 PM
अनाज भंडारण में सल्फास की गोली, कैंसर का कारण

उतरौला। संवाददाता

अनाज भण्डारण में सल्फास की गोलियां डालना सीधे कैंसर को दावत देना है। ऐसे रसायनों से इंसान की बीमारी से लड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है। इस रसायन के प्रयोग से जुखाम से लेकर कैंसर तक हर बीमारी की पकड़ में ऐसे व्यक्ति जल्दी आते हैं। प्रकृति से हमें तोहफे में मिले इम्यून सिस्टम में कमजोरी आती है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है। यह जानकारी कृषि बीज गोदाम प्रभारी डा. जुगुल किशोर ने देते हुए बताया कि एल्युमीनियम फास्फेट जिसे सल्फास कहा जाता है। इसका प्रयोग जानकारी के अभाव में किसान अनाज भण्डारण के समय करते हैं, जो बिल्कुल ग़लत है। जबकि बिना खर्च के आर्गेनिक व देशी तरीके से अनाज को सुरक्षित रखने का तरीका मौजूद है। नीम की पत्ती से लेकर मिर्च, हींग का प्रयोग कीटों से बचाने में कारगर है। जल्दबाजी में किसान ऐसे रसायनों का इस्तेमाल कर अपने ही सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कपड़े को तीन से चार परत बानने के बाद बीच में हींग का टुकड़ा रखकर अनाज भण्डारण में दो तीन जगह रखने से कीड़े इसके गंध से पास नहीं फटकते और किसी तरह से नुकसान भी नहीं है। इसी प्रकार यदि बीज संजोकर रखने हैं तो आप इन्हें सरसों तेल में मलकर राख में रखने से सालों साल तक कोई समस्या नहीं होती है। अनाज भण्डारण करने की परंपरा हमारे देश में प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक विधि रही है ताकि अनाज सुरक्षित व पवित्र भी बनी रहे। आजकल स्टील की बनी टंकियों को अनाज रखने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। इस तरह के टंकियों में अनाज भण्डारण से पूर्व तीन चार दिन धूप में रखें और इसके भीतरी सतह में नीम के तेल व कपूर का लेप करें जिससे अंदर अंडे लार्वे खत्म हो जाए। अनाज को सुखाकर रखें। अगर हो सके तो प्याज, लहसुन, एवं तुलसी की सूखी पत्तियां भी डालें। इससे भण्डारण किया गया अनाज सुरक्षित रहेगा।

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