Balrampur News: पीएचसी पर नहीं मिल रहा इलाज, मुख्यालय तक भटकते हैं मरीज

हिन्दुस्तान, बलरामपुर
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Balrampur News: बलरामपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सकों, संसाधनों और मैन पॉवर की भारी कमी है। 28 लाख की जनसंख्या को चिकित्सा सेवा मिले इसके बावजूद हालत बदहाल हैं। अधिकतर केन्द्रों पर दवाएं नहीं मिलतीं और मरीजों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।

Balrampur News: पीएचसी पर नहीं मिल रहा इलाज, मुख्यालय तक भटकते हैं मरीज

Balrampur News: बलरामपुर, संवाददाता। गांव कस्बों के लोगों को घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का सरकार ने निर्माण कराया। इसके अलावा सभी ब्लाक मुख्यालयों पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में एक बड़ा अस्पताल संचालित होता है। इन सबके बावजूद चिकित्सकों, संसाधनों और अन्य मैन पॉवर की भारी कमी के कारण आकांक्षी जिला बलरामपुर के ग्रामीण क्षेत्र की जनता को सरकारी चिकित्सीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता है। प्राथिमक स्वास्थ्य केन्द्रों का आलम यह है कि यहां न तो चिकित्सक मिलते हैं और न ही दवाएं। अधिकतर केन्द्रों पर सामान्य जुकाम, बुखार और खांसी की दवाओं से लेकर चोट लगने पर मरहम, पट्टी और टिटनस के इंजेक्शन तक नहीं लग पाते। शाम होते ही ग्रामीण क्षेत्रों के इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर सन्नाटा पसर जाता है। जिसके लिए मरीज और तीमारदारों को जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति

जिले में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 35 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व 337 आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इनके जरिये ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 28 लाख से अधिक आबादी को सरकारी चिकित्सीय सेवा देने का दावा किया जा रहा है। हिंदुस्तान की पड़ताल में व्यवस्थाएं इससे उलट नजर आयीं। यूं तो स्वास्थ्य विभाग में सभी प्राथिमक स्वास्थ्य केन्द्रों पर एनएचएम व संविदा चिकित्सकों के तैनाती का दावा किया। इन सबके बावजूद करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मिले जो या तो फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे थे या फिर यहां पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी मरीजों को दवाएं वितरित कर रहे थे। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की हालत तो बदहाल ही है जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी मानक के अनुरूप चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। यही कारण है कि इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को समुचित इलाज न मिल पाने के कारण जिला मुख्यालय से लेकर अन्य क्षेत्रों में भागदौड़ करनी पड़ती है। अशिक्षा और गरीबी के कारण आएदिन मरीज झोलाछाप से अपना इलाज कराते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है। ऐसे कई प्रकरण अब तक सामने आ चुके हैं। फिर भी व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं है।

डॉक्टरों की तैनाती की कमी

137 के सापेक्ष सिर्फ 49 स्थायी चिकित्सकों की है तैनाती : हमारी पड़ताल में यह बात सामने आयी कि जिले में सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर मानक के अनुसार 137 स्थायी चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। आकांक्षी जनपद जिसमें नीति आयोग स्वास्थ्य और चिकित्सा के पैरामीटर पर काम कर रहा है, दुर्भाग्य की बात यह है कि मौजूदा समय में इन सभी ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केन्द्रों पर सिर्फ 72 स्थायी चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें से 12 ऐसे चिकित्सक है जो पीजी करने के लिए छुट्टी पर हैं। 11 ऐसे चिकित्सक हैं जिन्हें जिले में तैनाती तो जरूर मिली, लेकिन वे कभी ड्यूटी करने नहीं आए। इसमें से कई चिकित्सकों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई भी हुई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो संविदा चिकित्सकों व कर्मियों से किसी तरह से स्वास्थ्य केन्द्रों का संचालन कराया जा रहा है। इसके अलावा अन्य नर्सिंग स्टाफ भी इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर न के बराबर है।

स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित सामान्य प्रश्न

✦बलरामपुर में स्वास्थ्य केन्द्रों की क्या स्थिति है?−
बलरामपुर में स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति बेहद खराब है, जहां न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही दवाएं मिलती हैं।
Hindustan | Bureau

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